
बांदा/चित्रकूट। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की विशेष POCSO अदालत ने एक ऐसे जघन्य बाल यौन शोषण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। चित्रकूट में सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर (JE) रामभवन कुशवाहा और उसकी पत्नी दुर्गावती कुशवाहा को 34 नाबालिग बच्चों के साथ क्रूर यौन शोषण करने, उनके अश्लील वीडियो और तस्वीरें डार्क वेब पर विदेशों में बेचने के दोष में फांसी की सजा सुनाई गई है।
इसे भी पढ़ें- बांदा में हादसा : केन नदी में नहाते समय डूबे 5 बच्चे, 4 की मौत, एक की तलाश जारी, मौके पर पहुंचे SDM
दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी का अपराध

विशेष POCSO अदालत के न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 163 पन्नों के विस्तृत फैसले में इस अपराध को दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी का करार देते हुए कहा, दोनों आरोपियों को फांसी पर लटकाकर मौत तक सजा दी जानी चाहिए। इनमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची है। यह मामला न केवल एक परिवार की हैवानियत का खुलासा करता है, बल्कि डार्क वेब के माध्यम से चल रहे अंतरराष्ट्रीय बाल यौन शोषण रैकेट की भयावह सच्चाई को भी सामने लाता है। जांच में सामने आया कि इस गिरोह से जुड़े 47 देशों में सामग्री का लेन-देन हो रहा था।
2020 में सामने आया था मामला
इंटरपोल की शिकायत पर सीबीआई ने पांच साल से अधिक समय तक चली जांच में 990 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 74 गवाहों के बयान, डिजिटल साक्ष्य और पीड़ित बच्चों की दिल दहला देने वाली कहानियां शामिल हैं। मामले की शुरुआत 2020 में तब हुई जब इंटरपोल ने दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय को एक विस्तृत ई-मेल भेजा। इसमें बताया गया कि रामभवन कुशवाहा तीन अलग-अलग मोबाइल नंबरों से डार्क वेब पर बच्चों के अश्लील वीडियो और फोटो बेच रहा है। इंटरपोल, जो 195 देशों में सक्रिय है, ने इसे अंतरराष्ट्रीय बाल यौन शोषण नेटवर्क का हिस्सा माना।
सीबीआई के लोक अभियोजक दारा सिंह मीणा के अनुसार, इंटरपोल से मिली तीन ई-मेल शिकायतों के बाद एजेंसी ने गहन जांच शुरू की। जांच में पुख्ता साक्ष्य जुटाए गए, जिसके आधार पर 16 नवंबर 2020 को चित्रकूट के एसडीएम कॉलोनी स्थित आवास पर छापेमारी की गई। छापे में रामभवन और दुर्गावती को गिरफ्तार किया गया।
चित्रकूट में बच्चों का यौन शोषण करने वाले पति-पत्नी को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। ये दोनों बच्चों के वीडियो-फोटो डार्क वेब के जरिए विदेशों में बेचते थे।
दोषी पति सिंचाई विभाग का जेई था। उसकी पोस्टिंग चित्रकूट में थी। पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा- दोनों… pic.twitter.com/nTlyvCLiQS
— Srishti (@Srishtivishwak4) February 20, 2026
जांच में 34 बच्चों के साथ हुए क्रूर यौन शोषण का खुलासा हुआ। पीड़ित बच्चों की उम्र 3 वर्ष से 18 वर्ष के बीच थी। अधिकांश बच्चे हमीरपुर जिले के थे, लेकिन चित्रकूट, बांदा और आसपास के इलाकों से भी शामिल थे।
बच्चों से गंदे काम करवाते थे दंपति
बच्चों ने कोर्ट में बताया कि रामभवन उन्हें पीटता था और जबरन गंदे काम करवाता था। दुर्गावती दरवाजा बंद कर बच्चों को कई दिनों तक बंधक बनाकर रखती थी। भागने की कोशिश करने पर उन्हें और अधिक यातनाएं दी जाती थीं। कई पीड़ित बच्चों को एम्स में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत बेहद गंभीर पाई गई। कुछ बच्चों की आंखें तिरछी हो गईं, भौंहें अपनी जगह से हट गईं और नाजुक अंगों को गंभीर क्षति पहुंची। उपचार अभी भी जारी है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी दंपति ने अपने भांजे को भी निशाना बनाया। वे गरीब मजदूरों, रिश्तेदारों और आसपास के बच्चों को खिलौनों और खाने-पीने के लालच में फंसाते थे।
इसे भी पढ़ें- सुरक्षित बांदा जेल पहुंचा मुख्तार अंसारी, रास्ते में करना पड़ा कई मुसीबतों का सामना
छापेमारी के दौरान आरोपी के घर से 10 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 6 मेमोरी कार्ड, 6 पेन ड्राइव, 1 डिजिटल वीडियो कैमरा, नाइट विजन कैमरा, यौन वर्धक दवाएं, विभिन्न तेल और भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई। पेन ड्राइव में 34 वीडियो और 679 अश्लील तस्वीरें मिलीं। एक वीडियो में दंपति 5 बच्चों के साथ सामूहिक अश्लील हरकतें करते हुए कैद हुए थे। यह सामग्री रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया सहित लगभग 12 देशों में भेजी गई थी। आरोपी सोशल मीडिया और डार्क वेब साइटों के जरिए अच्छी कमाई कर रहे थे।
गवाहों को धमकाने और सबूत मिटाने की कोशिश
दुर्गावती ने गिरफ्तारी से पहले तीन पीड़ित बच्चों और उनके अभिभावकों को वकील के पास ले जाने की कोशिश की ताकि मामले को प्रभावित किया जा सके। सीबीआई टीम ने उनका पीछा किया। उसने गवाहों को फोन पर धमकियां भी दीं। 28 दिसंबर 2020 को दुर्गावती को भी गिरफ्तार कर बांदा जेल भेजा गया। तीसरे आरोपी (ई-मेल शेयर करने वाले) की फाइल अलग कर दी गई है और वह जमानत पर बाहर है।

