सीएम योगी का जापान दौरा, पहले दिन 11 हजार करोड़ के MoU साइन, यूपी में निवेश करेंगी ये कंपनियां

 लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज सुबह दो दिवसीय दौरे पर जापान पहुंचे। यहां पहले ही दिन यानी आज 25 फरवरी को निवेश के क्षेत्र में उन्होंने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। यहां विभिन्न जापानी कंपनियों के साथ कुल लगभग 11,000 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

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ये समझौते कृषि यंत्र, औद्योगिक मशीनरी, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक प्रिंटिंग, हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट जैसे विविध क्षेत्रों में निवेश और सहयोग को बढ़ावा देंगे। इससे उत्तर प्रदेश में विनिर्माण क्षमता का विस्तार होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

इन कंपनियों ने साइन किये MoU

सीएम योगी

रिपोर्ट के अनुसार, जापानी कंपनियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश करने में काफी रुचि दिखाई है, जिन कंपनियों ने एमओयू साइन किया है, उनमें ये प्रमुख हैं।

कुबोता कारपोरेशन: 1890 में स्थापित यह ओसाका मुख्यालय वाली बहुराष्ट्रीय कंपनी कृषि और औद्योगिक मशीनरी में वैश्विक पहचान रखती है। ये कंपनी मुख्य रूप से ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, इंजन, निर्माण उपकरण, जल प्रबंधन सिस्टम, पाइप, पंप और पर्यावरणीय समाधान जैसे क्षेत्रों से जुड़े उत्पाद बनाती है। भारत में एस्कॉर्ट्स कुबोता लिमिटेड के साथ साझेदारी से फार्म मैकेनाइजेशन को मजबूती मिलेगी।

मिंडा कारपोरेशन: स्पार्क मिंडा ग्रुप का हिस्सा यह कंपनी ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स में अग्रणी है। मैक्ट्रॉनिक्स, वायरिंग हार्नेस, प्लास्टिक इंटीरियर, सेंसर और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बनाती है। जापानी तकनीक के साथ सहयोग से यूपी में ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।

जापान एविएशन इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री: ये कंपनी ऑटोमोटिव और एयरोस्पेस सेक्टर के लिए एडवांस कनेक्टर्स और इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेस में विशेषज्ञता हासिल किये है। यह समझौता उत्तर प्रदेश की इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन को मजबूती प्रदान करेगा।

नागासे एंड कंपनी लिमिटेड: एक विविधीकृत जापानी ट्रेडिंग एवं टेक्नोलॉजी कंपनी, जो केमिकल्स, एडवांस्ड मैटेरियल्स, मोबिलिटी सॉल्यूशंस तथा इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में सक्रिय है।

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सीको एडवांस: यह कंपनी उच्च गुणवत्ता वाली स्क्रीन प्रिंटिंग इंक और कोटिंग सॉल्यूशंस के लिए प्रसिद्ध है। इसके उत्पाद ऑटोमोटिव डिकल्स, इंडस्ट्रियल ग्राफिक्स, इलेक्ट्रॉनिक पैनल, ग्लास प्रिंटिंग और कंज्यूमर अप्लायंसेज जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं। कंपनी भारत में अपनी विनिर्माण इकाई के जरिए कई औद्योगिक क्षेत्रों को सप्लाई कर रही है। साथ ही, ओएंडओ ग्रुप ने हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश के लिए समझौता किया है। पहले दिन हुए इन सभी समझौतों को भारत-जापान के बीच औद्योगिक सहयोग को नई ऊर्जा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ओएंडओ ग्रुप: ओएंडओ ग्रुप ने हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। वहीं, फूजी जैपनीज जेवी और फूजीसिल्वरटेक कंक्रीट प्राइवेट लिमिटेड औद्योगिक प्रिंटिंग, ग्राफिक्स तथा इससे जुड़े क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। इन समझौतों से उत्तर प्रदेश में संबंधित सेक्टर्स को नई तकनीक, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और विस्तार के अवसर मिलेंगे। ये कदम भारत-जापान के बीच औद्योगिक सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में अहम हैं। कुल मिलाकर, ये समझौते राज्य की आर्थिक प्रगति और विविध क्षेत्रों में विकास को गति प्रदान करेंगे।

ये समझौते उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, बेहतर कनेक्टिविटी (एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर, जेवर एयरपोर्ट) और बड़े उपभोक्ता बाजार की ताकत पर आधारित हैं। मुख्यमंत्री योगी ने इन कंपनियों को राज्य में सुरक्षित, पारदर्शी और तेज स्वीकृति प्रक्रिया (सिंगल विंडो सिस्टम) का भरोसा दिलाया।

सिंगापुर दौरा

जापान दौरे से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर दौरे पर थे, जहां उन्होंने 1 लाख करोड़ रुपये तक के निवेश प्रस्ताव हासिल किए, जिसमें 60,000 करोड़ रुपये के MoU फाइनल हो चुके हैं। यह दौरा राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जापान दौरा (25-26 फरवरी) में आगे मित्सुई एंड कंपनी जैसी दिग्गज कंपनियों से मुलाकातें और अन्य क्षेत्रों (नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर) में निवेश चर्चा जारी रहेगी।

यूपी को वैश्विक हब बनाने का लक्ष्य

ये समझौते यूपी में कृषि यंत्रीकरण, ऑटोमोटिव सप्लाई चेन, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति देंगे। जापानी तकनीक और विशेषज्ञता से राज्य में उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादन और रोजगार सृजन होगा। मुख्यमंत्री योगी की यह विदेश यात्रा (सिंगापुर-जापान) उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश हब बनाने की रणनीति का हिस्सा है।

 

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