
अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शनों को लेकर उमड़ रहे आस्था के महासागर और उत्तर भारत में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मंदिर ट्रस्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है। अयोध्या में श्रद्धालुओं की सुगमता और सांस्कृतिक मर्यादा को सर्वोपरि रखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नई एडवाइजरी जारी की है।
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बदला दर्शन पास का फार्मेट
इस नई व्यवस्था के तहत न केवल ऑनलाइन दर्शन पास के फॉर्मेट में बदलाव किया गया है, बल्कि श्रद्धालुओं से एक विशेष अपील भी की गई है, जो सीधे तौर पर हमारी सनातनी परंपराओं से जुड़ी है। ट्रस्ट ने अब मंदिर आने वाले भक्तों से भारतीय परिधानों में आने का आग्रह किया है, ताकि मंदिर की पवित्रता और मर्यादा को एक नया विस्तार मिल सके।

राम नगरी अयोध्या में इन दिनों सुबह की पहली किरण के साथ ही जय श्री राम के जयघोष सुनाई देने लगते हैं। हालांकि, चढ़ते सूरज के साथ बढ़ता तापमान श्रद्धालुओं की परीक्षा भी ले रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए प्रशासन और ट्रस्ट ने तालमेल बैठाकर दर्शन की प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल और प्रभावी बनाने की कोशिश की है। ट्रस्ट की ओर से जारी ताजा अपडेट्स में दर्शन पास, पोशाक संहिता और भीषण गर्मी के बीच सुरक्षा इंतजामों को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की गई है।
भारतीय परिधान की अपील
अयोध्या के भव्य मंदिर में रामलला के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ट्रस्ट ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर एक आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है, जहां की मर्यादा को बनाए रखना प्रत्येक भक्त का दायित्व है। इसी क्रम में पुरुषों को धोती-कुर्ता या धोती-पजामा पहनने की सलाह दी गई है, जबकि महिलाओं से अपील की गई है कि वे साड़ी, पंजाबी सूट या चूड़ीदार-दुपट्टा पहनकर ही मंदिर परिसर में प्रवेश करें।
ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि, यह कोई अनिवार्य ड्रेस कोड नहीं है, बल्कि एक विनम्र अपील है। ट्रस्ट का मानना है कि, जब भक्त पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में भगवान के सम्मुख खड़ा होता है, तो वह न केवल अधिक अनुशासित महसूस करता है, बल्कि यह दृश्य मंदिर की गरिमा को भी बढ़ाता है। इस अपील का उद्देश्य पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव से इतर अयोध्या की पावन धरती पर विशुद्ध भारतीय संस्कृति का प्रदर्शन करना है।
बदलते समय और श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए ट्रस्ट ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन दर्शन पास बुकिंग के फॉर्मेट को पूरी तरह अपडेट कर दिया है। अब पास बुक करते समय श्रद्धालुओं को अधिक विकल्प और स्पष्ट श्रेणियां दिखाई देंगी। नए फॉर्मेट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि एक सामान्य व्यक्ति भी बिना किसी तकनीकी उलझन के अपनी सुविधा के अनुसार स्लॉट चुन सके।
श्रद्धालुओं को मिल रही विशेष सुविधा
वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि, यद्यपि सुगम और विशिष्ट दर्शन की मूल व्यवस्थाएं यथावत हैं, लेकिन सामान्य दर्शन पास की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया गया है। अब सामान्य दर्शन पास के माध्यम से एक साथ पांच लोगों का समूह दर्शन कर सकता है, जो विशेष रूप से उन परिवारों के लिए राहत की बात है, जो दूर-दराज के क्षेत्रों से एक साथ अयोध्या पहुंचते हैं।
