लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर बड़ा अपडेट, 15 मई तक टला लोकार्पण, ये है असली वजह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और औद्योगिक केंद्र कानपुर के बीच की दूरियों को समेटने वाले बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के लोकार्पण का इंतजार थोड़ा और बढ़ गया है। हालांकि यह परियोजना अपने अंतिम चरण में है, लेकिन कुछ तकनीकी अड़चनों और एनओसी न मिल पाने के कारण फिलहाल इसके उद्घाटन की तारीख को आगे बढ़ा दिया गया है।

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तकनीकी ऑडिट का पेंच

उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को नया आयाम देने वाली इस 63 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना को लेकर एनएचएआई के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि, शेष बची कमियों को 15 मई तक हर हाल में दुरुस्त कर लिया जाएगा। यही वजह है कि इसे आगामी गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण समारोह के साथ शामिल नहीं किया जा सका। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद दोनों महानगरों के बीच का सफर न केवल सुगम होगा, बल्कि समय की भी भारी बचत होगी।

Lucknow-Kanpur Expressway,

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा ने परियोजना की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि, एक्सप्रेसवे पर कुछ फिनिशिंग वर्क और तकनीकी ऑडिट अभी प्रक्रिया में हैं। 15 मई तक सभी सुरक्षा मानकों और तकनीकी औपचारिकताओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बाद ही इसे आम जनता के लिए खोला जा सकेगा।

यह छह लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे लखनऊ के अमौसी क्षेत्र से शुरू होकर कानपुर के आजाद मार्ग तक जाएगा। वर्तमान में लखनऊ से कानपुर के बीच नेशनल हाईवे-27 पर सफर करने वाले यात्रियों को लगभग 90 से 94 किलोमीटर की दूरी तय करने में ढाई से तीन घंटे का समय लगता है, लेकिन इस नए रूट के सक्रिय होने के बाद यह दूरी महज 30 से 45 मिनट में सिमट जाएगी।

दो पहिया और तीन पहिया वाहन प्रतिबंधित

एक्सप्रेसवे की डिजाइन और क्षमता को आधुनिकतम मानकों के आधार पर तैयार किया गया है। इस पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। हालांकि, सुरक्षा और तेज रफ्तार को बनाए रखने के लिए इस पर दोपहिया और तिपहिया वाहनों के प्रवेश को प्रतिबंधित रखा गया है। यह एक्सप्रेसवे केवल चार पहिया और भारी मालवाहक वाहनों के लिए ही उपलब्ध रहेगा।

निर्माण की दृष्टि से इसे दो महत्वपूर्ण पैकेजों में विभाजित किया गया है। पहला पैकेज लखनऊ के स्कूटर इंडिया से बनी (बन्थरा) तक लगभग 17.5 किलोमीटर का है, जो मुख्य रूप से एलिवेटेड सेक्शन है। इसमें 10 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर और कई पुल शामिल हैं, जो लखनऊ के शहरी ट्रैफिक से ऊपर से गुजरेंगे। वहीं, दूसरा पैकेज उन्नाव जिले में बनी से शुक्लागंज तक 45 किलोमीटर का ग्रीनफील्ड सेक्शन है, जो बिल्कुल नए ग्रामीण क्षेत्रों से होकर गुजरेगा।

हाई टेक कैमरों से लैस है हाईवे

इंफ्रास्ट्रक्चर के नजरिए से देखें तो यह उत्तर प्रदेश की सबसे महंगी सड़क परियोजनाओं में से एक है। लगभग 4,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार होने वाले इस एक्सप्रेसवे की प्रति किलोमीटर लागत 60 से 75 करोड़ रुपये के बीच आ रही है। इसमें से करीब 3,000 करोड़ रुपये केवल सिविल निर्माण कार्यों पर खर्च किए गए हैं, जबकि एक बड़ा हिस्सा किसानों को दिए गए भूमि मुआवजे में व्यय हुआ है।

एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए चार बड़े पुल, एक रेलवे ओवरब्रिज और दर्जनों अंडरपास बनाए गए हैं, ताकि स्थानीय लोगों और पैदल यात्रियों को मुख्य मार्ग पार करने में असुविधा न हो। इसके साथ ही, सुरक्षा के लिए एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के तहत 100 से अधिक हाई-टेक कैमरे लगाए गए हैं, जो ओवरस्पीडिंग और लेन उल्लंघन पर ऑटोमैटिक चालान जारी करने की क्षमता रखते हैं, लेकिन इस लग्जरी सफर के लिए यात्रियों को अपनी जेब भी काफी ढीली करनी होगी।

प्रदेश का बड़ा आर्थिक गलियारा

NHAI ने जो टोल दरें प्रस्तावित की हैं, वे मौजूदा नेशनल हाईवे-27 की तुलना में करीब 186 प्रतिशत अधिक हैं। हल्के वाहनों जैसे कार, जीप और एसयूवी के लिए एक तरफा यात्रा का टोल 275 रूपये निर्धारित किया गया है, जबकि 24 घंटे के अंदर वापसी पर यह  415 रूपये होगा। हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए यह दर  445 रूपये और वापसी के लिए  670 रूपये तय की गई है।

वहीं, भारी वाहनों जैसे बस और ट्रक के लिए एक तरफा यात्रा ₹935 की होगी। हालांकि, दैनिक यात्रियों और नियमित आवागमन करने वाले स्थानीय लोगों की राहत के लिए  3,075 रूपये की दर से वार्षिक पास की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के दो सबसे बड़े शहरों के बीच आर्थिक गलियारे के रूप में देखा जा रहा है।

15 मई के बाद मिलेगी हरी झंडी

अमौसी यानी लखनऊ एयर पोर्ट  शहीद पथ के माध्यम से जुड़ने वाला यह मार्ग कान्था, अमरसास और उन्नाव के शुक्लागंज क्षेत्र से होते हुए कानपुर के आजाद मार्ग पर समाप्त होगा, जहां से इसे उद्योग पथ से कनेक्टिविटी मिलेगी। यह रूट गंगा एक्सप्रेसवे से भी लिंक होगा, जिससे पूरे मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दूरी कम हो जाएगी। कानपुर के चमड़ा उद्योगों, लखनऊ के प्रशासनिक और शैक्षणिक केंद्रों के बीच बेहतर तालमेल बैठने से व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की पूरी उम्मीद है। 15 मई के बाद जैसे ही इसे हरी झंडी मिलेगी, यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के विकास की रफ्तार में एक नया अध्याय जोड़ देगा।

 

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