
देहरादून। उत्तराखंड की जीवनरेखा कही जाने वाली चारधाम यात्रा इस समय अपने चरमोत्कर्ष पर है। लाखों की संख्या में श्रद्धालु देवभूमि की ओर रुख कर रहे हैं। इस विशाल धार्मिक आयोजन को सुरक्षित, सुचारू और निर्बाध बनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं।
इसी कड़ी में रविवार को मुख्यमंत्री ने देश की राजधानी दिल्ली का दौरा किया और केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी से कर्तव्य भवन में एक बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा चारधाम यात्रा के दौरान होने वाली संभावित ईंधन किल्लत को रोकना और मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करना था।
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बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि, उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और पहचान का सबसे बड़ा स्तंभ पर्यटन और तीर्थाटन है। 19 अप्रैल से शुरू हुई इस साल की चारधाम यात्रा ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ने के संकेत दे दिए हैं। आंकड़ों के अनुसार, हर दिन 50 हजार से अधिक श्रद्धालु बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन कर रहे हैं। रविवार, 26 अप्रैल को यह संख्या 59 हजार के पार पहुंच गई, जबकि अब तक कुल 2.97 लाख से अधिक लोग दर्शन कर चुके हैं।

इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने से राज्य में व्यावसायिक संसाधनों की मांग कई गुना बढ़ गई है। सीएम धामी ने जोर देकर कहा कि यात्रा के दौरान होटलों, ढाबों और होमस्टे में भोजन की व्यवस्था के लिए व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की मांग में भारी उछाल आता है। उन्होंने मांग की कि यात्रा के सुचारू संचालन के लिए राज्य को व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की 100 प्रतिशत आपूर्ति निरंतर सुनिश्चित की जाए।
9 लाख 67 हजार 949 व्यावसायिक सिलेंडरों की आवश्यकता
मुख्यमंत्री ने गणना प्रस्तुत करते हुए बताया कि अप्रैल से नवंबर तक चलने वाली इस यात्रा अवधि में राज्य को लगभग 9 लाख 67 हजार 949 व्यावसायिक सिलेंडरों की आवश्यकता होती है। यदि आपूर्ति में थोड़ी भी कमी आती है, तो इसका सीधा असर यात्रा की व्यवस्थाओं और यात्रियों की सुविधाओं पर पड़ेगा।
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां जितनी सुंदर हैं, मानसून के दौरान उतनी ही चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री के सामने राज्य की आपदाजन्य संवेदनशीलता का मुद्दा भी प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि जून से सितंबर के बीच उत्तराखंड को हर साल भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं और रसद पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।
5% अतिरिक्त आवंटन का अनुरोध
सीएम धामी ने तर्क दिया कि, आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में एलपीजी गैस एक अनिवार्य आवश्यकता बन जाती है, खासकर दुर्गम क्षेत्रों में जहां बिजली या लकड़ी का विकल्प सीमित होता है। इसी दूरगामी सोच के साथ उन्होंने व्यावसायिक सिलेंडरों के सामान्य कोटे के अतिरिक्त 5 प्रतिशत के आवंटन का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री का मानना है कि, यह अतिरिक्त स्टॉक आपातकालीन स्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों को त्वरित और प्रभावी बनाने में सुरक्षा कवच का काम करेगा।
बैठक के दौरान पुष्कर सिंह धामी ने एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी उठाया कि, चारधाम यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह लाखों परिवारों की रोजी-रोटी का साधन है। स्थानीय गाइडों से लेकर होटल व्यवसायी और छोटे दुकानदारों तक, पूरी आर्थिक व्यवस्था इन्हीं सात-आठ महीनों पर टिकी होती है।

ऊर्जा संसाधनों की कमी राज्य की आर्थिक गति को धीमा कर सकती है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मुख्यमंत्री की बातों को गंभीरता से सुना और राज्य की भौगोलिक चुनौतियों को समझते हुए सभी प्रस्तावों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया। केंद्र ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड के हितों की रक्षा और चारधाम यात्रा की सफलता के लिए मोदी सरकार हर संभव सहयोग करेगी।
हेमा मालिनी से मिले धामी
अपने दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए। उन्होंने उत्तराखंड निवास में प्रख्यात अभिनेत्री और मथुरा की सांसद हेमा मालिनी से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान सीएम ने उन्हें उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों के अंब्रेला ब्रांड ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के विशेष उत्पाद भेंट किए।
‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ मुख्यमंत्री धामी की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य उत्तराखंड के पहाड़ों में उगने वाले जैविक उत्पादों, दालों, शहद और हस्तशिल्प को एक प्रीमियम ब्रांड के रूप में दुनिया के सामने पेश करना है। हेमा मालिनी जैसी बड़ी शख्सियत को ये उत्पाद भेंट करना ब्रांड की दृश्यता बढ़ाने का एक रणनीतिक प्रयास माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर साझा किया कि इस ब्रांड के माध्यम से राज्य की मातृशक्ति और स्थानीय काश्तकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।
राज्य के उत्पादों की ब्रांडिंग
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह दिल्ली दौरा दर्शाता है कि वे चारधाम यात्रा के प्रबंधन को लेकर कितने गंभीर हैं। एक ओर जहां वे बुनियादी ढांचे और रसद (LPG) के लिए केंद्र से पैरवी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य के उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए भी सक्रिय हैं। 2.97 लाख श्रद्धालुओं का अब तक सफल आगमन प्रशासन की मुस्तैदी का प्रमाण है। यदि केंद्र सरकार 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति और आपदा कोटा की मांग को पूरा करती है, तो यह आगामी मानसून सीजन के दौरान उत्तराखंड के लिए एक बड़ी राहत होगी।
अंततः, धामी सरकार का लक्ष्य ‘अतिथि देवो भव:’ की भावना को चरितार्थ करते हुए चारधाम यात्रा को न केवल सुगम बनाना है, बल्कि आपदा जैसी स्थितियों के लिए पहले से तैयार रहना भी है। केंद्र और राज्य का यह समन्वय निश्चित रूप से देवभूमि के विकास और सुरक्षा की नई इबारत लिखेगा।
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