बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंसा तेज: ढाका में छात्र नेता की गोली मारकर हत्या, राजनीतिक तनाव चरम पर

ढाका: बांग्लादेश में चुनावी माहौल के बीच हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। राजधानी ढाका में अज्ञात बदमाशों ने पूर्व छात्र नेता और स्वेच्छासेवक दल के पदाधिकारी अजीजुर रहमान मुसब्बिर की गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना फरवरी में प्रस्तावित आम चुनाव से पहले राजनीतिक हिंसा की ताजा कड़ी मानी जा रही है।

कारवान बाजार इलाके में मारी गई गोली
पुलिस के अनुसार, यह हमला ढाका के व्यस्त कारोबारी क्षेत्र कारवान बाजार में हुआ। बसुंधरा सिटी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के पास सुपर स्टार होटल के नजदीक बदमाशों ने मुसब्बिर पर बेहद करीब से फायरिंग की। गोली लगते ही उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हमले में एक अन्य व्यक्ति भी गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बीएनपी से जुड़ा रहा था मृतक नेता
अजीजुर रहमान मुसब्बिर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की स्वयंसेवी शाखा ढाका मेट्रोपॉलिटन नॉर्थ स्वेच्छासेवक दल के महासचिव रह चुके थे। उनकी हत्या को राजनीतिक रंजिश से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

अस्पताल में भर्ती कराया गया घायल
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोलीबारी के बाद पीड़ितों को पहले बीआरबी अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर घायल व्यक्ति को ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

हमलावरों की तलाश में पुलिस अभियान
जांच अधिकारियों ने बताया कि हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद कई राउंड फायरिंग करते हुए मौके से फरार हो गए। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए इलाके में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। बुधवार सुबह तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी।

चुनाव से पहले बढ़ती हिंसा से चिंता
बांग्लादेश में फरवरी 2026 में आम चुनाव प्रस्तावित हैं और 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले आचार संहिता लागू है। इसके बावजूद राजनीतिक हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में जुबो दल के एक नेता को भी गोली मारी गई थी। इससे पहले 12 दिसंबर 2025 को इंकलाब मंच के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद देशभर में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। चुनाव नजदीक आते ही बढ़ती हिंसा और अस्थिरता ने देश की सुरक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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