खेतों में बैठकर डालते थे डिजिटल डाका, पकड़ने के लिए पुलिस को लेनी पड़ी ड्रोन की मदद

कानपुर। उत्तर प्रदेश का औद्योगिक शहर कानपुर बीते कुछ दिनों से अपराध की एक ऐसी कहानी लिख रहा था, जिसने न सिर्फ पुलिस की बल्कि जांच एजेंसियों की भी नींद उड़ा रखी थी। जी हां जिले के रेउना इलाके में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को दबोचा है जो झारखंड के कुख्यात जामताड़ा गिरोह की तर्ज पर काम कर रहा था।

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साइबर सुरक्षा में बड़ी सेंध से चौंका पुलिस महकमा

यहां भी ऊंची इमारतों या आलीशान दफ्तरों में बैठकर ठगी का खेल नहीं चल रहा था, बल्कि गांव के खुले खेतों और घने पेड़ों की छांव में बैठकर करोड़ों रुपये की डिजिटल डकैती डाली जा रही थी। पुलिस की इस कार्रवाई से उत्तर प्रदेश में पैर पसार रहे साइबर अपराध के एक ऐसे नेटवर्क का भंडाफूट गया है, जो आये दिन आम जनता की गाढ़ी कमाई लूट रहा था। मंगलवार की शाम को हुई इस बड़ी छापामार कार्रवाई ने न केवल पुलिस महकमे को चौंका दिया है, बल्कि साइबर सुरक्षा की भविष्य की चुनौतियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Kanpur Cyber Crime

कानपुर पुलिस को पिछले कुछ समय से लगातार गोपनीय सूचनाएं मिल रही थीं कि, रेउना इलाके के गांवों में युवाओं की गतिविधियां बेहद संदिग्ध होती जा रही हैं। स्थानीय लोगों ने देखा था कि, यहां के खेतों में बैठे युवक घंटों मोबाइल फोन पर व्यस्त रहते हैं और उनके पास कई मोबाइल और चार्जर मौजूद रहते हैं। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के निर्देश पर जब एक विशेष टीम का गठन किया गया तो उन्होंने छापेमारी से पहले पारंपरिक तरीकों के बजाय आधुनिक तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया।

पुलिस ने पूरे इलाके में ड्रोन कैमरे उड़ाए जिसकी फुटेज ने अधिकारियों के होश उड़ा दिए। ड्रोन के जरिए देखा गया कि, खेतों के बीच और झाड़ियों के पीछे दर्जनों युवक हेडफोन लगाकर मोबाइल पर लगातार बात कर रहे थे और उनके पास कई सिम कार्ड और रजिस्टर रखे हुए थे। इसके बाद पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर एक साथ धावा बोला। भारी पुलिस बल को देखकर मौके पर भगदड़ मच गई।

20 अपराधी दबोचे गये

पुलिस की टीम ने घेराबंदी कर मौके से 20 शातिर साइबर ठगों को दबोच लिया, लेकिन गांव की भौगोलिक स्थिति और झाड़ियों का फायदा उठाकर 17 अन्य आरोपी भागने में सफल रहे। पुलिस के अनुसार भागने वाले आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।

पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि, यह पूरा इलाका अब साइबर अपराध के एक बड़े हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है और यहां के हर संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। पकड़े गए आरोपियों से हुई पूछताछ में जो आंकड़े सामने आए वे किसी भी एजेंसी को डराने के लिए काफी हैं।

गिरोह का सरगना शैलेंद्र कुमार स्वयं एक शातिर ठग है, पूछताछ में उसने बताया कि, गिरोह का हर सदस्य प्रतिदिन 100 से 150 कॉल करता था। ठगी का गणित इतना सटीक था कि एक अपराधी दिनभर में कम से कम 10 लोगों को अपने जाल में फंसा ही लेता था जिससे गिरोह की प्रतिदिन की कुल कमाई 1 लाख से 1.5 लाख रुपये के बीच पहुंच जाती थी।

प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिये करते थे ठगी

ये गिरोह प्रधानमंत्री आवास योजना क जरिये लोगों को ठगता था। गिरोह से जुड़े लोग सरकारी कर्मचारी बनकर ऐसे लोगों को फोन करते थे, जिन्होंने घर के लिए आवेदन किया था या जो बेहद गरीब तबके से ताल्लुक रखते थे। आरोपी खुद को आवास विकास का प्रतिनिधि बताते थे और पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए उनका आधार नंबर और अन्य जानकारी पहले से ही किसी डेटा लीक के जरिए हासिल कर लेते थे।

इसके बाद उनसे कहा जाता था कि, उनका घर पास हो गया है और उन्हें बस 1,100 रुपये का रजिस्ट्रेशन शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा। कम रकम होने के कारण लोग शक नहीं करते थे और आसानी से यूपीआई के जरिए पैसे ट्रांसफर कर देते थे. जिसके बाद यह गिरोह धीरे-धीरे उनका पूरा बैंक खाता खाली कर देता था।

ये गिरोह केवल सरकारी योजनाओं तक ही सीमित नहीं रह गया था, बल्कि जांच में यह भी सामने आया कि, ये अपराधी सेक्सटॉर्शन और धमकी का भी सहारा लेते थे। लोगों को अश्लील वीडियो या किसी संदिग्ध गतिविधि में शामिल होने की धमकी देकर उन पर दबाव बनाया जाता है।  बदनामी का डर दिखाकर मोटी रकम वसूली जाती थी।

पुलिस ने जारी की चेतावनी

कानपुर का यह गिरोह केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था बल्कि इनका नेटवर्क छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, हरियाणा और झारखंड तक फैला हुआ था। पुलिस को उनके पास से जो डेटा मिला है उससे पता चला है कि गिरोह ने अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग स्क्रिप्ट तैयार कर रखी थी ताकि वे वहां की स्थानीय भाषा या लहजे में बात कर लोगों को आसानी से मूर्ख बना सकें।

कानपुर पुलिस ने इस गिरोह के पर्दाफाश के बाद आम जनता के लिए एक विस्तृत चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि, किसी भी अनजान कॉल पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी या ओटीपी साझा न करें। पुलिस का कहना है कि साइबर ठग अब इतने संगठित हो चुके हैं कि वे किसी भी सरकारी अधिकारी की तरह हूबहू बात कर सकते हैं, इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। कानपुर की यह घटना इस बात का प्रमाण है कि कम समय में अमीर बनने की चाहत ने युवाओं को इस डिजिटल अपराध की दुनिया में धकेल दिया है और अब यह वायरस गांवों के खेतों तक पहुंच चुका है।

 

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