नए साल की शुरुआत के साथ जिस पर्व का सबसे अधिक इंतजार रहता है, वह है मकर संक्रांति। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सूर्य की चाल, ऋतु परिवर्तन और जीवन में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक भी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में मकर संक्रांति को पुण्य, दान और शुभ कर्मों का विशेष दिन कहा गया है।
कब है मकर संक्रांति 2026 और क्यों है खास
साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण काल की शुरुआत होती है। मान्यता है कि उत्तरायण काल देवताओं का समय होता है, इसलिए इस अवधि में किए गए शुभ कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।
एक पर्व, अनेक नाम और एक ही भाव
भारत की विविधता इस पर्व में भी देखने को मिलती है। उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति कहा जाता है, दक्षिण भारत में यही पर्व पोंगल के नाम से प्रसिद्ध है। असम में बिहू, बंगाल में पौष संक्रांति और कई क्षेत्रों में खिचड़ी पर्व के रूप में इसे मनाया जाता है। नाम भले ही अलग हों, लेकिन मूल भावना सूर्य उपासना, दान-पुण्य और आपसी सौहार्द की ही होती है।
स्नान, पूजा और सूर्य उपासना का महत्व
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन स्नान और सूर्यदेव की पूजा का विशेष महत्व है। लोग प्रातःकाल पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। ऐसा करने से आत्मशुद्धि होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
खानपान में छिपा है सेहत और परंपरा का संदेश
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने व्यंजन विशेष रूप से बनाए जाते हैं। तिल के लड्डू, गुड़, खिचड़ी, दही-चूड़ा, चावल और दाल जैसे सात्विक भोजन न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि ठंड के मौसम में शरीर को ऊर्जा और गर्माहट भी देते हैं। लोक मान्यता है कि तिल-गुड़ खाने से रिश्तों में मिठास आती है और आपसी मनमुटाव दूर होता है।
मकर संक्रांति पर दान से कैसे कम होते हैं ग्रह दोष
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया दान विशेष फलदायी होता है। स्नान और पूजा के बाद जरूरतमंदों को दान देने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। माना जाता है कि मकर संक्रांति पर दान करने से कुंडली में सूर्य और शनि की स्थिति मजबूत होती है और कई ग्रह दोष कम हो जाते हैं।
इन वस्तुओं का दान माना जाता है शुभ
मकर संक्रांति के दिन तिल, गुड़, दही, चावल, दाल, अन्न, वस्त्र और कंबल का दान अत्यंत शुभ माना गया है। ठंड के मौसम को देखते हुए गर्म कपड़ों का दान भी विशेष पुण्य देता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन वस्तुओं के दान से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और जीवन में स्थिरता आती है।
पितृ दोष से मुक्ति का भी माना जाता है उपाय
मान्यता है कि मकर संक्रांति पर पितरों का स्मरण कर दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन किया गया दान पितृ ऋण, देव ऋण और ऋषि ऋण से भी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
मकर संक्रांति हमें जीवन में परिवर्तन को अपनाने, जरूरतमंदों की सहायता करने और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलने की सीख देती है। यही कारण है कि यह पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय मूल्यों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
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