
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी जेम पोर्टल के माध्यम से खरीदारी करने में पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी डिजिटल शक्ति का लोहा मनवाया है। वित्त वर्ष 2025-26 के नवीनतम आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि उत्तर प्रदेश अब केवल अपनी विशाल जनसंख्या या राजनीतिक महत्व के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि वह तकनीक के माध्यम से सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और लेटलतीफी को खत्म करने वाला अग्रणी राज्य बन चुका है।
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जेम पोर्टल से हुई खरीद
इस वित्त वर्ष में यूपी सरकार ने जेम पोर्टल के माध्यम से 22,337 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड खरीदारी की है, जो कि देश के अन्य बड़े औद्योगिक राज्यों जैसे गुजरात, महाराष्ट्र और दिल्ली की तुलना में कहीं अधिक है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश ने इस प्रक्रिया में न केवल रिकॉर्ड खरीदारी की, बल्कि अपनी कुशल रणनीतियों के माध्यम से जनता के टैक्स के हजारों करोड़ रुपये बचाकर सरकारी खजाने को भी मजबूती प्रदान की है।
इस सफलता के पीछे उत्तर प्रदेश सरकार की वह सुदृढ़ जेम खरीद नीति है जिसे 26 नवंबर 2024 को आधिकारिक रूप से लागू किया गया था। इस नीति के लागू होते ही राज्य में दशकों से चली आ रही पारंपरिक टेंडरिंग व्यवस्था का सूर्यास्त हो गया। पुराने सिस्टम में जहां अक्सर सिंडिकेट और बिचौलियों का बोलबाला रहता था, वहीं जेम पोर्टल ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बना दिया है।
नीति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि, नई व्यवस्था लागू होते ही सरकार ने तुरंत उन 33 से अधिक बड़ी खरीद प्रक्रियाओं को रद्द कर दिया जिनके लिए पुराने नियमों के तहत निर्देश जारी किए जा चुके थे। सरकार का यह कड़ा संदेश स्पष्ट था कि अब खरीद की गुणवत्ता और कीमत से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
आंकड़ों के उतार-चढ़ाव को देखें तो साल 2023-24 में सरकारी खरीद 20,248 करोड़ रुपये थी, जो नीतिगत बदलाव के दौर में यानी 2024-25 में घटकर 16,822 करोड़ रुपये रह गई थी, लेकिन जैसे ही नया सिस्टम पूरी तरह सक्रिय हुआ, वित्त वर्ष 2025-26 में इसमें एक अभूतपूर्व उछाल देखने को मिला और यह 22,337 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई।
उत्तर प्रदेश की इस गौरवगाथा का सबसे चमकदार हिस्सा वह 9,700 करोड़ रुपये की बचत है, जो रिवर्स ऑक्शन यानी उल्टी बोली की प्रक्रिया से संभव हुई है। रिवर्स ऑक्शन एक ऐसी डिजिटल प्रक्रिया है, जहां सामान बेचने वाली कंपनियां सरकारी ऑर्डर पाने के लिए एक-दूसरे से मुकाबला करती हैं और अपनी कीमतें कम करती जाती हैं।
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि, साल 2025-26 में राज्य सरकार ने 10 लाख रुपये से ऊपर के लगभग 19,962 टेंडर जारी किए थे, जिनमें से 42 प्रतिशत टेंडर इसी रिवर्स ऑक्शन प्रक्रिया के माध्यम से पूरे किए गए। इन टेंडरों की जो शुरुआती अनुमानित कीमत 16,284 करोड़ रुपये आंकी गई थी, वह डिजिटल प्रतिस्पर्धा के बाद घटकर मात्र 6,523 करोड़ रुपये रह गई। इस प्रकार सरकार ने अपनी औसत लागत में लगभग 60 प्रतिशत की भारी कटौती करने में सफलता प्राप्त की। यह बचत दर्शाती है कि, पारदर्शी तकनीक के माध्यम से किस प्रकार सरकारी संसाधनों का अधिकतम सदुपयोग किया जा सकता है।
केंद्र सरकार ने भी उत्तर प्रदेश की इस सक्रियता और दूरदर्शिता की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। दिल्ली के गलियारों में अब उत्तर प्रदेश की जेम खरीद नीति को एक आदर्श नीति के रूप में देखा जा रहा है। केंद्र ने देश के अन्य राज्यों को भी मशविरा दिया है कि वे उत्तर प्रदेश के इस मॉडल का अध्ययन करें और अपने यहां इसी तरह की पारदर्शी व्यवस्था लागू करें।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान इस उपलब्धि पर गर्व महसूस करते हुए सभी विभागों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि, जेम पोर्टल के माध्यम से खरीद न केवल एक विकल्प है बल्कि अब यह एक अनिवार्य जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने उन टॉप 10 विभागों की सराहना की जिन्होंने इस पोर्टल का अधिकतम लाभ उठाया है और पिछड़े हुए विभागों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने की चेतावनी दी है।
उत्तर प्रदेश द्वारा स्थापित यह नया रिकॉर्ड केवल वित्तीय आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की बदलती छवि का प्रतीक है। जिस प्रदेश को कभी धीमी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए जाना जाता था, आज वही प्रदेश गुजरात और महाराष्ट्र जैसे विकसित राज्यों को पछाड़कर ई-गवर्नेंस के शिखर पर बैठा है। 22,337 करोड़ की खरीद और 9,700 करोड़ की बचत यह साबित करती है कि, अगर नेतृत्व की नीयत साफ हो और तकनीक का सही समावेश किया जाए, तो बड़े से बड़े लक्ष्य को प्राप्त करना मुमकिन है।
यूपी की यह जेम क्रांति अब देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है, जो आने वाले समय में भारत की समग्र अर्थव्यवस्था और सरकारी कार्यप्रणाली को नई दिशा देने का काम करेगी। भ्रष्टाचार पर इस डिजिटल प्रहार ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि भविष्य का उत्तर प्रदेश न केवल समर्थ होगा, बल्कि वह पूरी तरह से पारदर्शी और जवाबदेह भी होगा।
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