
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक सरगर्मी तेज होती जा रही है। बीजेपी भी हैट्रिक लगाने की तैयारी कर रही है। जी हां उत्तर प्रदेश भाजपा को बहुत जल्द नई टीम मिलने वाली है। इस पर पार्टी हाई कमान में विचार-विमर्श अंतिम दौर में पहुंच चुका है। खबर ये भी है कि, जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार भी किया जाएगा। इसी अहम मुद्दे पर रविवार को लखनऊ पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं व पदाधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात कर मंथन किया। आज मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद कार्यकारिणी और मंत्रिमंडल को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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लखनऊ पहुंचे विनोद तावड़े
जी हां रविवार को लखनऊ पहुंचे विनोद तावड़े का लखनऊ दौरा इस खास प्रयोजन के लिए ही है। यहां उन्होंने किसी बड़े मंच से भाषण नहीं दिया, बल्कि बंद कमरे की राजनीति पर जोर दिया। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के साथ मुलाकात की। इस मुलाकात का मकसद बहुत साफ था, उन नामों पर मुहर लगाना जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में संगठन की कमान संभालेंगे।
तावड़े ने सिर्फ मौजूदा पदाधिकारियों से ही नहीं, बल्कि बीजेपी के उन पुराने धुरंधरों से भी फीडबैक लिया जो यूपी की रग-रग से वाकिफ हैं। उन्होंने पूर्व प्रदेश अध्यक्षों भूपेंद्र चौधरी, सूर्य प्रताप शाही और रमापति राम त्रिपाठी से अलग-अलग मुलाकात की। राजनीति में इसे अनुभव और ऊर्जा का मेल कहा जाता है। पुराने नेताओं से पूछने का मतलब है कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती।
पंकज चौधरी ने शाह को सौंपी लिस्ट
लखनऊ में मंथन खत्म होते ही प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी सीधे दिल्ली रवाना हो गए। दिल्ली में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। अमित शाह को बीजेपी का चाणक्य कहा जाता है और यूपी उनकी सबसे बड़ी प्रयोगशाला रही है। सूत्रों की मानें तो पंकज चौधरी ने शाह को उन नामों की लिस्ट सौंपी है, जिस पर लखनऊ में आम सहमति बनी है।
इस मुलाकात में सिर्फ संगठन ही नहीं, बल्कि योगी मंत्रिमंडल में होने वाले फेरबदल पर भी चर्चा हुई। कौन अंदर होगा और किसका पत्ता कटेगा, इसका फैसला दिल्ली दरबार में ही होता है। अमित शाह के साथ चर्चा का मतलब है कि, अब बस औपचारिक घोषणा का इंतजार है।
यूपी सरकार में पिछले काफी समय से मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं हवा में थीं। कई मंत्री पद खाली हैं और कई मंत्रियों के पास एक से ज्यादा विभाग हैं। इसके अलावा, यूपी में दर्जनों निगम, आयोग और बोर्ड ऐसे हैं जहां अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली पड़े हैं। इन पदों पर नियुक्तियां न होने से कार्यकर्ताओं में थोड़ी मायूसी थी, क्योंकि ये पद वफादार कार्यकर्ताओं को पुरस्कार के रूप में दिए जाते हैं।
2027 की तैयारी
विनोद तावड़े सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इसी लिस्ट पर फाइनल चर्चा करने वाले हैं। मुख्यमंत्री रविवार को व्यस्त थे, इसलिए सोमवार की यह मीटिंग सबसे ज्यादा अहम है। माना जा रहा है कि, मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों का खास ख्याल रखा जाएगा ताकि 2027 की राह आसान हो सके।
अगर हम बीजेपी के पिछले संगठनात्मक बदलावों को देखें, तो पार्टी हमेशा से चौंकाने वाले फैसले लेती रही है। 2022 के चुनावों के बाद से ही संगठन में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। जिला कमेटियां तो बन गईं, लेकिन प्रदेश स्तर पर मामला अटका हुआ था।
याद कीजिए, जब स्वतंत्र देव सिंह के बाद भूपेंद्र चौधरी को अध्यक्ष बनाया गया था, तब भी काफी लंबा मंथन चला था। बीजेपी की कार्यशैली रही है कि वह सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करती है। इस बार देरी की एक बड़ी वजह यह भी है कि पार्टी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के निर्देशों का पालन कर रही है, जिन्होंने हाल ही में दिल्ली की बैठक में सभी राज्यों को अपनी प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा है। बीजेपी चाहती है कि नई टीम के पास 2027 के लिए कम से कम एक साल का पूरा समय हो।
इसी महीने होगा अध्यक्षों का ऐलान
बीजेपी की इस सक्रियता के पीछे सबसे बड़ी वजह है 2027 का विधानसभा चुनाव। पार्टी को पता है कि, यूपी जीते बिना दिल्ली की राह आसान नहीं होती। विनोद तावड़े ने फीडबैक के दौरान यह भी पूछा कि प्रदेश में ऐसे कौन से उलझे हुए मुद्दे हैं जो जनता के बीच पार्टी की छवि को प्रभावित कर रहे हैं।
विपक्ष जिस तरह से घेराबंदी कर रहा है, उसे देखते हुए बीजेपी को एक ऐसी टीम चाहिए जो न सिर्फ सोशल मीडिया पर एक्टिव हो, बल्कि जमीन पर जाकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर सके। इसी वजह से क्षेत्रीय अध्यक्षों के नामों पर सबसे पहले मुहर लगने वाली है। सूत्रों की मानें तो अप्रैल के अंत तक क्षेत्रीय अध्यक्षों का ऐलान हो जाएगा और मई में नई प्रदेश कार्यकारिणी सामने आ जाएगी।
काम काज में आएगी तेजी
जब नई टीम आती है, तो नई ऊर्जा भी आती है। मंत्रिमंडल विस्तार में अगर नए चेहरों को जगह मिलती है, तो सरकार के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद रहती है। खासकर उन युवाओं और जातीय समूहों को जोड़ने की कोशिश होगी जो पिछले कुछ समय से खुद को थोड़ा दूर महसूस कर रहे थे।
साथ ही, निगमों और बोर्डों में नियुक्तियां होने से बीजेपी का वह कार्यकर्ता फिर से सक्रिय हो जाएगा जो लंबे समय से अपनी ‘पहचान’ का इंतजार कर रहा था। राजनीति में कार्यकर्ता ही सबसे बड़ी पूंजी होता है, और बीजेपी उन्हें खाली हाथ नहीं रखना चाहती।
यूपी बीजेपी में चल रहा यह महामंथन अब अपने आखिरी मुकाम पर है। विनोद तावड़े का लखनऊ दौरा और पंकज चौधरी की दिल्ली की दौड़ इस बात का सबूत है कि अगले 15 से 20 दिनों के भीतर यूपी की राजनीति में बड़े धमाके होने वाले हैं।
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