नोएडा में सैलरी पर संग्राम, सड़कों पर फूटा गुस्सा, घंटों तक थमी रही रफ्तार, लोग परेशान

नोएडा। नोएडा और दिल्ली के बीच सफर करने वाले लोगों के लिए आज का दिन काफी मुश्किल भरा रहा क्योंकि उन्हें सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतार, प्रदर्शन करते लोग और उन्हें कंट्रोल में करती पुलिस का सामना करना पड़ा। दरअसल, नोएडा के फेज-2 में पिछले कई दिनों से सुलग रही नाराजगी की आग आज तेजी से धधक उठी। मामला एक निजी कंपनी के कर्मचारियों की सैलरी से जुड़ा है, लेकिन इसका खामियाजा पूरे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था और आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। चिल्ला बॉर्डर से लेकर सेक्टर 62 तक आज हर जगह सिर्फ सायरन की आवाजें और जाम में फंसी गाड़ियां ही नजर आ रही हैं।

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गाड़ियों में लगाई आग

इस पूरे हंगामे की शुरुआत नोएडा के फेज-2 स्थित एक प्राइवेट कंपनी से हुई, जहां सैकड़ों कर्मचारी पिछले काफी समय से अपनी सैलरी बढ़ाए जाने की मांग कर रहे थे। कर्मचारियों का कहना था कि, बढ़ती महंगाई के दौर में मौजूदा वेतन में घर चलाना नामुमकिन होता जा रहा है, लेकिन कंपनी प्रबंधन उनकी मांगों को अनसुना कर रहा था।

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रविवार तक यह प्रदर्शन काफी हद तक शांत तरीके से किया जा रहा था, लेकिन सोमवार की सुबह होते-होते कर्मचारियों के सब्र का बांध टूट गया और विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। नाराज लोगों ने सड़कों पर खड़ी गाड़ियों में आग लगा दी गई, शीशे तोड़ दिए और जब पुलिस ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, तो उपद्रवियों ने उन पर भी पथराव शुरू कर दिया। इस बवाल की वजह से न केवल कानून-व्यवस्था बिगड़ी, बल्कि नोएडा के सबसे व्यस्त रास्तों पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।

डायवर्जन लागू

ट्रैफिक की बात करें, तो नोएडा पुलिस ने सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई अहम रास्तों पर डायवर्जन लागू कर दिया है। अगर आप चिल्ला बॉर्डर के रास्ते दिल्ली जाने की सोच रहे हैं, तो आपको अपनी योजना बदल लेनी चाहिए। पुलिस ने साफ कर दिया है कि, चिल्ला बॉर्डर से महामाया फ्लाईओवर और फिर वहां से डीएनडी टोल की ओर जाने वाले ट्रैफिक को रोककर दूसरे रास्तों पर मोड़ा जा रहा है।

इसी तरह रजनीगंधा चौक की तरफ भी गाड़ियों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया है, ताकि भीड़ को मुख्य सड़कों पर जमा होने से रोका जा सके। यह स्थिति उन लोगों के लिए बहुत मुश्किल खड़ी कर रही है, जो रोज गाजियाबाद या दिल्ली से नोएडा काम करने आते हैं। सेक्टर 62 का इलाका, जो पहले से ही अपने भारी ट्रैफिक के लिए जाना जाता है, वहां भी एनआईबी पुलिस चौकी की ओर जाने वाले मार्ग पर पहले ही कट से गाड़ियों को डायवर्ट कर दिया गया है।

वैकल्पिक रास्तों पर जाम

शहर के दूसरे छोर यानी परी चौक और ग्रेटर नोएडा की तरफ जाने वाले रास्तों का हाल भी कुछ अलग नहीं है। संदीप पेपर मिल मार्ग और सेक्टर 84 के आसपास के इलाकों में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी है। नोएडा ट्रैफिक पुलिस लगातार सोशल मीडिया के जरिए लोगों से अपील कर रही है कि वे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें, लेकिन सड़कों पर दबाव इतना ज्यादा है कि वैकल्पिक रास्ते भी धीरे-धीरे जाम की चपेट में आ रहे हैं।

