लखीमपुर खीरी: बांकेगंज के बाद अब भीरा में बवाल, धर्मस्थल पर झंडा लगाने को लेकर भिड़े दो पक्ष

लखीमपुर खीरी। जनपद में बीते 24 घंटों के भीतर सांप्रदायिक और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली घटनाओं ने पुलिस और प्रशासनमें बेचैनी पैदा कर दी है। अभी बांकेगंज के मोतीपुर गांव में हुई आगजनी, पथराव और हिंसक झड़प की राख ठंडी भी नहीं हुई थी कि, भीरा थाना क्षेत्र के रूपनपुरवा गांव में एक नए विवाद ने जन्म ले लिया।

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पुलिस ने संभाला मोर्चा 

बुधवार सुबह जिले के इस हिस्से में उस समय भारी तनाव फैल गया जब एक पक्ष द्वारा धर्मस्थल पर नीला झंडा लगाए जाने को लेकर दूसरा पक्ष विरोध में उतर आया। देखते ही देखते स्थिति इतनी नाजुक हो गई कि, दोनों तरफ से लोग लाठी-डंडों के साथ आमने-सामने आ गए। बांकेगंज की घटना से सबक लेते हुए पुलिस ने इस बार मोर्चा संभालने में देरी नहीं की और भारी बल के साथ मौके पर पहुंच गया, जिसे कोई अनहोनी नहीं हुई।

Lakhimpur Kheeri

लखीमपुर खीरी के भीरा थाना क्षेत्र के रूपनपुरवा गांव में बुधवार की सुबह सामान्य दिनों की तरह शुरू हुई थी, लेकिन जल्द ही यह शांति एक बड़े विवाद में बदल गई। बताया जा रहा है कि, गांव के एक पक्ष के कुछ युवकों ने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर वाला नीला झंडा एक धर्मस्थल पर फहरा दिया। जैसे ही दूसरे पक्ष की नजर इस पर पड़ी उन्होंने इसका विरोध किया और इसे अपनी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ बताया।  पहले तो दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई, लेकिन कुछ ही मिनट में इस कहासुनी ने उग्र रूप ले लिया और दोनों पक्षों से दर्जनों लोग सड़क पर जमा हो गए।

धर्मस्थल से हटवाया नीला झंडा

गांव में तनाव की खबर जंगल में आग की तरह फैली। माहौल  खराब होता देख कुछ ग्रामीणों ने अपने दरवाजे बंद कर लिए। इसी बीच किसी ने इसकी खबर भीरा थाने में दे दी। सूचना मिलते ही भीरा थाने से पुलिस का भारी भरकम दल गांव पहुंचा और हालात को काबू में किया। पुलिसकर्मियों ने सबसे पहले भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास किया और फिर विवाद की जड़ यानी उस नीले झंडे को धर्मस्थल से सम्मानपूर्वक उतरवाया।

पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने मामले को और अधिक बिगड़ने से बचा लिया। हालांकि, गांव में अब भी खामोश तनाव पसरा हुआ है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने दोनों पक्षों के मुख्य जिम्मेदार लोगों को थाने तलब किया है, जहां शांति समिति की बैठक और वार्ता का दौर जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी और शांति भंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

दरअसल, भीरा की इस घटना ने पुलिस की चिंता इसलिए बढ़ा दी है क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले मंगलवार को बांकेगंज क्षेत्र के मोतीपुर गांव में भीषण हिंसा हुई थी। मोतीपुर की घटना ने पूरे जिले में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था। वहां डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने की खबर मिलते ही हजारों की संख्या में ग्रामीण सड़क पर उतर आए थे।

पुलिस टीम पर पथराव

आक्रोशित भीड़ ने न केवल लखीमपुर-गोला मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया, बल्कि मौके पर पहुंची पुलिस टीम पर पत्थरों की बारिश कर दी थी। भीड़ इतनी बेकाबू हो गई थी कि, सुरक्षा के लिए पहुंचे सीओ गोला रमेश तिवारी और तहसीलदार की गाड़ियों को निशाना बनाया गया। प्रदर्शनकारियों ने इन सरकारी वाहनों को बीच सड़क पर पलट दिया और दो गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया था।

जिले के बांकेगंज की उस काली शाम की तस्वीरें भयावह थीं, जहां जान बचाकर भाग रहे अधिकारियों को भीड़ ने काफी दूर तक दौड़ाया था। एसपी डॉ. ख्याति गर्ग ने इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि, शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि मोतीपुर का विवाद एक ही जाति के दो अलग-अलग गुटों के बीच प्रतिमा स्थापित करने की जगह को लेकर था। इसी खींचतान में प्रतिमा क्षतिग्रस्त हुई, जिसे बाद में असामाजिक तत्वों ने तूल दे दिया।

पुलिस का कहना है कि, भीड़ में शामिल उपद्रवियों ने जानबूझकर माहौल बिगाड़ने के लिए पुलिस पर हमला किया, जिसमें कई जवान घायल हुए हैं। दूसरी तरफ, ग्रामीणों का पक्ष यह है कि, पुलिस ने निहत्थे लोगों पर लाठीचार्ज किया, जिससे गुस्सा भड़का और हिंसा हुई।

सोशल मीडिया पर पुलिस की नजर

भीरा और बांकेगंज की इन दोनों घटनाओं के तार भले ही अलग-अलग हों, लेकिन दोनों ही मामलों में दलित प्रतीकों और धार्मिक स्थलों को केंद्र में रखकर राजनीति और टकराव की स्थिति पैदा की गई है। रूपनपुरवा गांव में वर्तमान में पीएसी और स्थानीय पुलिस की टुकड़ियों को तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी भी तरह की अफवाह पर लगाम लगाई जा सके।

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प्रशासन लगातार सोशल मीडिया पर भी नजर बनाए हुए है क्योंकि ऐसी घटनाओं के बाद भ्रामक संदेशों के जरिए जिले के अन्य हिस्सों में भी अशांति फैलाने की कोशिशें तेज हो जाती हैं। भीरा थाने में चल रही बातचीत के दौरान पुलिस ने स्पष्ट किया है कि, यदि भविष्य में किसी ने सार्वजनिक स्थलों या धर्मस्थलों पर बिना अनुमति के झंडे या प्रतीक लगाए, तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

लखीमपुर खीरी की भौगोलिक और सामाजिक स्थिति को देखते हुए यहाँ छोटी सी चिंगारी भी बड़े बवाल का कारण बन जाती है। बांकेगंज में हुए नुकसान की भरपाई और दोषियों की पहचान के लिए पुलिस सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग खंगाल रही है, जबकि भीरा में एहतियात के तौर पर गश्त बढ़ा दी गई है।

पुलिस के लिए चुनौती

जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि, वे किसी भी उकसावे में न आएं और आपसी भाईचारे को बनाए रखें। फिलहाल, रूपनपुरवा गांव में पुलिस के पहरे में शांति है, लेकिन मोतीपुर की घटना के जख्म और भीरा की तनातनी ने प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर बार-बार ऐसे संवेदनशील मुद्दे क्यों सिर उठा रहे हैं। आने वाले कुछ दिन लखीमपुर पुलिस के लिए कड़ी चुनौती साबित होने वाले हैं क्योंकि उन्हें न केवल कानून-व्यवस्था बहाल रखनी है, बल्कि जनता के बीच विश्वास भी फिर से पैदा करना है।

 

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