मजदूरों के हक पर योगी की दो टूक, दफ्तरों में बैठकर रिपोर्ट न बनाएं अधिकारी, जमीन पर दिखे समस्या का हल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं और इस बार उनके निशाने पर वह लापरवाही है जो अक्सर औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों और प्रबंधन के बीच विवाद का कारण बनती है। राजधानी लखनऊ में शनिवार को हुई एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य के तमाम आला अधिकारियों को साफ शब्दों में चेतावनी दे दी है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के औद्योगिक विकास में मजदूरों का खून-पसीना शामिल है और उनके हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता सरकार को कतई स्वीकार्य नहीं होगा।

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समय पर संवाद जरूरी

यह बैठक सिर्फ औपचारिक चर्चा नहीं थी, बल्कि इसमें हाल ही में नोएडा और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में हुए प्रदर्शनों का गहरा असर दिखा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि, वे केवल दफ्तरों में बैठकर रिपोर्ट न मंगाएं, बल्कि जमीन पर उतरकर औद्योगिक संगठनों और मैनेजमेंट से बात करें। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि, मजदूरों की जो भी जायज समस्याएं हैं, उनका समाधान हर हाल में अगले 24 घंटों के भीतर हो जाना चाहिए। यह फैसला उन मजदूरों के लिए बड़ी राहत बनकर आया है जो अक्सर अपनी मांगों को लेकर सिस्टम की फाइलों में फंसकर रह जाते थे।

नोएडा के फेज-2 में जो कुछ भी हो रहा है वह प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है। वहां एक निजी कंपनी के कर्मचारियों ने सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर जिस तरह का उग्र प्रदर्शन किया, सड़कों पर गाड़ियां फूंकी और पुलिस पर पथराव किया, वह सरकार को सोचने पर मजबूर कर रहा है कि, किसी की मेहनत जाया नहीं जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने इसी संदर्भ को ध्यान में रखते हुए कहा कि, अगर समय पर संवाद हो जाए, तो माहौल को बिगड़ने से बचाया जा सकता है।

श्रम विभाग को जिम्मेदारी

पिछली घटनाओं का जिक्र करते हुए यह समझा जा सकता है कि, संवाद की कमी ही अक्सर बड़े बवाल का कारण बनती है। 2012-13 में भी नोएडा और गाजियाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में इसी तरह के वेतन विवादों ने हिंसक रूप ले लिया था, जिससे न केवल उद्योगों का नुकसान हुआ, बल्कि राज्य की छवि पर भी असर पड़ा। योगी सरकार अब उस दौर की पुनरावृत्ति नहीं चाहती, इसीलिए श्रम विभाग को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि, वह स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर हर छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाई के साथ नियमित बातचीत का सिलसिला शुरू करे, ताकि किसी भी विवाद को उसके शुरुआती स्तर पर ही सुलझा लिया जाए।

श्रमिकों के अधिकारों पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने उन बुनियादी सुविधाओं पर जोर दिया, जो अक्सर कागजों पर तो होती हैं, लेकिन कार्यस्थल पर नदारद रहती हैं। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, प्रत्येक मजदूर को सम्मानजनक मानदेय यानी सैलरी मिलना उसका अधिकार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, अगर कोई कर्मचारी अपनी शिफ्ट से ज्यादा यानी अतिरिक्त समय काम करता है, तो उसे नियमानुसार ओवरटाइम का पैसा जरूर मिलना चाहिए।

महिलाओं को मिले सुरक्षित माहौल

अक्सर शिकायतें आती हैं कि, कंपनियां काम तो ज्यादा लेती हैं, लेकिन भुगतान के वक्त नियमों को ताक पर रख देती हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने कार्यस्थल के वातावरण पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक इकाई में स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय, मजदूरों के सुस्ताने के लिए विश्रामगृह और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध होनी चाहिए।

खास तौर पर महिला श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर उन्होंने कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि, महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करना श्रम विभाग की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

बैठक का एक और महत्वपूर्ण पहलू बाहरी तत्वों की घुसपैठ को लेकर था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पारखी नजर से उस समस्या को पकड़ा है, जो अक्सर किसी भी आंदोलन को हिंसक बना देती है। उन्होंने अधिकारियों को सचेत किया कि, कई बार ऐसे लोग खुद को मजदूर नेता या प्रतिनिधि बताकर भीड़ में शामिल हो जाते हैं जिनका मकसद मजदूरों का भला करना नहीं, बल्कि अव्यवस्था फैलाना होता है।

मजदूर कभी कानून हाथ में नहीं लेता

हालिया प्रदर्शनों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि, इन आंदोलनों में कुछ ऐसे विघटनकारी तत्व शामिल हो सकते हैं, जो माहौल बिगाड़ने की फिराक में रहते हैं। ऐसे लोगों की पहचान के लिए खुफिया तंत्र यानी एलआईयू को सक्रिय करने का आदेश दिया गया है। मुख्यमंत्री का साफ कहना है कि, असली मजदूर कभी कानून हाथ में नहीं लेता, यह भड़काने वाले बाहरी लोग होते हैं जो आगजनी और पत्थरबाजी जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। ऐसे तत्वों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि औद्योगिक शांति बनी रहे।

औद्योगिक क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक जिलों के कप्तानों और जिलाधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी दी है। इनमें गौतमबुद्ध नगर (नोएडा), गाजियाबाद, कानपुर, मेरठ, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, वाराणसी और गोरखपुर जैसे शहर शामिल हैं। इन शहरों में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां हैं और यहां लाखों मजदूर काम करते हैं। इसके साथ ही यूपीसीडा, नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी के अधिकारियों को भी फील्ड में एक्टिव रहने को कहा गया है।

निवेश का गढ़ बन चुका है यूपी

योगी आदित्यनाथ का मानना है कि, उत्तर प्रदेश आज निवेश का गढ़ बन रहा है और इस साख को बचाए रखने के लिए उद्योगों और श्रमिकों के बीच एक मजबूत विश्वास का रिश्ता होना जरूरी है। बैठक में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल नंदी और श्रम मंत्री अनिल राजभर की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि, सरकार अब औद्योगिक विकास और श्रमिक कल्याण को एक ही सिक्के के दो पहलुओं के रूप में देख रही है।

मुख्यमंत्री के इन निर्देशों का मतलब यही है कि, राज्य में अराजकता के लिए कोई जगह नहीं है, चाहे वह प्रबंधन की तरफ से हो या प्रदर्शनकारियों की तरफ से। उद्योगों को फलने-फूलने के लिए जरूरी माहौल दिया जाएगा, लेकिन श्रम कानूनों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि, वे केवल कागजी खानापूर्ति न करें, बल्कि फैक्ट्रियों के अंदर जाकर हकीकत देखें।

नियमों को हल्के में न लें फैक्ट्री मालिक

अगर सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं हैं या मजदूरों से बंधुआ मजदूरों की तरह काम लिया जा रहा है, तो ऐसी इकाइयों पर कार्रवाई होना तय है। योगी आदित्यनाथ के इस कड़े रुख से जहां एक तरफ मजदूरों में उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी तरफ उन औद्योगिक प्रबंधकों के लिए भी यह एक सबक है जो अब तक नियमों को हल्के में लेते रहे थे। अब गेंद अधिकारियों के पाले में है कि वे अगले 24 घंटों में इस व्यवस्था को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाते हैं।

 

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