फिल्मी स्टाइल में ठगी! मेरठ में 1 करोड़ के सोने के जेवर की चोरी, हवाला कनेक्शन की आशंका

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में नामचीन दो कारोबारियों के बीच एक करोड़ रुपये के सोने के सौदे ने गंभीर विवाद को जन्म दे दिया है। व्हाट्सएप कॉल से शुरू हुआ यह सौदा नकद भुगतान, फर्जी पहचान और फरार युवक तक पहुंचा, जिसके बाद दोनों पक्ष थाने पहुंचे और अलग-अलग तहरीरें दी। मामले को देखते हुए माना जा रहा है कि, पुलिस के साथ-साथ इसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग, GST, BIS को भी सौंपी जा सकती है।

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व्हाट्सएप कॉल आई कॉल 

मेरठ

जानकारी के अनुसार, बुधवार दोपहर लगभग एक बजे कृष्णा नामक व्यक्ति ने रघुनंदन ज्वैलर्स प्राइवेट लिमिटेड में व्हाट्सएप कॉल कर लगभग एक करोड़ रुपये के सोने के आभूषण खरीदने की इच्छा जताई। खुद शोरूम न आ पाने की बात कहते हुए उसने अपने भतीजे को भेजा। कुछ देर बाद एक युवक शोरूम पहुंचा और उसने खुद को कृष्णा का भतीजा बताते हुए 600–650 ग्राम सोने के जेवर पसंद किए।

भुगतान के लिए कृष्णा ने ऑनलाइन ट्रांजैक्शन असमर्थता जताई और नकद भेजने को कहा। करीब आधे घंटे बाद चार युवक शोरूम पहुंचे, जिनमें दो मेरठ निवासी और दो बिहार के मुजफ्फरपुर के बताए गए। उन चारों ने मिलकर शोरूम में नकद एक करोड़ रुपये जमा किए। इसके बाद सभी पसंद किये गये जेवर कथित भतीजे को सौंप दिए गए।

ऐसे पलट गया मामला 

जैसे ही युवक जेवर लेकर निकला, नकद देने वाले चारों युवक अचानक भुगतान रोकने लगे। उनका कहना था कि, वे सोना खरीदने नहीं आए थे, बल्कि अपने बैंक खाते में सिर्फ एक करोड़ रुपये की एंट्री दिखाने के लिए नकद दिए। रुड़की रोड निवासी कारोबारी प्रवीण शर्मा का कहना है कि, उन्हें भी किसी कृष्णा ने शोरूम भेजा था। शोरूम प्रबंधक तन्मय अग्रवाल का कहना है कि, भुगतान के बदले जेवर वही युवक ले गया जिसे भेजा गया था। इसी बात को लेकर शोरूम में नोकझोंक हुई।

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नियमों के घेरे में सौदा

सोने के आभूषणों की बिक्री में सरकारी नियम बेहद सख्त हैं। केवल BIS प्रमाणित हॉलमार्क (HUID) वाले जेवर ही बेचे जा सकते हैं। बिना बिल और खरीदार का सत्यापन किए हॉलमार्क जेवर बेचना नियमों के खिलाफ है। बड़े लेनदेन में खरीदार की पहचान, बिल, GST और आयकर की जानकारी अनिवार्य होती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या नकद एक करोड़ रुपये लेना नियमों के दायरे में था और जेवर लेने वाले का सत्यापन क्यों नहीं हुआ।

ठगी या हवाला कनेक्शन 

सूत्रों के अनुसार, रघुनंदन ज्वैलर्स ने नकद एक करोड़ लेकर 600-650 ग्राम सोना बेचा। वहीं प्रवीण शर्मा के मुताबिक उन्होंने सिर्फ बैंक एंट्री के लिए पैसे दिए थे। इस स्थिति से हवाला कनेक्शन की आशंका जताई जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ठगी का वास्तविक शिकार कौन है और दोषी कौन।

पांच विभागों की संभावित जांच

इस प्रकरण में अब पांच विभागों की संभावित जांच चर्चा में है। प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग, जीएसटी विभाग, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), पुलिस प्रशासन। यदि इन एजेंसियों को जांच सौंपी जाती है, तो न केवल ठगी की सच्चाई सामने आएगी, बल्कि हवाला के जरिए काले धन को सफेद करने के संभावित नेटवर्क का भी खुलासा हो सकता है।

 

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