इतिहास के पन्ने

अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी को कभी नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला, क्या रही वजह?

आज सोमवार 30 जनवरी को महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की हत्या की 75वीं पुण्यतिथि पर नार्वेजियन नोबेल समिति (Nobel Comittee) ने फिर से खुद से एक सवाल पूछा, जो समय-समय पर उसकी ओर से दोहराया जाता रहा है. यह सवाल था कि आधुनिक दुनिया में शांति के सबसे बड़े दूत …

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‘तिरंगा’ कैसे बना भारत का राष्ट्रीय ध्वज, जानिए क्या है इसके पीछे की कहानी

आज पूरा देश 74वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। भारत की महामहिम राष्ट्रपति ने लाल किले पर तिरंगा फहराकर कार्यक्रम की शुरुआत की थी।इसी झंडे के नीचे भारत की सेनाओं की टुकड़ियां अपने सुप्रीम कमांडर को सलामी भी देती हैं। तिरंगा सिर्फ एक ध्वज नहीं है बल्कि एक जज्बा है …

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फांसी के फंदे पर झुलने से पहले बिस्मिल के मुंह से निकला था यह शेर, अंतिम क्षण तक जगाते रहे देशभक्ति का जज्बा

‘मालिक तेरी रजा रहे और तू ही तू रहे, बाकी न मैं रहूं न मेरी आरजू रहे’ फांसी के लिए जाने से पहले महान क्रांतिकारी पं. राम प्रसाद बिस्मिल के मुंह से निकला यह शेर आजादी के दीवानों का तबतक मार्गदर्शन करता रहा, जब तक वह मिल नहीं गई। यह …

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2 दिसंबर का इतिहास है बेहद रोचक, आज ही के दिन बना था Gateway Of India

आज का इतिहास सीरीज में हम आपको 2 दिसंबर के दिन दुनियाभर में घटी कई अहम घटनाओं के बारे में बताने वाले हैं. ये घटनाएं इतनी अहम थी कि इन्हें इतिहास के पन्नों में विशेष स्थान दिया गया. आज हम आज के इतिहास के सीरीज में गेटवे ऑफ इंडिया व …

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क्या आप जानते हैं, लखनऊ में बना देश का सबसे ऊंचा घंटाघर,ये हैं इसकी खासियत

नजाकत और नफासत के शहर लखनऊ में देश का सबसे ऊंचा घंटाघर मौजूद है.जी हां जिसकी ऊंचाई 221 फीट है.इस घंटाघर को 1881 में नवाब नसीर उद्दीन हैदर ने सर जॉर्ज कूपर के स्वागत में बनवाया गया था.जो कि संयुक्त राज्यों के पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर थे.इस घंटाघर को 1.75 लाख …

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15 नवंबर का इतिहास: आज ही के दिन महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को फांसी दी गई

महात्मा गांधी को विश्व इतिहास के महानतम नेताओं में शुमार किया जाता है. भारत माता को गुलामी की जंजीरों से आजाद कराने के लिए महात्मा गांधी ने जीवन भर अहिंसा और सत्याग्रह का संकल्प निभाया, लेकिन उन्हें आजादी की हवा में सांस लेना ज्यादा दिन नसीब नहीं हुआ. भारत 15 …

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मतंगेश्वर महादेव मंदिर की रहस्यमयी कहानी, यहां हर साल बढ़ती है शिवलिंग की लंबाई

मतंगेश्वर महादेव को यूनेस्को ने विश्व धरोहर में स्थान दिया है. इतिहास में यहां 85 मंदिरों के मौजूद होने का प्रमाण हैं लेकिन आज सिर्फ 25 मंदिर ही बचे हैं. ऐसा माना जाता है कि यह एकमात्र जीवित शिवलिंग है क्योंकि यह हर साल लगभग 1 इंच बढ़ता है और …

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PoK में मुसलमान क्यों कर रहे आदि गुरु शंकराचार्य की विरासत का संरक्षण? हिंदू-मुस्लिम आस्था की पूरी कहानी

धर्म, राजनीति और देश की सीमाएं एक तरफ और हिंदू-मुस्लिम आस्था एक तरफ. यह कहानी है, भारत-पाक सीमा से परे हिंदू-मुस्लिम आस्था की. यह कहानी है आदि गुरु शंकराचार्य की विरासत की, जिसके संरक्षण का जिम्मा उठाया है मुस्लिम समुदाय ने. सालों से मुस्लिम समुदाय ही उसकी देखभाल करता आ …

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तैमूर से लेकर हिटलर तक, ये हैं दुनिया के सबसे क्रूर शासक

जब सत्ता के नशे की खुमारी सिर पर चढ़ती है तो यह अच्छे से अच्छे इंसान को एक अत्याचारी दरिंदा बनाकर छोड़ती है। इसके बाद ये शासक अनाचार और क्रूरता की सभी हदों को पार कर जाते हैं। इतिहास के पन्नों को देखें तो ऐसे कई शासक समय-समय पर दुनिया …

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भारत के इतिहास में खास है आज का दिन, आतंकियों को उनके गढ़ में घुसकर किया था नेस्तनाबूद

आज यानी 29 सितंबर का दिन भारत के इतिहास में बहुत खास है. इस दिन भारतीय सेना ने उरी हमले के जवाब में आतंकियों को उन्हीं के गढ़ में घुसकर नेस्तनाबूद किया था. आज का दिन पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर उसके आतंकवादी शिविरों को नेस्तनाबूद करने के साहसिक …