इस तरह की घटनाएं हमें नोएडा के उस दौर की याद दिलाती हैं जब करीब एक दशक पहले होजरी कॉम्प्लेक्स और फेज-2 के इलाकों में इसी तरह वेतन और बोनस को लेकर बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। उस वक्त भी सड़कों पर खड़ी सैकड़ों गाड़ियों को निशाना बनाया गया था और कई दिनों तक नोएडा के औद्योगिक इलाकों में कर्फ्यू जैसा माहौल रहा था। इतिहास गवाह है कि, जब भी नोएडा के इन औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों या कर्मचारियों का असंतोष फूटता है, तो उसका सीधा असर दिल्ली-एनसीआर की लाइफलाइन मानी जाने वाली सड़कों पर पड़ता है।

जोन में बंटे इलाके

प्रशासन की तरफ से इस स्थिति को संभालने के लिए पूरी ताकत झोंक दी गई है। जिले की जिलाधिकारी मेधा रूपम खुद मोर्चा संभाले हुए हैं। उन्होंने रविवार को ही इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तमाम उद्योगपतियों और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक लंबी बैठक की थी। प्रशासन को शायद इस बात का अंदाजा था कि, सोमवार को स्थिति बिगड़ सकती है, इसीलिए पूरे इलाके को सेक्टर और जोन में बांटकर वहां स्टेटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती कर दी गई थी। बावजूद इसके, भीड़ का गुस्सा इतना ज्यादा था कि, पुलिस को स्थिति पर काबू पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी उपद्रवी को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन फिलहाल प्राथमिकता सड़कों को खाली कराकर यातायात को सामान्य बनाना है।

इस पूरे घटनाक्रम ने उन हजारों लोगों की परेशानी बढ़ा दी है, जिनका इस प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं था। दफ्तर जाने वाले लोगों के अलावा स्कूल बसें और एम्बुलेंस भी इस जाम में फंसती नजर आईं। गौर करने वाली बात यह है कि नोएडा में जब भी इस तरह का डायवर्जन होता है, तो उसका असर केवल उसी रास्ते पर नहीं पड़ता बल्कि आसपास के छोटे-छोटे लिंक रोड भी पूरी तरह पैक हो जाते हैं। अगर आप अभी घर से निकल रहे हैं, तो बेहतर होगा कि आप सेक्टर के अंदरूनी रास्तों का चुनाव करें या फिर नोएडा मेट्रो की एक्वा लाइन का सहारा लें, क्योंकि मुख्य सड़कों पर अभी भी पुलिस का पहरा है और कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

भारी पुलिस बल तैनात

भविष्य के संदर्भ में देखें, तो नोएडा अथॉरिटी और पुलिस के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि, वे कैसे औद्योगिक क्षेत्रों में इस तरह के अचानक भड़कने वाले विरोध प्रदर्शनों को रोकें। इससे पहले भी किसान आंदोलनों के दौरान हमने देखा है कि किस तरह चिल्ला बॉर्डर हफ्तों तक बंद रहा था, जिससे आम जनता को भारी मानसिक और शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ी थी। आज की घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि एक छोटी सी चिंगारी कैसे पूरे शहर की रफ्तार को रोक सकती है।

फिलहाल फेज-2 में भारी पुलिस बल तैनात है और पीएसी की टुकड़ियों को भी बुला लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि, वे कर्मचारियों और कंपनी प्रबंधन के बीच बातचीत का रास्ता साफ करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि यह विवाद जल्द से जल्द खत्म हो और सड़कों पर लगा यह ताला खुल सके। तब तक के लिए आम जनता को सलाह दी गई है कि वे संयम बरतें और पुलिस द्वारा जारी की गई एडवाइजरी का सख्ती से पालन करें।

 

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