
लखनऊ। लखनऊ के विकास नगर इलाके में बुधवार शाम एक भयानक अग्निकांड ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया। घनी बस्ती वाली झुग्गी-झोपड़ियों में लगी आग ने पल भर में विकराल रूप ले लिया और एक के बाद एक दर्जन से ज्यादा गैस सिलेंडरों के जोरदार धमाकों ने इलाके को युद्धक्षेत्र जैसा बना दिया। आसमान में उठती लपटें और घना काला धुआं कई किलोमीटर दूर से साफ दिखाई दे रहा था, जिससे पूरे शहर में दहशत फैल गई।
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सैकड़ों परिवार बेघर
इस हादसे में सैकड़ों परिवार बेघर हो गए, लेकिन स्थानीय लोगों की बहादुरी और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने बड़े नुकसान को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। घटना बुधवार दोपहर बाद शुरू हुई, जब झुग्गियों के एक हिस्से से धुआं उठना शुरू हुआ। पछुआ हवाओं के तेज झोंकों ने चिंगारियों को भड़काकर आग को तेजी से फैला दिया। देखते-देखते आग ने कई झोपड़ियों को निगल लिया। घरों में रखे घरेलू गैस सिलेंडर आग की चपेट में आ गए और एक के बाद एक फटने लगे।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि, धमाके इतने जोरदार थे कि, आसपास की पक्की इमारतों की खिड़कियां तक हिल उठीं। करीब 10 से ज्यादा सिलेंडरों के फटने की आवाजें सुनकर लोग दहशत में आ गए। आग की लपटें 2-3 किलोमीटर दूर से साफ दिख रही थीं, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस भयावह क्षण में स्थानीय निवासियों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। जब सिलेंडर फटने की आशंका बढ़ गई, तो कई युवाओं और बस्तीवासियों ने अपनी जान पर खेलकर घरों से सिलेंडर निकालना शुरू कर दिया। सुरक्षित जगह न होने के कारण उन्होंने सिलेंडरों को पास की नालियों और पानी भरे गड्ढों में फेंक दिया।
मलबे में दबाए सिलेंडर
इस बुद्धिमत्तापूर्ण तरीके से कई सिलेंडरों के तापमान को नियंत्रित किया गया और संभावित बड़े धमाकों को रोका गया। अगर ये सिलेंडर भी फट जाते तो हताहतों और नुकसान की तस्वीर और भी भयानक होती। सूचना मिलते ही लखनऊ प्रशासन और फायर ब्रिगेड अलर्ट हो गया। आग की विकरालता को देखते हुए 20 से अधिक फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। तंग गलियों और लगातार हो रहे धमाकों के बीच दमकल कर्मियों ने घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद देर रात आग पर काबू पा लिया। उन्होंने मलबे में दबे सिलेंडरों को भी सुरक्षित निकालने का प्रयास किया।

सुरक्षा के मद्देनजर पूरे विकास नगर और आसपास के इलाकों में बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई थी, ताकि कोई शॉर्ट सर्किट आग को और न भड़काए। घटना की गंभीरता को देखते हुए शासन के उच्च अधिकारी खुद मौके पर पहुंचे। मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और डीजी फायर सहित कई आला अधिकारी राहत कार्य का जायजा लेने पहुंचे। उन्होंने तुरंत 10 से ज्यादा एंबुलेंस की व्यवस्था की और घायलों के त्वरित इलाज के लिए अस्थायी कंट्रोल रूम स्थापित किया गया।
जले कंकाल और राख बची
मुख्यमंत्री कार्यालय से भी लगातार निगरानी की जा रही है और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इस अग्निकांड ने विकास नगर की झुग्गी बस्ती को पूरी तरह राख में बदल दिया। मजदूर और दिहाड़ी मजदूरों के छोटे-छोटे घर, उनके जीवन भर की कमाई, कपड़े, राशन और जरूरी दस्तावेज सब जलकर खाक हो गए। आग बुझने के बाद लोग जब अपनी झोपड़ियों के पास पहुंचे तो वहां सिर्फ जले हुए कंकाल और राख बची थी।
जांच के आदेश
प्रशासन अब इन बेघर परिवारों को भोजन, आश्रय और जरूरी मदद उपलब्ध कराने में जुटा है। स्थानीय स्कूलों और रैन बसेरों को राहत शिविर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही, आग लगने के कारणों की गहन जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं, ताकि यह पता चल सके कि, यह लापरवाही का नतीजा था या महज दुर्घटना।

लखनऊ का यह हादसा शहरी नियोजन, घनी बस्तियों में सुरक्षा मानकों और अग्निशमन सुविधाओं की कमी की ओर इशारा करता है। जहां एक तरफ आम नागरिकों की बहादुरी ने बड़े संकट को रोका, वहीं दमकल विभाग की मुस्तैदी ने स्थिति को संभाला।
फिलहाल इलाके में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन हवा में अभी भी धुएं और जले सामान की तेज गंध फैली हुई है। प्रशासन नुकसान का आकलन कर पीड़ितों को उचित मुआवजा और सहायता देने की तैयारी में है, ताकि वे अपनी जिंदगी को फिर से संवार सकें।
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