
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में कुछ नाम ऐसे नेता हुए हैं, इनकी छवि कभी धुंधली नहीं होती। इन्हीं नामों में से एक प्रमुख नाम हेमवती नंदन बहुगुणा का है, जो प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कद्दावर नेता थे। शनिवार को हेमवती नन्दन की जयंती लखनऊ के योजना भवन में मनाई गई। यहां सीएम योगी आदित्यनाथ ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने योजना भवन परिसर में स्थापित बहुगुणा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उन्हें नमन किया और उनके व्यक्तित्व को भारतीय राजनीति का एक अडिग और महत्वपूर्ण स्तंभ करार दिया।
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हेमवती नंदन के व्यक्तित्व पर डाला प्रकाश
सीएम ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह और जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए हेमवती नंदन बहुगुणा के बहुआयामी व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। योगी ने कहा कि, बहुगुणा का जीवन केवल सत्ता के गलियारों तक सीमित नहीं था, बल्कि उनका पूरा सफर जनसेवा, राष्ट्रवाद और कड़े संघर्षों की एक लंबी दास्तान है।

उन्होंने कहा कि, उत्तर प्रदेश में विभिन्न विभागों के मंत्री के रूप में और बाद में मुख्यमंत्री के रूप में बहुगुणा की सेवाएं न केवल सराहनीय रहीं, बल्कि वे आज भी प्रशासनिक कुशलता के लिए एक मिसाल मानी जाती हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि, बहुगुणा का अपना एक स्पष्ट विजन था, जिसकी छाप आज भी उत्तर प्रदेश के विकास कार्यों में साफ देखी जा सकती है।
हेमवती नंदन बहुगुणा के प्रारंभिक जीवन और स्वाधीनता संग्राम में उनकी भूमिका को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि, उनका जन्म 25 अप्रैल 1919 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश और वर्तमान उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद के एक छोटे से गांव में हुआ था। पहाड़ों की गोद में पले-बढ़े बहुगुणा के भीतर संघर्ष करने का जज्बा बचपन से ही था। जब देश महात्मा गांधी के नेतृत्व में आजादी की अंतिम लड़ाई लड़ रहा था, तब बहुगुणा ने एक युवा छात्र के रूप में खुद को राष्ट्र सेवा में झोंक दिया।
प्रखर छात्र नेता थे बहुगुणा
1942 से 1946 के दौरान भारत छोड़ो आंदोलन में उनकी सक्रिय सहभागिता ने ब्रिटिश हुकूमत की नींद उड़ा दी थी। उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा और यातनाएं भी सहनी पड़ीं, लेकिन उनका इरादा कभी डगमगाया नहीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि, बहुगुणा उस प्रख्यात विश्वविद्यालय के एक प्रखर छात्र नेता रहे थे। उनकी वक्रता शैली और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें न केवल छात्रों के बीच लोकप्रिय बनाया, बल्कि उन्होंने समकालीन राजनीति के बड़े दिग्गजों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा।
छात्र राजनीति से मुख्यधारा की राजनीति में उनका प्रवेश बहुत ही स्वाभाविक और प्रभावशाली था। आजादी मिलने के बाद, जब 1952 में देश में पहले आम चुनाव हुए, तो वे पहली बार उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य निर्वाचित हुए। यह उनके संसदीय जीवन की एक ऐसी शुरुआत थी, जिसने आगे चलकर उन्हें देश के सबसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में एक कद्दावर मंत्री बनाया।
प्रशासनिक क्षमता की सराहना की
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में बहुगुणा की प्रशासनिक क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि, केंद्र सरकार में पेट्रोलियम, रसायन और वित्त जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभालते हुए उन्होंने अपनी योग्यता का लोहा मनवाया। उनका विजन आधुनिक भारत के निर्माण में सहायक सिद्ध हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुगुणा की राजनीति का केंद्र हमेशा आम आदमी और गरीब तबका रहा।
वे एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने विकास को केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे धरातल पर उतारने के लिए निरंतर प्रयास किए। आज जब हम उत्तर प्रदेश को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं, तो बहुगुणा जी जैसे नेताओं का जीवन और उनकी कार्यशैली हमारे लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
इस विशेष कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और पूर्व मुख्यमंत्री को नमन किया। उनके साथ लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, अमरेश कुमार और विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल व रामचंद्र प्रधान सहित शासन-प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बिरले राजनेता थे बहुगुणा
कार्यक्रम के दौरान सभी वक्ताओं ने एक स्वर में माना कि बहुगुणा एक ऐसे विरले राजनेता थे, जिन्होंने दल से ऊपर उठकर देश को महत्व दिया। उनके नाम के साथ जुड़ा हिमपुत्र संबोधन न केवल उनके जन्मस्थान को दर्शाता है, बल्कि उनके हिमालय जैसे विशाल और अडिग व्यक्तित्व का भी प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि हेमवती नंदन बहुगुणा का लंबा राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन त्याग और तपस्या का जीवंत उदाहरण है। वर्तमान पीढ़ी के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि वे ऐसे महान नायकों के आदर्शों को आत्मसात करें। बहुगुणा की जयंती केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह संकल्प लेने का दिन है कि हम उनके द्वारा देखे गए समृद्ध और सशक्त उत्तर प्रदेश के सपने को पूरा करने की दिशा में कार्य करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि, उनके द्वारा किए गए सुधार और विकास के कार्य आज भी प्रदेश के प्रशासन के लिए मार्गदर्शक का काम कर रहे हैं। योजना भवन में बहुगुणा की प्रतिमा हमें निरंतर याद दिलाती रहेगी कि राजनीति का वास्तविक अर्थ सत्ता की प्राप्ति नहीं, बल्कि जन-कल्याण की पराकाष्ठा है।
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