
हिंदू धर्म में भगवान शनि देव को न्याय के देवता के रूप में जाना जाता है। वे कर्मों के फल देने वाले और साढ़ेसाती, ढैय्या जैसे दोषों से जुड़े माने जाते हैं। मान्यता है कि, शनि देव की सच्ची भक्ति और दर्शन से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, न्याय मिलता है और शनि दोष से मुक्ति प्राप्त होती है। भारत में शनि देव को समर्पित कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इनमें से 6 सबसे प्रसिद्ध शनि मंदिरों की चर्चा आज हम कर रहे हैं, जो अपनी अनोखी मान्यताओं, इतिहास और वास्तुकला के लिए जाने जाते हैं। इन मंदिरों में दर्शन मात्र से ही भक्तों को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
शनि शिंगणापुर मंदिर, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित शनि शिंगणापुर मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और अनोखे शनि मंदिरों में से एक है। यह मंदिर अपनी खासियत के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां भगवान शनि की कोई छत या दीवारें नहीं हैं। मंदिर खुला हुआ है और भगवान शनि की 5.5 फुट ऊंची काली शिला (स्वयंभू प्रतिमा) सोनाई नामक चबूतरे पर विराजमान है।

किंवदंती है कि, सदियों पहले नदी में तैरती हुई यह काली शिला मिली, जिससे खून बह रहा था। बाद में भगवान शनि ने ग्राम प्रधान के सपने में आकर बताया कि यह उनकी प्रतिमा है और इसे खुले आसमान के नीचे ही रखा जाए। यहां चोरी की कोई घटना नहीं होती, क्योंकि ग्रामीणों का मानना है कि शनि देव चोरों को दंड देते हैं। हर शनिवार को तेलाभिषेक और विशेष पूजा होती है। यह मंदिर ‘जागृत देवस्थान’ माना जाता है, जहां शनि देव साक्षात निवास करते हैं। श्रद्धालु यहां साढ़ेसाती और शनि दोष निवारण के लिए आते हैं।
शनि धाम मंदिर, नई दिल्ली
राजधानी दिल्ली के छतरपुर इलाके में स्थित शनि धाम मंदिर विश्व की सबसे ऊंची शनि प्रतिमा के लिए जाना जाता है। यहां प्राकृतिक चट्टान से बनी भगवान शनि देव की 21 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित है, जिसका अनावरण 2003 में किया गया था। यह मूर्ति अष्टधातु और प्राकृतिक शिला से निर्मित है। मान्यता है कि मंदिर में शनि देव की पूजा से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं।

यह मंदिर शक्ति पीठ के रूप में भी जाना जाता है और यहां विशेष रूप से शनिवार को भारी भीड़ लगती है। भक्त तेल चढ़ाते हैं, सरसों का तेल दीपक जलाते हैं और शनि मंत्रों का जाप करते हैं। दिल्ली-NCR के लोगों के लिए यह निकटतम और सबसे शक्तिशाली शनि मंदिर है।
तिरुनल्लार शनिश्वर भगवान मंदिर, तमिलनाडु
तमिलनाडु के काराइकल (पुडुचेरी के निकट) स्थित तिरुनल्लार शनिश्वर मंदिर नवग्रह मंदिरों में से एक प्रमुख है। यह धरबारण्येश्वर (शिव) मंदिर का हिस्सा है, जहां शनि देव की अलग से पूजा होती है। मान्यता है कि, यहां नाल तीर्थ सरोवर में स्नान करने से पिछले जन्म के पाप और शनि दोष दूर होते हैं।

यह मंदिर नवग्रह यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भक्त यहां ‘शनि शांति पूजा’ करवाते हैं, जिससे दुर्भाग्य, विपत्तियां और शनि की साढ़ेसाती से राहत मिलती है। मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारतीय शैली की है और यहां शनिवार को विशेष उत्सव होते हैं।
शनिचारा मंदिर, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित शनिचारा मंदिर देश के सबसे प्राचीन शनि मंदिरों में से एक है। माना जाता है कि, यहां की शनि मूर्ति एक उल्कापिंड से बनी है, जो सदियों पहले इसी पहाड़ी पर गिरी थी। मंदिर पहाड़ी की चोटी पर है, जहां पहुंचने के लिए सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

यहां शनिचरी अमावस्या पर विशाल मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं। मंदिर परिसर में विशेष स्नानघाट और पूजा स्थल हैं। भक्तों का विश्वास है कि यहां दर्शन से शनि के क्रोध से मुक्ति मिलती है और जीवन में स्थिरता आती है।
बन्नंजे श्री शनि क्षेत्र, कर्नाटक
कर्नाटक के उडुपी जिले में स्थित बन्नंजे श्री शनि क्षेत्र मंदिर भगवान शनि की विशाल अखंड प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। यह प्रतिमा लगभग 23-35 फुट ऊंची है। ये दो सीढ़ी वाले चबूतरे पर स्थापित है ताकि सभी भक्त आसानी से दर्शन कर सकें। मंदिर श्रीकृष्ण मठ से मात्र कुछ किलोमीटर दूर है।

यहां तेलाभिषेक मुख्य प्रसाद है। भक्त शनि दोष निवारण और न्याय के लिए यहां आते हैं। मंदिर की शांत वातावरण और विशाल मूर्ति भक्तों को आकर्षित करती है।
येरदानूर शनि मंदिर, तेलंगाना
तेलंगाना के संगरेड्डी (मेडक जिला) के येरदानूर गांव में स्थित यह मंदिर अपनी 20 फुट ऊंची काले पत्थर की अखंड प्रतिमा के लिए जाना जाता है, जिसका वजन करीब 9 टन है।

प्रतिमा 2 फुट ऊंचे आधार पर है। यह दक्षिण भारत के सबसे ऊंचे शनि मंदिरों में से एक है। भक्त यहां शनि के बुरे प्रभावों से बचाव के लिए आते हैं। मुख्य अनुष्ठान में सरसों का तेल, काले तिल और पूजा शामिल है। मंदिर शनि साढ़ेसाती के दौरान विशेष महत्व रखता है।
ये 6 मंदिर शनि भक्तों के लिए आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। शनिवार को इनमें विशेष पूजा होती है, जहां तेल चढ़ाना, दीपक जलाना और ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र जाप से शनि दोष दूर होता है। यदि आप शनि दोष से पीड़ित हैं, तो इन मंदिरों के दर्शन अवश्य करें।
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