
लखीमपुर खीरी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बांगलादेश से विस्थापित होकर आये बंगाली हिन्दुओं की दी गई जमीन का मालिकाना हक देने आज लखीमपुर आये। यहां उन्होंने न सिर्फ जिलेवासियों को बड़ी सौगात दी, बल्कि मोहम्मदी तहसील में स्थित गांव मियांपुर का नाम बदलकर रविन्द्र नगर कर दिया।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, जिस गांव में एक भी मुस्लिम न हो उसका नाम मियांपुर होना तुष्टि करण का परिणाम है, जो पूर्ववर्ती सरकारों की विभाजनकारी मानसिकता का जीता जगाता उदाहरण है। उन्होंने कहा, अब इस गांव को विश्वकवि गुरुदेव रविंद्र नाथ ठाकुर के सम्मान में ‘रविंद्र नगर’ के नाम से जाना जाएगा।
इसे भी पढ़ें-सीतापुर अग्निकांड का सीएम योगी ने लिया संज्ञान, परिजनों को दी 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता
बंगाली हिन्दुओं की दी पहचान
आपको बता दें कि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह लखीमपुर दौरा केवल परियोजनाओं के शिलान्यास तक सीमित रहा, बल्कि यह दशकों से उपेक्षित रहे परिवारों को उनकी पहचान और अधिकार वापस दिलाने का एक बड़ा अभियान भी था। मियांपुर (अब रविंद्र नगर) में आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी ने विभाजन की विभीषिका को याद करते हुए कांग्रेस और अन्य पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 1947 के विभाजन के बाद, जो लोग अपनी जड़ों को छोड़कर भारत आए, उनका पुनरोद्धार नहीं किया गया, उन्हें दशकों तक केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया।

मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा, पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए तमाम बंगाली हिंदू परिवारों को दशकों तक अपनी ही जमीन पर मेहमान की तरह रहना पड़ा। उनके पास जमीन तो है, लेकिन उसका कोई दस्तावेज नहीं है। इतने दशकों के बाद भी उनके पर पहचान पत्र जैसी कोई चीज नहीं है। सीएम ने कहा कि, पूर्व की सरकारों ने इन परिवारों के साथ अन्याय किया है। इसके साथ उनकी पहचान मिटाने के लिए उनके गांवों के नाम तक ऐसे रख दिए, जिनका वास्तविकता से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने सीधे तौर पर निशाना साधते हुए कहा कि, जहां एक भी मियां नहीं रहता, उस गांव का नाम मियांपुर रखना तुष्टिकरण की पराकाष्ठा थी, जिसे अब उनकी सरकार ने सुधार दिया है।
817 करोड़ की परियोजनाओं का किया शिलान्यास
मुख्यमंत्री ने लखीमपुर खीरी जिले के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए दो अलग-अलग कार्यक्रमों में कुल 817 करोड़ रुपये की 314 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में ग्रामीण सड़कें, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और बुनियादी ढांचे से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं।
मियांपुर की सभा से पहले मुख्यमंत्री पलियाकलां के चंदनचौकी पहुंचे थे। यहां उन्होंने थारू जनजाति के 4356 परिवारों को 538 हेक्टेयर जमीन के स्वामित्व संबंधी अधिकार पत्र सौंपे। ये परिवार वर्ष 1976 से इस जमीन का उपयोग कर रहे थे, लेकिन कानूनन उनके पास इसका कोई मालिकाना हक नहीं था। मुख्यमंत्री ने इसे एक ऐतिहासिक न्याय करार देते हुए कहा कि, अब ये थारू परिवार अपनी जमीन के असली मालिक बन गए हैं, जिससे उन्हें बैंक ऋण और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि, कुल मिलाकर 2350 विस्थापित परिवारों को भी उनके अधिकारों से लैस किया गया है।
पाकिस्तान का अंत निश्चित है- योगी
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने पाकिस्तान को पापी करार देते हुए कहा कि, जिस देश की नींव ही नफरत और विभाजन पर रखी गई हो, उसका अंत निश्चित है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने पहले भारत का विभाजन किया, फिर उसके खुद के टुकड़े हुए और बांग्लादेश बना और अभी उसके कई टुकड़े होंगे।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यकों हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाइयों की स्थिति बेहद दयनीय है क्योंकि वहां कट्टरपंथ की अतिवादिता इतनी है कि, इसके अलावा किसी और के लिए कोई जगह है नहीं है। उन्होंने भारत की एकता और अखंडता पर जोर देते हुए जनता को आगाह किया कि, वे विभाजनकारी राजनीति से सावधान रहें। मुख्यमंत्री ने कहा, जो लोग परिवारवाद और जातिवाद की राजनीति करते हैं, वे देश को कमजोर करना चाहते हैं, उन्हें बहकावे में न आएं।
संवेदनहीन थीं पिछली सरकारें
सच्चा शासन वही होता है, जहां की प्रजा सुखी रहती ह, इस मंत्र के साथ सीएम योगी ने अपनी सरकार की कार्यशैली को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, शासन की खुशी का आधार उसकी जनता की मुस्कान में छिपा होता है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि, पिछली सरकारों में संवेदनाओं का भारी अभाव था। वे सरकारें अपने परिवार के कल्याण और भ्रष्टाचार से ऊपर नहीं उठ पाईं, जिसके कारण थारू परिवार और विस्थापित बंगाली भाई-बहन दशकों तक मूलभूत अधिकारों के लिए तरसते रहे।
उन्होंने कहा कि, अगर पिछली सरकारों में जरा भी संवेदना होती, तो इन गरीबों को अपने हक के लिए इतना लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता। आज बिना किसी भेदभाव के हर पात्र व्यक्ति को आवास, शौचालय, बिजली और जमीन का अधिकार मिल रहा है। यह सबका साथ, सबका विकास के मंत्र का जीवंत उदाहरण है।
ग्रामीणों में उत्साह
गांव का नाम बदलकर ‘रविंद्र नगर’ करना केवल एक प्रशासनिक परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। गुरुदेव रविंद्र नाथ ठाकुर, जिन्होंने जन गण मन के जरिए पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोया, उनके नाम पर गांव का नामकरण करना बंगाली विस्थापित परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक जरिया है।

इस फैसले से स्थानीय लोगों में भारी उत्साह देखा गया। लोगों का मानना है कि अब उनके गांव को एक ऐसी पहचान मिली है जिस पर वे गर्व कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने अंत में लोगों से अपील की कि वे एकजुट रहें और विकास की इस मुख्यधारा से जुड़कर उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में सहयोग करें।
योगी आदित्यनाथ का लखीमपुर खीरी दौरा राजनीतिक से अधिक सामाजिक न्याय का संदेश देने वाला रहा। जमीन का मालिकाना हक मिलने से हजारों परिवारों के जीवन में नया सवेरा आया है। वहीं, नाम परिवर्तन और पाकिस्तान पर दिए गए बयानों ने एक बार फिर मुख्यमंत्री की फायरब्रांड छवि और सांस्कृतिक जड़ों के प्रति उनकी दृढ़ता को स्पष्ट कर दिया है। लखीमपुर की धरती से मुख्यमंत्री ने यह साफ कर दिया है कि उनकी सरकार में विरासत का सम्मान और गरीबों का उत्थान साथ-साथ चलेगा।
इसे भी पढ़ें- इलाज और पढ़ाई में बाधा नहीं बनेगा धन, इस्टीमेट लाओ, पैसा सरकार देगी- सीएम योगी



