
लखनऊ। Ganga Expressway: प्रदेश की बदलती तस्वीर में अब एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘एक्सप्रेस-वे प्रदेश’ के विजन को धरातल पर उतारते हुए गंगा एक्सप्रेस-वे अब अपने पूर्ण स्वरूप में आने को तैयार है। यह केवल कंक्रीट और डामर की एक सड़क मात्र नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के पश्चिमी छोर को पूर्वी छोर से जोड़ने वाली एक ऐसी आर्थिक महाधमनी है, जो राज्य की कृषि, उद्योग और निर्यात व्यवस्था को एक नई वैश्विक पहचान दिलाने वाली है।
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मिनटों में पूरा होगा घंटों का सफर
594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे जब पूरी तरह संचालित होगा, तो यह न केवल सफर के घंटों को मिनटों में तब्दील कर देगा, बल्कि उन करोड़ों किसानों और उद्यमियों के सपनों को भी रफ्तार देगा जो अब तक बाजार की दूरी और खराब कनेक्टिविटी के कारण पीछे छूट रहे थे। आगामी 29 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसके लोकार्पण की तैयारियों ने राज्य के राजनीतिक और आर्थिक गलियारों में एक नई हलचल पैदा कर दी है।

गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण उत्तर प्रदेश के भौगोलिक और आर्थिक एकीकरण की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। मेरठ से शुरू होकर हापुड़, बुलन्दशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज तक जाने वाला यह मार्ग राज्य के 12 जिलों को एक सूत्र में पिरोएगा। अभी तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्वी उत्तर प्रदेश जाने के लिए लोगों को पुराने और व्यस्त रास्तों पर भारी ट्रैफिक का सामना करना पड़ता था, जिससे ईंधन और समय की भारी बर्बादी होती थी।
ट्रांसपोर्टेशन लागत में आएगी कमी
इस परियोजना के शुरू होने से ट्रांसपोर्टेशन लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिसका सीधा लाभ उन मालवाहक वाहनों को मिलेगा जो दिल्ली-एनसीआर से बिहार और बंगाल की ओर कूच करते हैं। यह एक्सप्रेस-वे आने वाले समय में केवल एक यातायात परियोजना नहीं, बल्कि यूपी के औद्योगिक गलियारों का केंद्र बिंदु बनकर उभरेगा।
इस एक्सप्रेस-वे का सबसे क्रांतिकारी प्रभाव उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाला है। उत्तर प्रदेश भारत का अन्न का कटोरा कहा जाता है, लेकिन पर्याप्त कोल्ड चेन और तेज परिवहन के अभाव में किसानों का एक बड़ा हिस्सा अपने उत्पादों को सही समय पर मंडियों तक नहीं पहुंचा पाता था।
गंगा एक्सप्रेस-वे इस बाधा को हमेशा के लिए खत्म कर देगा। अब उत्तर प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों में पैदा होने वाली सब्जियां और फल कुछ ही घंटों के भीतर बड़े शहरों के सुपरमार्केट और एक्सपोर्ट हब तक पहुंच सकेंगे। इससे न केवल किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि उन्हें उनके उत्पादों का वह वाजिब दाम भी मिलेगा जिसके वे हकदार हैं। यह सड़क उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचल को सीधे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मुख्यधारा से जोड़ने का काम करेगी।
बागवानी के लिए वरदान होगी परियोजना
विशेष रूप से बागवानी क्षेत्र के लिए यह परियोजना एक वरदान साबित होगी। अमरोहा के हसनपुर, गजरौला और मंडी धनौरा क्षेत्र के प्रसिद्ध दशहरी, चौसा, लंगड़ा और फजली आम अब अपनी ताजगी खोए बिना लखनऊ, दिल्ली और जयपुर की मंडियों में सजेंगे। पहले समय ज्यादा लगने के कारण फलों की गुणवत्ता प्रभावित होती थी, जिससे किसानों को कम दाम मिलते थे, लेकिन अब तेज सप्लाई चेन इसे मुनाफे का सौदा बना देगी।
