
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में आज का दिन एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में दर्ज किया गया है। महिला आरक्षण और नारी शक्ति के अधिकारों को लेकर राजधानी लखनऊ की सड़कों पर जो जनसैलाब दिखा, उसने स्पष्ट कर दिया है कि, आगामी चुनावों और राज्य की भविष्य की राजनीति में आधी आबादी ही निर्णायक भूमिका में रहने वाली है।
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विपक्षी खेमे में खलबली
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस आंदोलन का नेतृत्व करते हुए विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है। यह पदयात्रा केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि महिलाओं के उस संचित आक्रोश का प्रकटीकरण था, जो वर्षों से अपने राजनीतिक हक की प्रतीक्षा कर रही थीं। इस महा-अभियान के जरिए मुख्यमंत्री ने न केवल महिलाओं को सरकार की मुख्यधारा से जोड़ने की रणनीति तैयार की है, बल्कि विपक्ष के उस चेहरे को भी बेनकाब करने का प्रयास किया है, जो महिला आरक्षण के मुद्दे पर संसद से लेकर सड़क तक केवल टालमटोल की राजनीति करता रहा है।

राजधानी लखनऊ के हजरतगंज और विधानसभा मार्ग पर आज जहां तक नजर जा रही थी, वहां केवल केसरिया और तिरंगे रंगों के बीच नारी शक्ति का उत्साह दिखाई दे रहा था। मुख्यमंत्री आवास से शुरू होकर विधानसभा तक जाने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी जन आक्रोश महिला पदयात्रा की कमान जब खुद योगी आदित्यनाथ ने संभाली, तो हजारों महिलाओं का जोश सातवें आसमान पर पहुंच गया।
इस पदयात्रा में उत्तर प्रदेश के कोने-कोने से आई लगभग 15 हजार से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया। भीषण गर्मी और उत्तर भारत की तपती धूप के बावजूद इन महिलाओं का जज्बा कम नहीं हुआ। मुख्यमंत्री के साथ दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री और संगठन के तमाम वरिष्ठ पदाधिकारी भी कदम से कदम मिलाकर चले। यह नजारा उत्तर प्रदेश की राजनीति में विरला ही देखने को मिलता है, जहां सत्ता के शीर्ष पर बैठा व्यक्ति अपनी पूरी कैबिनेट के साथ जनता के हक के लिए पैदल सड़कों पर उतर आए।
विपक्ष पर सीएम योगी का तीखा हमला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पदयात्रा के समापन पर विधानसभा के समक्ष उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए विपक्ष पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि, जिन राजनीतिक दलों ने दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद महिला आरक्षण के बिल को ठंडे बस्ते में डाल रखा था, वे आज किस मुंह से महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं।
सीएम योगी ने कहा कि, भारतीय जनता पार्टी के लिए महिला सशक्तिकरण कोई चुनावी नारा नहीं, बल्कि एक अटूट संकल्प है। उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के जरिए महिलाओं को वह अधिकार दिया है, जिसका वे दशकों से इंतजार कर रही थीं। मुख्यमंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि, अब उत्तर प्रदेश की महिलाएं जाग चुकी हैं और वे अपने अधिकारों के खिलाफ खड़े होने वाले किसी भी दल को माफ नहीं करेंगी।

योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में सरकार की प्राथमिकताओं को बहुत ही स्पष्ट तरीके से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के लिए समाज के चार स्तंभ महिलाएं, गरीब, युवा और किसानही असली वीआईपी हैं। जब तक इन चार वर्गों का संपूर्ण सशक्तिकरण नहीं हो जाता, तब तक विकास की अवधारणा अधूरी है।
हर गांव, हर मंडल तक पहुंचेगा संदेश
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह जन आक्रोश महिला पदयात्रा केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह एक बड़े आंदोलन की शुरुआत है। सरकार और संगठन ने मिलकर यह तय किया है कि महिला आरक्षण के संदेश को आधी आबादी के अधिकार के रूप में राज्य के हर ब्लॉक, हर मंडल और हर गांव तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए आने वाले महीनों में कार्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला तैयार की गई है, जहां स्वयं सहायता समूहों और महिला मंडलों को इस मुहिम का हिस्सा बनाया जाएगा।
संगठनात्मक स्तर पर इस पदयात्रा को एक जनांदोलन में बदलने की पूरी तैयारी कर ली गई है। लखनऊ की इस पदयात्रा ने वह नींव रख दी है, जिस पर आने वाले समय में जिलेवार रैलियों का निर्माण होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के प्रत्येक बूथ स्तर तक महिला कार्यकर्ताओं की टोलियां बनाई जाएं, जो घर-घर जाकर महिलाओं को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं जैसे उज्ज्वला योजना, मिशन शक्ति, और कन्या सुमंगला योजना के बारे में बताएं।
साथ ही, उन्हें यह भी समझाया जाए कि कैसे कुछ विपक्षी दल महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मार्ग में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी इस मौके पर कहा कि उत्तर प्रदेश की भाजपा इकाई का एक-एक कार्यकर्ता अब आधी आबादी के स्वाभिमान की लड़ाई लड़ेगा।
सुरक्षा के थे पुख्ता इंतजाम
15 हजार से अधिक महिलाओं की इस ऐतिहासिक भागीदारी को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। तेज धूप और लू के थपेड़ों को देखते हुए पूरी पदयात्रा के मार्ग पर हर 100 मीटर पर शीतल जल और प्याऊ की व्यवस्था की गई थी। इसके साथ ही, मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए एंबुलेंस की एक बड़ी चेन तैनात की गई थी। पदयात्रा के दौरान महिलाएं जिस तरह से नारी शक्ति जिंदाबाद और योगी जी को धन्यवाद के नारे लगा रही थीं, उससे साफ था कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाएं मुख्यमंत्री की इस पहल से खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने बताया कि कैसे योगी सरकार की योजनाओं ने उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है और अब राजनीतिक आरक्षण उन्हें समाज में एक नई पहचान दिलाएगा।

विपक्ष की आलोचना करते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि जो लोग ट्विटर और एसी कमरों तक सीमित हैं, उन्हें लखनऊ की इन सड़कों पर उमड़ा यह जनसैलाब देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति भाजपा का दृष्टिकोण हमेशा से सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का रहा है। वहीं, ब्रजेश पाठक ने कहा कि स्वास्थ्य और सुरक्षा के क्षेत्र में यूपी सरकार ने महिलाओं के लिए जो क्रांतिकारी कदम उठाए हैं, उसका परिणाम आज इस भारी समर्थन के रूप में दिख रहा है। पदयात्रा में शामिल महिलाओं ने यह भी संदेश दिया कि वे अब केवल वोट बैंक नहीं रहेंगी, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रियाओं में भी अपनी बराबर की हिस्सेदारी सुनिश्चित करेंगी।
अब नहीं रुकेगा आन्दोलन
जैसे-जैसे यह पदयात्रा विधानसभा के करीब पहुंची, वातावरण में उत्साह और भी बढ़ गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंत में आह्वान किया कि यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है। इसे बूथ स्तर तक ले जाकर हर महिला को उसके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
लखनऊ से शुरू हुई यह पदयात्रा अब उत्तर प्रदेश के हर जिले में एक महिला अधिकार क्रांति के रूप में नजर आएगी। यह स्पष्ट है कि सीएम योगी ने इस पदयात्रा के जरिए न केवल अपनी सरकार की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले एक बहुत बड़ा ‘महिला कार्ड’ खेलकर विपक्ष को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह ‘जन आक्रोश’ पूरे प्रदेश में जहां-जहां फैलेगा, वहां-वहां राजनीतिक समीकरणों का बदलना तय माना जा रहा है।
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