धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला, उत्तराखंड में वन दरोगा बनने के लिए अब ग्रेजुएशन जरूरी, 18 प्रस्तावों को मिली मंजूरी

देहरादून। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य के विकास और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री आवास में आयोजित मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश के युवाओं, परिवहन व्यवस्था और आगामी महाकुंभ की तैयारियों को लेकर दूरगामी निर्णय लिए गए हैं। इस बैठक में कुल 18 प्रस्तावों पर चर्चा की गई, जिनमें से अधिकांश को कैबिनेट ने अपनी स्वीकृति दे दी है।

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सरकार का मुख्य ध्यान इस बार युवाओं के लिए रोजगार के मानकों में सुधार और प्रदेश की बुनियादी सुविधाओं को आधुनिक बनाने पर रहा है। खासतौर पर वन विभाग और शिक्षा क्षेत्र में किए गए बदलावों का सीधा असर आने वाली भर्तियों और राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ेगा। इसके साथ ही कुंभ मेले के सफल आयोजन के लिए अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में वृद्धि कर प्रशासनिक कामकाज को गति देने का प्रयास किया गया है।

वन दरोगा भर्ती में बड़ा बदलाव  

धामी कैबिनेट के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक वन विभाग की नियमावली में किया गया संशोधन है। उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली 2016 में बदलाव करते हुए सरकार ने वन दरोगा भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता को अब स्नातक (ग्रेजुएशन) कर दिया है। इससे पहले इस पद के लिए केवल इंटरमीडिएट पास होना अनिवार्य था। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से वन विभाग को अधिक कुशल और शिक्षित कार्यबल मिलेगा।

केवल योग्यता ही नहीं, बल्कि आयु सीमा में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब वन दरोगा पद के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की आयु सीमा 21 से बढ़ाकर 35 वर्ष कर दी गई है, जिससे राज्य के उन हजारों युवाओं को लाभ मिलेगा जो पिछले कुछ वर्षों में भर्ती न होने के कारण ओवरएज हो रहे थे। वहीं, वन आरक्षी (फॉरेस्ट गार्ड) के लिए आयु सीमा को 18 से 25 वर्ष के बीच निर्धारित किया गया है।

परिवहन निगम का होगा कायाकल्प 

राज्य की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कैबिनेट ने एक बड़ा निवेश करने का निर्णय लिया है। उत्तराखंड परिवहन निगम अब जल्द ही 250 नई बसों की खरीद करेगा। दिलचस्प बात यह है कि, पूर्व में शासन ने केवल 100 बसें खरीदने की अनुमति दी थी, लेकिन टैक्स दरों में आई कमी का लाभ उठाते हुए सरकार ने इस संख्या को बढ़ा दिया है।

दरअसल, बसों पर लगने वाला जीएसटी 28 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो गया है, जिससे बचने वाली राशि का उपयोग अतिरिक्त बसों की खरीद में किया जाएगा। अब परिवहन निगम कुल 109 बसें पुराने बजट के समायोजित हिस्से से और बाकी नई योजना के तहत खरीदेगा। इस फैसले से पहाड़ों से लेकर मैदानों तक यात्रियों का सफर सुगम होगा और परिवहन निगम के घाटे को कम करने में भी मदद मिलेगी।

कुंभ मेले की तैयारी 

आगामी कुंभ मेले के आयोजन को लेकर सरकार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। मेले से जुड़े स्थाई और अस्थाई निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए कैबिनेट ने अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों का दायरा बढ़ा दिया है। अब कुंभ मेला अधिकारी अपने स्तर पर एक करोड़ रुपये तक के कार्यों को मंजूरी दे सकेंगे। वहीं, यदि कार्य की लागत 1 करोड़ से अधिक और 5 करोड़ रुपये तक है, तो इसकी स्वीकृति गढ़वाल कमिश्नर द्वारा दी जा सकेगी। 5 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले सभी प्रोजेक्ट्स को शासन स्तर पर मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस विकेंद्रीकरण से फाइलों के चक्कर में अटके रहने वाले छोटे-बड़े प्रोजेक्ट्स अब समय सीमा के भीतर पूरे हो सकेंगे।

मदरसों के लिए नई नीति  

शिक्षा के क्षेत्र में भी धामी सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। प्रदेश में संचालित हो रहे लगभग 452 मदरसों में से 400 ऐसे हैं जहां पहली से आठवीं तक की कक्षाएं चलती हैं। अब इन मदरसों को मान्यता के लिए राजधानी के चक्कर नहीं काटने होंगे, बल्कि जिला स्तरीय शिक्षा समिति या सक्षम अधिकारी ही इन्हें मान्यता दे सकेंगे। हालांकि, जो मदरसे 12वीं तक की शिक्षा दे रहे हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी। इसके लिए अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम का अध्यादेश लाने की भी तैयारी है। इसके अतिरिक्त, कैबिनेट ने ‘उत्तराखंड विशेष शिक्षा शिक्षक नियमावली’ और ‘संस्कृत शिक्षा शैक्षिक संवर्ग सेवा नियमावली 2026’ को भी मंजूरी दी है, जो राज्य में संस्कृत और विशेष शिक्षा के ढांचे को और अधिक पारदर्शी बनाएगी।

खनिज रॉयल्टी में वृद्धि  

राजस्व बढ़ाने की दिशा में कदम उठाते हुए सरकार ने उत्तराखंड उप खनिज परिहार नियमावली 2023 में संशोधन किया है। इसके तहत अब खनिजों पर लगने वाली रॉयल्टी की दर को 7 रुपये प्रति कुंतल से बढ़ाकर 8 रुपये प्रति कुंतल कर दिया गया है। निर्माण क्षेत्र से जुड़े ठेकेदारों के लिए भी राहत भरी खबर है। डी श्रेणी के सूचीबद्ध ठेकेदारों के लिए कार्य करने की सीमा को 1 करोड़ से बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं, लोक निर्माण विभाग में दिव्यांग श्रेणी के पदों को लेकर भी संवेदनशीलता दिखाई गई है। 2023 की भर्ती में दिव्यांग अभ्यर्थी न मिलने के कारण जिन पदों पर सामान्य वर्ग की भर्ती हुई थी, उन 6 पदों की भरपाई के लिए नए पदों के सृजन का निर्णय लिया गया है।

मौन पालन और उच्च शिक्षा शोध को प्रोत्साहन

पर्यावरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग ने एक नई नीति तैयार की है, जिसके तहत अब वन क्षेत्रों की सीमा में मौन पालन (मधुमक्खी पालन) किया जा सकेगा। मंत्रिमंडल ने इस नीति पर अपनी मुहर लगा दी है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और शहद उत्पादकों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही, ‘मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना’ का दायरा भी बढ़ाया गया है।

अब प्रदेश के 21 अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों के प्राचार्य भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे, जिससे उच्च शिक्षा में शोध कार्यों को नई गति मिलेगी। कार्मिक विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि एकल संवर्ग की प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) को लेकर एक स्पष्ट एसओपी तैयार की जाए ताकि भविष्य में भर्तियों को लेकर कोई भ्रम न रहे। इन तमाम फैसलों से स्पष्ट है कि धामी सरकार विकास के साथ-साथ प्रशासनिक सरलीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

 

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