
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में आज का दिन ऐतिहासिक और बेहद गहमागहमी भरा रहा। दिल्ली में महिला आरक्षण लागू करने की राह में आई अड़चनों और जनगणना के पेच के बीच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया।
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सत्र का मुख्य उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम और मातृशक्ति के अधिकारों पर चर्चा करना था, लेकिन सदन के भीतर और बाहर जो दृश्य दिखे, उन्होंने इस विमर्श को सत्ता और विपक्ष के बीच एक तीखे वैचारिक युद्ध में बदल दिया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार मातृशक्ति को उनका हक दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं विपक्ष ने इसे महज एक चुनावी स्टंट और भ्रम का मायाजाल करार दिया।
कांग्रेस पर बोला हमला
विशेष सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि देश की नारियों को यह विश्वास होना चाहिए कि उनका अधिकार उन्हें मिलकर रहेगा। धामी ने कहा कि आधी आबादी को उनका पूरा हक दिलाना ही हमारी प्राथमिकता है ताकि मातृशक्ति विकसित भारत के निर्माण में अपनी पूरी क्षमता से योगदान दे सके। उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष को हमेशा केवल अपने वोट बैंक की चिंता रहती है, जबकि भाजपा ने धरातल पर काम किया है।

मुख्यमंत्री ने सदन में आंकड़े रखते हुए बताया कि, नेहरू और इंदिरा गांधी के दौर में मंत्रिमंडल में नाममात्र की महिलाएं होती थीं, जबकि मोदी सरकार में 7 महिला मंत्री देश का नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में महिलाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है।
राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है और लखपति दीदी योजना से महिलाएं समृद्ध हो रही हैं। धामी ने विपक्ष को आईना दिखाते हुए कहा कि अगर विधानसभा की सीटें 70 से बढ़कर 105 और सांसदों की संख्या 5 से बढ़कर 8 होने की संभावना है, तो विपक्ष क्यों बौखलाया हुआ है? यह सीटें आखिर महिलाओं को ही तो मिलेंगी।
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को घेरा
सत्ता पक्ष के दावों के बीच नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार को जमकर घेरा। आर्य ने तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि, जब यह कानून 2023 में ही बन चुका था, तो इसे लागू करने में इतना समय क्यों लग रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार जनगणना और परिसीमन का बहाना बनाकर महिलाओं को गुमराह कर रही हैं। आर्य ने मांग की कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों पर ही तत्काल 33% आरक्षण लागू किया जाए और उत्तराखंड के आगामी 2027 के चुनाव में भी महिलाओं को यह अधिकार मिलना चाहिए।
यशपाल आर्य ने सरकारी दावों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा शासित राज्यों में उत्तराखंड महिला अपराधों के मामले में सबसे ऊपर है, ऐसे में सशक्तिकरण की बातें खोखली लगती हैं। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम एक खास राजनीतिक सोच के तहत लाया गया है ताकि केवल श्रेय लिया जा सके। कांग्रेस का रुख स्पष्ट करते हुए उन्होंने इसे आधी आबादी के साथ धोखा बताया।
गरमाया सदन का माहौल
सदन में चर्चा के दौरान उस समय माहौल और गरमा गया जब मुख्यमंत्री धामी ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया और विपक्ष को रावण के अंत की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि जिस तरह रावण का अंत माता सीता के अपमान से हुआ था, वैसे ही नारी शक्ति का अपमान करने वालों का अंत निश्चित है। उन्होंने चारधाम यात्रा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कुछ लोग रील बनाकर यात्रा को बदनाम कर रहे हैं और विपक्ष इसे बढ़ावा दे रहा है। सीएम ने कहा कि कांग्रेस को डर है कि यदि महिलाओं को आरक्षण मिल गया, तो इसका श्रेय मोदी को चला जाएगा, जबकि प्रधानमंत्री यह श्रेय विपक्ष को भी देने को तैयार थे।

विधानसभा के भीतर जहां महिला आरक्षण पर जुबानी तीर चल रहे थे, वहीं सदन के बाहर का नजारा कुछ और ही था। झबरेड़ा से कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाती ने किसानों की समस्याओं को लेकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। वे गन्ने से लदी एक पूरी ट्रॉली लेकर विधानसभा के मुख्य द्वार पर पहुंच गए और देखते ही देखते ट्रॉली को सड़क पर पलट दिया।
चारों तरफ गन्ना फैल गया और अफरा-तफरी मच गई। विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार महिला सशक्तिकरण का ढोंग कर रही है, जबकि किसान अपने बकाये भुगतान के लिए दर-दर भटक रहा है। पुलिस ने भारी मशक्कत के बाद स्थिति को संभाला, लेकिन इस प्रदर्शन ने सरकार की घेराबंदी को और कड़ा कर दिया।
हंगामे की भेंट चढ़ा विशेष सत्र
उत्तराखंड विधानसभा का यह विशेष सत्र बिना किसी ठोस नतीजे के हंगामे की भेंट चढ़ता दिखा। सत्ता पक्ष जहां इसे मातृशक्ति के लिए एक संकल्प की तरह पेश कर रहा है, वहीं विपक्ष इसे 2029 का सपना बताकर खारिज कर रहा है। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि 11 वर्षों में जेंडर बजट पांच गुना बढ़ा है और बेटियों के लिए 5 लाख करोड़ का प्रावधान है, लेकिन विपक्ष के सवाल अब भी कायम हैं कि आरक्षण असल में जमीन पर कब उतरेगा। कुल मिलाकर, देवभूमि के इस सदन में आज नारी शक्ति के नाम पर सत्ता और विपक्ष के बीच की वैचारिक खाई और गहरी होती नजर आई।
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