न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने फैसले में कहा, एक सरकारी अधिअकरी ने समाज की रक्षा के बजाय मासूमों का बचपन छीना। यह अपराध समाज की नैतिक नींव को हिला देता है। नरमी बरतने से खतरनाक संदेश जाएगा। कोर्ट ने यूपी सरकार को प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। आरोपियों के घर से बरामद राशि को भी पीड़ितों में बांटने के आदेश दिए।रामभवन पर 6.45 लाख और दुर्गावती पर 5.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
दंपति ने खुद को निर्दोष बताया

सजा सुनाए जाने के बाद रामभवन ने कोई पछतावा नहीं जताया। उसने कहा, मुझे जबरन फंसाया गया है। हाईकोर्ट में अपील करेंगे। दुर्गावती ने भी खुद को निर्दोष बताया और उच्च न्यायालय जाने की बात कही। दुर्गावती की मां ने दावा किया कि रिश्तेदारों ने उन्हें फंसाया है, लेकिन नाम उजागर करने से इनकार कर दिया।
बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत
कमल सिंह गौतम, विशेष लोक अभियोजक, बांदा ने कहा, यह सजा समाज की जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाती है। डार्क वेब जैसे प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा के लिए यह कड़ी चेतावनी है। ऐसे अपराध भविष्य में रोकने में मददगार साबित होंगे। यह मामला साइबर अपराध के बढ़ते खतरे और बच्चों की सुरक्षा की चुनौतियों को उजागर करता है। डार्क वेब पर ऐसे रैकेट को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है। बांदा कोर्ट का यह फैसला न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाता है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि बच्चों के साथ दरिंदगी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसे भी पढ़ें- बांदा यौन शोषण मामले में CBI ने किए कई खुलासे, सामने आया पीड़ित बच्चों का दर्द



