मिशन कर्मयोगी’ के तहत सभी विभागों में सात दिवसीय प्रशिक्षण अनिवार्य करें : CM योगी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्च स्तरीय बैठक में ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत राज्य में अब तक हुई प्रगति और आगामी कार्ययोजना की समीक्षा की। बैठक में मिशन के क्रियान्वयन, प्रशिक्षण ढांचे, डिजिटल प्लेटफॉर्म और विभिन्न विभागों में क्षमता संवर्धन पर गहन चर्चा हुई। कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरपर्सन एस. राधा चौहान ने उत्तर प्रदेश में मिशन के कार्यान्वयन की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि ‘मिशन कर्मयोगी’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिवर्तनकारी पहल है, जिसका उद्देश्य ऐसे सक्षम मानव संसाधन तैयार करना है जो प्रदेश और देश के विकास में योगदान दें। यह पहल शासन व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अधिक उत्तरदायी, संवेदनशील और परिणामोन्मुख बनाने में मदद कर रही है।

बैठक में बताया गया कि मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत केंद्र में 30 लाख से अधिक सिविल सेवक, राज्यों में लगभग 2.2 करोड़ कार्मिक और स्थानीय निकायों में लगभग 50 लाख कर्मी क्षमता संवर्धन से जुड़े हैं। देश भर के 790 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक बनाया जा रहा है।

सभी सिविल सेवकों के सतत प्रशिक्षण के लिए आईगॉट (iGOT) डिजिटल प्लेटफॉर्म स्थापित किया गया है। यह अब विश्व का सबसे बड़ा सरकारी क्षमता निर्माण मंच बन चुका है, जिस पर 1.45 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं और 4,179 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इनमें 840 से अधिक पाठ्यक्रम हिंदी और 15 अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में 540 से अधिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। अब तक 6.7 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूर्ण किए जा चुके हैं, और पाठ्यक्रम पूर्णता दर 70 प्रतिशत से अधिक है। आईगॉट ऐप को 50 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया गया है।

उत्तर प्रदेश इस पहल में अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है। प्रदेश से 18.8 लाख से अधिक कार्मिक प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड हैं, जो 2025 में देश भर में हुई कुल ऑनबोर्डिंग का 93 प्रतिशत है। प्रदेश के 10 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं ने कम से कम एक पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण किया है, और अब तक 72 लाख से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए गए हैं, जो देश में हुई कुल पाठ्यक्रम पूर्णताओं का 99 प्रतिशत है।

मुख्यमंत्री योगी ने निर्देश दिए कि सभी विभाग और सरकारी संस्थाएं अपनी जरूरत अनुसार पाठ्यक्रम तैयार कर iGOT पर अपलोड करें। सात दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम को अनिवार्य किया जाए और इसे प्रमोशन एवं ACR से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि ट्रेनिंग सेंटर में नव प्रशिक्षणार्थियों की कार्यदक्षता बढ़ाने के लिए समयानुसार पाठ्यक्रम बनाएं और सभी विभागों में AI एवं साइबर सुरक्षा को शामिल करें।

उन्होंने iGOT के केस स्टडी प्लेटफॉर्म ‘अमृत ज्ञान कोश’ में उत्तर प्रदेश की अच्छी केस स्टडीज अपलोड करने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान, कौशल और सकारात्मक दृष्टिकोण के समन्वय से ही जनसेवा की गुणवत्ता में सुधार संभव है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता, नियमित मूल्यांकन और व्यावहारिक उपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया जाए। फील्ड कर्मियों जैसे ANM, आशा कार्यकर्ता, पुलिस कांस्टेबल और पंचायत एवं नगरीय निकाय कर्मियों के लिए व्यवहारिक और जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम प्राथमिकता से तैयार किए जाएं, ताकि जमीनी स्तर पर सेवाओं की प्रभावशीलता और संवेदनशीलता बढ़े।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया सरकारी मंथन के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...