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सुभाष चंद्र बोस की बेटी की गुहार, भारत लाए जाएं ‘नेताजी के अवशेष’

पूरा देश स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को याद कर रहा है। इसी बीच जर्मनी में रह रहीं नेताजी की पुत्री अनीता बोस फाफ ने भारत सरकार से नेताजी के अवशेषों को भारत लाने की मांग की। अनीता बोस ने यह भी कहा है कि नेताजी …

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शिक्षा के मंदिर में खिलजी ने लगाई आग, तीन महीने तक जलता रहा पुस्तकालय, नालंदा के गौरवशाली इतिहास की कहानी

बिहार के पटना से करीब 80 किलोमीटर के दायरे के अंदर है वो जगह। वो महाविद्यालय जिसकी प्रसिद्धि विश्व विख्यात है। जहां पांचवी शताब्दी में दुनियाभर से विद्वान आया करते थे। लेकिन फिर अचानक कुछ ऐसा हुआ कि ये यूनिवर्सिटी पूरी तरह ही बर्बाद हो गई। कभी यहां दुनिया के …

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The Kashmir Files फिल्म के बहाने फिर से चर्चा में कश्मीर का मार्तंड सूर्य मंदिर, जानें क्या है इसकी कहानी

क्या आपको मार्तंड सूर्य मंदिर के बारे में मालूम है? 80 फीसदी मुमकिन है कि आपको इस मंदिर के बारे में पता नहीं होगा! कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandits) के विस्थापन को लेकर बनाई गई फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ इन दिनों खूब चर्चा में है और इसी बहाने कश्मीर का मार्तंड …

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इतिहास के पन्नों मेंः 30 दिसंबर

मैं सजदे में नहीं था आपको धोखा हुआ होगाः जिनकी शायरी आज भी नारे की तरह इस्तेमाल होती है। जिनके शेर इंक़लाब का सबब बने। जिनके लेखन ने बेलगाम सत्ता के ख़िलाफ़ प्रतिरोध को स्वर दिया। हम बात कर रहे हैं हिंदी के उस महान शायर दुष्यंत कुमार की, जिन्हें …

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इतिहास के पन्नों मेंः 25 अक्टूबर

लोकतंत्र का पहला महायज्ञः स्वतंत्र भारत का पहला आम चुनाव। 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक चार माह चली चुनाव प्रक्रिया के तहत हिमाचल प्रदेश के चिनी तहसील में पहला वोट पड़ते ही नये युग की शुरुआत हो गयी। मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन की कड़ी निगरानी में …

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लक्षद्वीप पर बवंडर क्यों उठा ?

नैसर्गिक द्वीपसमूह लक्षद्वीप को पड़ोसी केरल की मुस्लिम लीग ”दक्षिण का कश्मीर” बनाने हेतु आतुर है। गत दिनों से यह प्राकृतिक सौंदर्यवाला भूभाग सुर्खियों में छाया है। केरल की सत्तासीन वामपंथी मोर्चा के ”टुकड़े—टुकड़े गैंग” की नीति के कारण माकपा अपने शत्रुदल मुस्लिम लीग से यारी में हिचकती नहीं दिख …

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भगत सिंह फिर जन्मे, मगर पड़ोस के घर में !

देश बनता है राष्ट्रनायकों के उत्सर्ग से। संघर्षशील इस्राइल इस तथ्य का जीवंत प्रमाण है। आठ अरब देशों, सभी शत्रु, की 42 करोड़ आबादी का मुकाबला सात दशकों से 90 लाख जनसंख्यावाला इस्राइल अकेला कर रहा है। तीन युद्ध लड़ा और सभी जीता भी। इस्राइल में हर 18 वर्ष से …

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इतिहास के पन्नों में आज का दिन है बेहद खास, इस महान वैज्ञानिक का हुआ था जन्म

इतिहास के पन्नों को खंगालें तो दुनिया के लिए आज का दिन बेहद खास है, विशेषकर विज्ञान के नजरिये से। इतिहास के एक कालखंड में इस दिन एक महान वैज्ञानिक का इस दिन जन्म हुआ तो इसी दिन एक दूसरे महान वैज्ञानिक ने दुनिया को अलविदा कहा। दोनों वैज्ञानिकों की …

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चंद्रशेखर से ऐसे बने थे वो आजाद, हर कोड़े पर करते रहे वन्दे मातरम का उद्घोष

चंद्रशेखर आजाद की आज 90वी पुण्यतिथि है। आज ही के दिन भारत के वीर स्वतंत्रता सेनानी ने “आजाद है आजाद रहेंगे” का नारा लगाते हुए खुद पर गोली चला ली थी। आजाद उन स्वतंत्रता सेनानीयों में से एक थे जिन्हें पकड़ने के लिये अंग्रेजो के छक्के छूट गए थे। आइये …

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ससुराल बना था निराला की साहित्य साधना का केंद्र, जन्म जयंती 21 को

महाप्राण निराला की जन्म जयंती (21 फरवरी) पर विशेष रायबरेली। छायावाद के प्रमुख स्तंभ और हिंदी साहित्य में अपने विद्रोही स्वर से आमजन की आवाज़ को अभिव्यक्त करने वाले पंडित सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने हिंदी साहित्य में अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने अपनी रचनाओं से जीवन के विषाद, निराशा और …

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