
देहरादून। हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड की शांत वादियों में अब एक नई आर्थिक क्रांति की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने देवभूमि के प्राकृतिक संसाधनों को सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी और नवाचारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उत्तराखंड के घने जंगल अब केवल लकड़ी या पर्यटन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ये राज्य के किसानों और युवाओं के लिए सुनहरा शहद उगलेंगे।
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वन विकास निगम की रजत जयंती में हुए शामिल
मौन पालन (बीकीपिंग) को कृषि भूमि की सीमाओं से बाहर निकालकर वनों के भीतर तक ले जाने का यह निर्णय न केवल पहाड़ की आर्थिकी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में भी मील का पत्थर साबित होगा। यह पहल उस समय सामने आई है जब राज्य अपने वन विकास निगम की रजत जयंती मना रहा है, जो विकास और विरासत के अद्भुत संगम को दर्शाता है।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित एक गरिमामयी और ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने वाली कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री आवास में आयोजित यह कार्यक्रम उत्तराखंड वन विकास निगम की स्थापना के 25 सफल वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रखा गया था। इसी मंच से मुख्यमंत्री ने राज्य में ‘मौन पालन’ यानी मधुमक्खी पालन को एक नई दिशा देने के लिए क्रांतिकारी योजना का ऐलान किया।
सरकार ने अब यह तय किया है कि शहद उत्पादन को केवल खेतों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि राज्य के विशाल वन क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर बी-बॉक्स (मधुमक्खी के बक्से) स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दौरान वन विभाग के आला अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि वे वन क्षेत्रों में बी-बॉक्स स्थापित करने के लिए एक विस्तृत और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करें, जिसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जाए।
वैश्विक बाजार में मिलेगी उत्तराखंड को नई पहचान
सरकार का मानना है कि राज्य के पहाड़ी इलाकों में फूलों और वनस्पतियों की जो विविधता मौजूद है, उसका सही दोहन अब तक नहीं हो पाया है। यदि वनों के भीतर मधुमक्खी पालन शुरू होता है, तो इससे न केवल शहद के उत्पादन में कई गुना वृद्धि होगी, बल्कि यह शुद्ध ऑर्गेनिक शहद के रूप में वैश्विक बाजार में उत्तराखंड की एक नई पहचान स्थापित करेगा।

इस योजना के पीछे सरकार का मुख्य फोकस किसानों और ग्रामीण युवाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि करना है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि मौन पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसमें निवेश बहुत कम है लेकिन लाभ की संभावनाएं असीमित हैं। विशेषकर उन युवाओं के लिए जो स्वरोजगार की तलाश में हैं, यह योजना संजीवनी का काम करेगी। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में उत्तराखंड का शहद अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरे और इसका निर्यात बढ़े, जिससे सीधे तौर पर गांव के आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति की जेब में पैसा पहुंचे।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह कदम बेहद दूरदर्शी माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने विस्तार से बताया कि मधुमक्खियां केवल शहद ही नहीं देतीं, बल्कि वे प्रकृति की सबसे बड़ी ‘परागणकर्ता’ हैं। वनों में बी-बॉक्स लगने से वनस्पतियों की जैव विविधता को मजबूती मिलेगी और जंगलों का प्राकृतिक स्वास्थ्य बेहतर होगा।
अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों की मानें तो कृषि और वन क्षेत्र में मधुमक्खियों की सक्रियता बढ़ने से फसलों की उत्पादकता में 30 से 40 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है, क्योंकि लगभग 70 प्रतिशत फसलें पूरी तरह से परागण पर निर्भर करती हैं। इस प्रकार, यह योजना अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेगी।
कार्यक्रम का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव उत्तराखंड वन विकास निगम के 25 वर्षों के शानदार सफर का जश्न था। मुख्यमंत्री ने निगम के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि पिछले ढाई दशकों में इस संस्था ने राज्य के बहुमूल्य वन संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन में अपनी उपयोगिता सिद्ध की है।
निगम के कामकाज को और अधिक विस्तार देते हुए मुख्यमंत्री ने एक और बड़ी घोषणा की, जिसके तहत अब कुमाऊं मंडल में भी वन विकास निगम का एक नया कार्यालय खोला जाएगा। इस निर्णय से कुमाऊं क्षेत्र के लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी होगी और वहां वन प्रबंधन के कार्यों में तेजी आएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
मेधावियों को किया सम्मानित
मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता उस वक्त भी दिखाई दी जब उन्होंने निगम के मेधावी बच्चों को सम्मानित किया। उन्होंने वन विकास निगम के उन बच्चों को पुरस्कार दिए जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी संस्थान की सफलता उसके कर्मचारियों की मेहनत पर टिकी होती है और उनके परिवारों का मनोबल बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। यह सम्मान समारोह कर्मचारियों के प्रति सरकार के सम्मान और भविष्य की पीढ़ी के प्रति उसकी जिम्मेदारी का प्रतीक बनकर उभरा।

सरकार की इस पूरी कवायद को एक दीर्घकालिक सामरिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। उत्तराखंड सरकार अब मौन पालन को केवल एक विभाग की योजना नहीं, बल्कि एक मिशन के रूप में चलाएगी। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में क्लस्टर बनाकर युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा, उन्हें सब्सिडी प्रदान की जाएगी और आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा। सरकार का विजन है कि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी के साथ-साथ अब पहाड़ का ‘शहद’ भी राज्य के काम आए।
देहरादून से शुरू हुई यह मधु-यात्रा उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यदि वन क्षेत्रों में बी-बॉक्स लगाने की यह योजना धरातल पर सही ढंग से उतरती है, तो उत्तराखंड आने वाले वर्षों में देश का ‘हनी हब’ बन सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह विजन न केवल किसानों के चेहरों पर मुस्कान लाएगा, बल्कि पलायन जैसी गंभीर समस्या को रोकने में भी स्वरोजगार के माध्यम से एक कारगर हथियार साबित होगा। वन, वन्यजीव और ग्रामीण विकास का ऐसा त्रिकोणीय संगम उत्तराखंड के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखता नजर आ रहा है।
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