Friday , December 3 2021

इतिहास के पन्ने

इतिहास के पन्नों मेंः 25 अक्टूबर

लोकतंत्र का पहला महायज्ञः स्वतंत्र भारत का पहला आम चुनाव। 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक चार माह चली चुनाव प्रक्रिया के तहत हिमाचल प्रदेश के चिनी तहसील में पहला वोट पड़ते ही नये युग की शुरुआत हो गयी। मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन की कड़ी निगरानी में …

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लक्षद्वीप पर बवंडर क्यों उठा ?

नैसर्गिक द्वीपसमूह लक्षद्वीप को पड़ोसी केरल की मुस्लिम लीग ”दक्षिण का कश्मीर” बनाने हेतु आतुर है। गत दिनों से यह प्राकृतिक सौंदर्यवाला भूभाग सुर्खियों में छाया है। केरल की सत्तासीन वामपंथी मोर्चा के ”टुकड़े—टुकड़े गैंग” की नीति के कारण माकपा अपने शत्रुदल मुस्लिम लीग से यारी में हिचकती नहीं दिख …

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भगत सिंह फिर जन्मे, मगर पड़ोस के घर में !

देश बनता है राष्ट्रनायकों के उत्सर्ग से। संघर्षशील इस्राइल इस तथ्य का जीवंत प्रमाण है। आठ अरब देशों, सभी शत्रु, की 42 करोड़ आबादी का मुकाबला सात दशकों से 90 लाख जनसंख्यावाला इस्राइल अकेला कर रहा है। तीन युद्ध लड़ा और सभी जीता भी। इस्राइल में हर 18 वर्ष से …

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इतिहास के पन्नों में आज का दिन है बेहद खास, इस महान वैज्ञानिक का हुआ था जन्म

इतिहास के पन्नों को खंगालें तो दुनिया के लिए आज का दिन बेहद खास है, विशेषकर विज्ञान के नजरिये से। इतिहास के एक कालखंड में इस दिन एक महान वैज्ञानिक का इस दिन जन्म हुआ तो इसी दिन एक दूसरे महान वैज्ञानिक ने दुनिया को अलविदा कहा। दोनों वैज्ञानिकों की …

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चंद्रशेखर से ऐसे बने थे वो आजाद, हर कोड़े पर करते रहे वन्दे मातरम का उद्घोष

चंद्रशेखर आजाद की आज 90वी पुण्यतिथि है। आज ही के दिन भारत के वीर स्वतंत्रता सेनानी ने “आजाद है आजाद रहेंगे” का नारा लगाते हुए खुद पर गोली चला ली थी। आजाद उन स्वतंत्रता सेनानीयों में से एक थे जिन्हें पकड़ने के लिये अंग्रेजो के छक्के छूट गए थे। आइये …

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ससुराल बना था निराला की साहित्य साधना का केंद्र, जन्म जयंती 21 को

महाप्राण निराला की जन्म जयंती (21 फरवरी) पर विशेष रायबरेली। छायावाद के प्रमुख स्तंभ और हिंदी साहित्य में अपने विद्रोही स्वर से आमजन की आवाज़ को अभिव्यक्त करने वाले पंडित सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने हिंदी साहित्य में अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने अपनी रचनाओं से जीवन के विषाद, निराशा और …

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22 फरवरी 1994 का संसदीय संकल्प कब होगा पूर्ण ?

अमित त्यागी (संपादकीय सलाहकार, सरकारी मंथन)( लेखक विधि विशेषज्ञ, स्तंभकार एवं जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र के सदस्य हैं) लखनऊ। भारत की जम्मू, कश्मीर और लद्दाख नीति के संदर्भ में भारतीय संसद द्वारा 22 फरवरी 1994 को पारित प्रस्ताव बेहद महत्वपूर्ण एवं आवश्यक दस्तावेज़ है। उस समय की कांग्रेस सरकार के …

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गांधीजी भगवान राम को सभी धर्म और संप्रदाय से ऊपर मानते थे…

भारत के बारे हमारे देश के महापुरुषों की स्पष्ट कल्पना थी। भारत की जड़ों से बहुत गहरे तक जुड़े हुए थे। आज भारत का जो स्वरूप हमारी आंखों के सामने है, वह भारत के महापुरुषों की मान्यताओं के अनुरूप नहीं कहा जा सकता। गांधीजी सत्य को जीवन का बहुत बड़ा …

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रामानन्द सागर का मानना था हनुमान जी खुद आकर लिखवाते थे रामायण के संवाद

फिल्मी दुनिया में अनेक निर्माता-निर्देशकों ने यश और धन कमाया है; पर रामानन्द सागर ऐसे फिल्मकार हुए, जिन्हें जनता ने साधु सन्तों जैसा सम्मान दिया। उनके द्वारा निर्मित ‘रामायण’ धारावाहिक के प्रसारण के समय घरों में पूजा जैसा वातावरण बन जाता था। लोग नहा-धोकर शान्त होकर धूप-अगरबत्ती जलाकर बैठते थे। …

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रामपुर के नवाब के खजाने में निकली करोड़ो की तस्वीरें