वर्तमान में अयोध्या में दर्शन की व्यवस्था को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है ताकि भीड़ का प्रबंधन सही ढंग से हो सके। सामान्य दर्शन पास प्राप्त करने वाले श्रद्धालु न केवल प्रभु रामलला और राम दरबार के दर्शन कर पा रहे हैं, बल्कि उन्हें परिसर में नवनिर्मित सप्त ऋषि मंदिर और ऐतिहासिक शेषावतार कुबेर टीला मंदिर तक जाने की अनुमति भी दी जा रही है। वहीं, जिन भक्तों के पास सुगम या विशिष्ट दर्शन पास हैं, उन्हें परकोटा के भीतर स्थित छह अन्य मंदिरों सहित सभी प्रमुख स्थलों के दर्शन की विशेष सुविधा मिल रही है।
8 मई तक स्लॉट फुल
आंकड़ों की बात करें तो प्रतिदिन लगभग 15 से 20 हजार श्रद्धालु इन पासों के माध्यम से सुगमता से दर्शन लाभ ले रहे हैं। ट्रस्ट अब इस संख्या को और बढ़ाने पर विचार कर रहा है ताकि ऑनलाइन बुकिंग में जो वेटिंग की स्थिति बन रही है, उसे कम किया जा सके। फिलहाल स्थिति यह है कि सुगम दर्शन पास के सभी स्लॉट 8 मई तक पूरी तरह फुल हो चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भक्तों में रामलला के दर्शन को लेकर किस कदर उत्साह है।
अयोध्या में इस समय पारा लगातार बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर श्रद्धालुओं की दिनचर्या पर पड़ा है। दोपहर के समय चिलचिलाती धूप के कारण मंदिर परिसर और आसपास के रास्तों पर भीड़ कम देखी जा रही है, जबकि सुबह 11 बजे तक और शाम 4 बजे के बाद भक्तों का रेला उमड़ पड़ता है। गर्मी की इसी चुनौती को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने यातायात व्यवस्था में बड़ी ढील दी है।
पहले टेढ़ी बाजार जैसे इलाकों में ही वाहनों को रोक दिया जाता था, जिसके कारण बुजुर्गों और बच्चों को लगभग तीन किलोमीटर का रास्ता पैदल तय करना पड़ता था। अब प्रशासन ने येलो जोन पास की व्यवस्था को सुदृढ़ किया है, जिससे वाहन मंदिर के काफी समीप तक पहुंच पा रहे हैं। इस बदलाव से श्रद्धालुओं को भीषण लू और धूप से बड़ी राहत मिली है। पुलिस की नाकेबंदी में कमी और रास्तों के सुगम होने से अब श्रद्धालुओं का समय भी बच रहा है और वे कम थकान के साथ दर्शन कर पा रहे हैं।
धार्मिक अनुष्ठान शुरू
मंदिर परिसर में निर्माण कार्यों के साथ-साथ धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम भी निरंतर जारी है। आगामी 29 अप्रैल की तिथि अयोध्या के लिए विशेष होने वाली है। ट्रस्ट के अनुसार, परकोटा में स्थित नवनिर्मित शिव मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी शामिल होने की प्रबल संभावना है। इस विशेष आयोजन के लिए करीब एक हजार प्रतिष्ठित राम भक्तों को आमंत्रण भेजा गया है। मंदिर प्रशासन इस कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है, जिससे परकोटा के धार्मिक महत्व को और अधिक बल मिलेगा।
अयोध्या की गलियों में सनातनी संस्कृति
कुल मिलाकर, अयोध्या का राम मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आधुनिक प्रबंधन और प्राचीन परंपराओं के संगम का प्रतीक बनता जा रहा है। ट्रस्ट की नई एडवाइजरी और पास व्यवस्था में सुधार इस बात का प्रमाण है कि रामलला के दरबार में आने वाला हर भक्त प्रसन्नचित होकर लौटे, यही प्राथमिकता है। श्रद्धालुओं से की गई भारतीय परिधान की अपील को भी समाज के विभिन्न वर्गों का समर्थन मिल रहा है, जिससे आने वाले दिनों में अयोध्या की गलियों में सनातनी संस्कृति का और भी भव्य स्वरूप देखने को मिलेगा।
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