इसी प्रकार प्रतापगढ़ का आंवला, जिसे जीआई टैग प्राप्त है, अब आयुर्वेद और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री तेजी से पहुंचेगा। प्रयागराज के सुप्रसिद्ध इलाहाबादी अमरूद की मिठास भी अब सात समंदर पार तक पहुंचना आसान हो जाएगा। यह एक्सप्रेस-वे इन स्थानीय उत्पादों के लिए एक एक्सपोर्ट कॉरिडोर की तरह काम करेगा, जिससे स्थानीय ओडीओपी उत्पादों को नई ऊंचाई मिलेगी।
गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे उत्तर प्रदेश सरकार ने 6 बड़े इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित करने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। ये औद्योगिक केंद्र मेरठ, उन्नाव, बदायूं, संभल, हरदोई और शाहजहांपुर में स्थापित किए जाएंगे। इनमें संभल में बनने वाला 60 एकड़ का क्लस्टर और मेरठ का औद्योगिक क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण होने वाला है।
युवाओं को मिलेगा रोजगार
इन क्लस्टरों के विकसित होने से न केवल स्थानीय स्तर पर लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि यह निवेश के लिए एक सुरक्षित और सुलभ वातावरण भी तैयार करेगा। जब उद्योगों को अपनी कच्ची सामग्री लाने और तैयार माल भेजने के लिए एक्सप्रेस-वे जैसा विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा, तो बड़ी राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियां उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित होंगी।
मेरठ का खेल उद्योग विश्वभर में अपनी साख रखता है, लेकिन लॉजिस्टिक्स की समस्याओं के कारण इसे विस्तार देने में मुश्किलें आ रही थीं। गंगा एक्सप्रेस-वे मेरठ के खेल उत्पादों को पूर्वी उत्तर प्रदेश और कोलकाता बंदरगाह की ओर जाने वाले जलमार्गों तक आसान पहुंच प्रदान करेगा। इसके अलावा, एक्सप्रेस-वे के किनारे स्थित जिलों में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने के लिए उद्योगपतियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
चूंकि एक्सप्रेस-वे के आसपास कृषि उत्पादन प्रचुर मात्रा में है, इसलिए जैम, जेली, अचार, जूस और अन्य प्रोसेस्ड फूड बनाने वाली कंपनियों के लिए यह इलाका स्वर्ग साबित होगा। इससे न केवल फसल की बर्बादी रुकेगी, बल्कि मूल्य संवर्धन के जरिए राज्य की जीडीपी में भी बड़ा योगदान होगा।
समुद्री बंदरगाहों तक होगी यूपी की पहुंच
किसी भी विकसित अर्थव्यवस्था के लिए सड़क तंत्र का मजबूत होना प्राथमिक शर्त है। गंगा एक्सप्रेस-वे आगे चलकर वाराणसी और अन्य जलमार्गों से जुड़कर हल्दिया पोर्ट तक माल पहुंचाने की लागत को काफी हद तक कम कर देगा। उत्तर प्रदेश अब लैंडलॉक्ड स्टेट की सीमाओं को तोड़कर समुद्री बंदरगाहों तक अपनी सीधी पहुंच बना रहा है।

इस एक्सप्रेस-वे के जरिए यूपी का माल वैश्विक बाजार में अन्य राज्यों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना अगले एक दशक में उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सुरक्षा तंत्र को मजबूती देगी हवाई पट्टी
जैसे-जैसे 29 मार्च की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे लोगों की उम्मीदें और उत्साह भी बढ़ता जा रहा है। गंगा एक्सप्रेस-वे केवल दूरी कम नहीं करेगा, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के पिछड़े इलाकों में विकास की नई ज्योति जलाएगा। यह सड़क शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होगी।
एक्सप्रेस-वे पर बनी हवाई पट्टी आपातकालीन स्थितियों में वायुसेना के विमानों की लैंडिंग के काम आएगी, जो देश की सुरक्षा के लिहाज से भी अहम है। संक्षेप में कहें तो, गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के बदलते सामर्थ्य का वह जीवंत प्रमाण है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्धि और आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करेगा। अब उत्तर प्रदेश ठहरने वाला नहीं, बल्कि विकास की एक्सप्रेस-वे पर दौड़ने वाला राज्य बन चुका है।
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