वैसे तो नबावों को शाही शौक होते ही है लेकिन उत्तर प्रदेश के नवाब पेंटिंग और कला के कितने शौकीन थे इस बात का अंदाजा उनके महल और उसके कमरों की दीवारों से लगाया जा सकता है। दरअसल महल की दीवारों पर लगी पेंटिंग्स की कीमत करोड़ो में है।जब इन …

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पीठ पर कोड़े खाते रहे और वंदे मातरम् का उद्घोष करते रहे, कुछ ऐसा ही था उनका व्यक्तित्व

देश की आजादी के लिए कुर्बानी देने वाले क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद जब पहली बार अंग्रेजों की कैद में आए तो उन्हें 15 कोड़ों की सजा दी गई थी। आजादी को लेकर उनका जज्बा ऐसा था कि वो पीठ पर कोड़े खाते रहे और वंदे मातरम् का उद्घोष करते रहे, कुछ …

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जानिये किस देशभक्ति गीत पर भर आई थीं पंडित नेहरू की आंखें…

लखनऊ। हम बात कर रहे हैं ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ हिन्दी देशभक्ति गीत की। जो हर युवा के जुबां पर कभी न कभी आ ही जाता है। यह गीत कवि प्रदीप ने लिखा था। और इसे सी रामचंद्र ने संगीत दिया था। यह गीत 1962 के चीनी आक्रमण के …

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धर्मगुरु ने फैलाया ऐसा अंधविश्वास, एक साथ 900 लोगों ने दे दी अपनी जान

किसी बात पर जब तक विश्वास रहे तब तक तो ठीक है लेकिन जब वो ही विश्वास अंधविश्वास में बदलने लगे तो वो घातक साबित होता है। शगुन-अपशगुन, शुभ-अशुभ जैसी बातें लोगों को अंधविश्वास की तरफ खींचती है। जैसे अगर कोई बिल्ली रास्ता काट जाए,  किसी काम के पहले कोई …

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जसवंत सिंह ; जिन्ना पर किताब बनी पतन का कारण!

जिन्ना पर लिखी किताब जसवंत सिंह के राजनीतिक पतन का कारण बनी थी। किताब छपने के बाद भाजपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। दस महीने बाद उनकी पार्टी में वापसी हुई थी, लेकिन उनकी पुरानी हैसियत फिर कभी वापस नही हो सकी। पार्टी उन्हें लगातार हाशिये पर …

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गाँधी जी की राय

राजू एक नवी कक्षा का छात्र है और अपने घर के पास ही एक सरकारी स्कूल में पढ़ता है।राजू बचपन से ही पढ़ने बहुत होशियार विद्यार्थी है।लेकिन उसके दिमाग की सारी अच्छाइयां उसके गणित के अध्यापक के सामने खत्म हो जाती हैं। वह लगातार अपने गणित के अध्यापक के हाथों …

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मैडम भीखाजी कामा का भारत की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण योगदान : डा. हरमेश चौहान

लखनऊ। महापुरुष स्मृति समित की ओर से अंग्रेजों से लड़ीं और क्रांति माता के नाम से प्रख्यात मैडम भीखाजी कामा का जन्मदिवस मनाया गया। कार्यक्रम का सहयोग राष्ट्रीय एकता मिशन द्वारा किया गया। दारूलशफा बी ब्लॉक पार्क में शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात वैज्ञानिक डा. हरमेश …

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‘विलायती बाग’ में घूमने आती थीं नवाबों की बेगमात

लखनऊ। राजधानी की धरोहरों में काफी इतिहास छुपा हुआ है। विलायती बाग का प्रवेश गेट पर 25 सीढ़ियां जो जमीन के नीचे छुपी हुई थीं उसे भारतीय पुरातत्व विभाग ने खोज लिया है। इसके बावजूद पर्यटकों के लिये कई साल से विभाग इसे खुलवा नहीं पाया है। वरिष्ठ पर्यटक गाईड …

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केन्द्रीय संरक्षित स्मारक: छोटा इमामबाड़ा गेट खतरे में

लखनऊ। पल्ल्व शर्मा राजधानी में छोटे इमामबाड़े का गेट केन्द्रीय संरक्षित स्मारक है। 1842 में बना है। मोहम्मद अली शाह का मकबरा भी इसी में है। हैरिटेज एक्टिविस्ट मोहम्मद हैदर एडवोकेट को इस बात को लेकर नाराजगी है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी गेट का जीर्णोद्धार नहीं पूरा …

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कोरोना में हताहत लोगों का भी होगा श्राद्ध: राजकुमार

लखनऊ। शहीद पितरों के श्रद्धार्पण में इस बार जैविक युद्ध कोरोना में हताहत लोगों का भी भाव तर्पण होगा । स्वाधीनता संग्राम, भारत विभाजन व राष्ट्र रक्षा एवं चाइना द्वारा प्रायोजित जैविक युद्ध में शहीद हुए असंख्य क्रान्तिवीरों को सामूहिक तर्पण श्रद्धांजलि ‘‘शहीद पितृ श्रद्धा नमन’ कार्यक्रम के माध्यम से …

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इतिहास : पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया

बहुत सी बोलियों और भाषाओं वाले हमारे देश में आजादी के बाद भाषा को लेकर एक बड़ा सवाल आ खड़ा हुआ। आखिरकार 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया। हालांकि शुरू में हिंदी और अंग्रेजी दोनो को नए राष्ट्र की भाषा चुना गया और संविधान सभा …

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