धार्मिक, ज्योतिषीय और वास्तु शास्त्र में अपराजिता के फूल को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि जिस घर में अपराजिता का पौधा सही विधि और शुभ दिशा में लगाया जाता है, वहां मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है, आर्थिक संकट दूर होते हैं और घर में सुख-शांति का वास होता है। यह पौधा न केवल आध्यात्मिक रूप से बल्कि वास्तु और आयुर्वेद के दृष्टिकोण से भी बेहद लाभकारी माना जाता है।
अपराजिता का फूल क्यों माना जाता है शुभ
अपराजिता के फूल अपनी आकर्षक नीली आभा के कारण वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। हालांकि यह फूल अन्य रंगों में भी पाए जाते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु और शनिदेव को अपराजिता के फूल अत्यंत प्रिय हैं। इसी कारण इस फूल और पौधे का उपयोग ज्योतिषीय उपायों और वास्तु शांति के लिए किया जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में अपराजिता का महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस घर में अपराजिता का पौधा होता है, वहां भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का वास माना जाता है। साथ ही उस घर पर शनिदेव की अशुभ या क्रूर दृष्टि नहीं पड़ती। ऐसे में आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं और करियर व व्यवसाय में की गई मेहनत सफल होती है।
धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा अपराजिता का पौधा
धार्मिक दृष्टि से अपराजिता को अत्यंत पवित्र फूलों में गिना जाता है। मान्यता है कि प्रत्येक गुरुवार को भगवान विष्णु को और शुक्रवार को मां लक्ष्मी को अपराजिता के फूल अर्पित करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है और धन संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार अपराजिता के पौधे के लाभ
वास्तु शास्त्र में अपराजिता को सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला पौधा माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इसे घर की पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर का वातावरण शांत और शुभ बना रहता है।
अपराजिता लगाने की सबसे शुभ दिशा
वास्तु के अनुसार यदि अपराजिता का पौधा घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में लगाया जाए तो इसके शुभ परिणाम शीघ्र दिखाई देते हैं। इस दिशा में पौधा लगाने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है, क्योंकि इसे देवी-देवताओं की दिशा माना जाता है।
Sarkari Manthan Hindi News Portal & Magazine