
मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में लोहवन (जमुनापार क्षेत्र) स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में मंगलवार की देर रात भीषण आग लग गई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। आग इतनी तेजी से फैली कि चंद मिनटों में ही पूरी फैसिलिटी काले धुएं और ऊंची लपटों की चपेट में आ गई। काला धुआं आसमान में कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दे रहा था, जिससे आसपास के निवासियों में दहशत फैल गई। फायर ब्रिगेड की 10 गाड़ियों ने लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
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मशीनरी जलकर खाक

गनीमत रही कि, इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। हालांकि, प्लांट की मशीनरी और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।घटना की जानकारी मिलते ही मथुरा फायर कंट्रोल रूम की इंचार्ज कोमल विशाल उपाध्याय ने तुरंत एक्शन लिया और कुछ ही मिनटों में जमुनापार पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई। आग की विकराल स्थिति को देखते हुए आसपास के इलाकों से अतिरिक्त दमकल गाड़ियां बुलाई गईं।
प्लांट की संकरी गलियों और पहुंच मार्ग की वजह से बड़ी गाड़ियां अंदर तक नहीं जा पाईं, इसलिए छोटी और मोबाइल फायर यूनिट्स को प्राथमिकता दी गई। दमकल कर्मियों ने पानी की तेज धार से लपटों पर हमला बोला, लेकिन प्लास्टिक पाइपों, केमिकल्स और अन्य ज्वलनशील सामग्री के कारण आग बार-बार भड़क उठती रही। प्रारंभिक जांच में आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है।
दमकल अधिकारियों का कहना है कि, प्लांट में बिजली की ओवरलोडिंग या पुरानी वायरिंग से चिंगारी निकली, जो देखते ही देखते प्लास्टिक पाइप लाइन और अन्य फ्लेमेबल मटेरियल में फैल गई। एसटीपी प्लांट में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी, पंप, फिल्टर और पाइपिंग सिस्टम आग की भेंट चढ़ गए। प्लांट की कई महत्वपूर्ण यूनिट्स पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे सीवेज ट्रीटमेंट प्रोसेस प्रभावित हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि कूलिंग ऑपरेशन अभी भी जारी है, ताकि दोबारा आग न भड़के।
खड़े हुए ये सवाल
यह एसटीपी प्लांट मथुरा शहर के सीवेज को ट्रीट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत विकसित कई एसटीपी में से एक है। मथुरा में गंगा की सफाई और सीवेज मैनेजमेंट के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जैसे गोकुल बैराज पर 60 एमएलडी एसटीपी और अन्य डिस्ट्रिब्यूटेड यूनिट्स। इस प्लांट की क्षमता और महत्व को देखते हुए आग लगना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ? क्या इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन पुराने थे? इन सवालों की जांच अब शुरू हो गई है।
आग लगने के बाद आसपास के इलाकों में भगदड़ मच गई। लोग घरों से बाहर निकलकर प्लांट की तरफ देखते रहे, जहां से लगातार काला धुआं उठ रहा था। कई निवासियों ने बताया कि, रात के समय आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि दूर से ही लग रहा था मानो पूरा इलाका जल रहा हो। पुलिस ने इलाके को सील कर दिया और ट्रैफिक को डायवर्ट किया ताकि दमकल गाड़ियां आसानी से काम कर सकें।
फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर आग बुझाई। कई कर्मी घंटों तक धुएं और गर्मी में काम करते रहे, जिससे उनके पसीने छूट गए। मथुरा के एसडीएम और फायर ऑफिसर ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक रिपोर्ट में कोई हताहत नहीं होने की पुष्टि की गई है, क्योंकि घटना रात के समय हुई जब प्लांट में स्टाफ की संख्या कम थी। हालांकि, प्लांट की मशीनरी को करोड़ों का नुकसान हुआ है।
नुकसान का होगा आंकलन
अधिकारियों ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही नुकसान का सटीक आकलन किया जाएगा। जांच में शॉर्ट सर्किट के अलावा अन्य संभावित कारणों जैसे केमिकल लीक या मेंटेनेंस की कमी को भी देखा जाएगा। यह घटना मथुरा में हाल के महीनों में लगी कई आग की घटनाओं की कड़ी है। इससे पहले वृंदावन में होटल और अन्य इलाकों में भी आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। शहर में औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर यूनिट्स में सुरक्षा मानकों की सख्ती से जांच की मांग उठ रही है।

पर्यावरणविदों का कहना है कि एसटीपी जैसे महत्वपूर्ण प्लांट्स में फायर सेफ्टी सिस्टम, स्प्रिंकलर, फायर अलार्म और रेगुलर मेंटेनेंस अनिवार्य होना चाहिए। अगर ये सिस्टम ठीक से काम करते तो आग इतनी तेजी से नहीं फैलती। स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली है कि कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन वे चिंतित हैं कि प्लांट बंद होने से सीवेज का क्या होगा। शहर में सीवेज ओवरफ्लो या प्रदूषण की समस्या न बढ़े, इसके लिए जल्द रिपेयर और रिस्टोरेशन की मांग की जा रही है।
जल्द चालू होगा प्लांट
जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद प्लांट को जल्द से जल्द चालू किया जाएगा और सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाएगा। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। मथुरा जैसे धार्मिक और पर्यटन महत्व वाले शहर में ऐसे हादसे न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि जनजीवन को भी प्रभावित करते हैं। प्रशासन ने जांच कमिटी गठित करने की बात कही है, जिसकी रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और कूलिंग ऑपरेशन जारी है।
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