सुशासन की ओर उत्तराखंड का बड़ा कदम, अब लोक भवन में दिखेगी देवभूमि की विरासत

  • राज्यपाल गुरमीत सिंह और  CM धामी ने किया शिलान्यास 

देहरादून। उत्तराखंड की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और अधिक सुव्यवस्थित और आधुनिक बनाने की दिशा में गुरुवार को एक बड़ा कदम उठाया गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संयुक्त रूप से लोक भवन परिसर में बहुउद्देशीय भवनों का शिलान्यास किया।

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विस्तृत रूपरेखा तैयार

यह परियोजना न केवल प्रशासनिक सुगमता को बढ़ाएगी, बल्कि देवभूमि की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत करेगी। इन भवनों की सबसे बड़ी विशेषता इनका डिजाइन है, जो पूरी तरह से पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला पर आधारित होगा। इस शिलान्यास के साथ ही राजभवन और लोक भवन परिसर में सुविधाओं के एक नए युग की शुरुआत हो गई है, जहां आधुनिक तकनीक और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

CM DHAMI

शिलान्यास समारोह के दौरान इस परियोजना की विस्तृत रूपरेखा साझा की गई, जिसके तहत लोक भवन परिसर में चार अलग-अलग भवनों का निर्माण किया जाना है। इन भवनों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि परिसर के भीतर ही विभिन्न आवश्यक सेवाएं एक छत के नीचे उपलब्ध हो सकें। योजना के अनुसार, प्रथम भवन में एक समेकित डिस्पेंसरी बनाई जाएगी, जो स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होगी।

पहाड़ी शैली में बने भवन

इस डिस्पेंसरी की खासियत यह होगी कि यहां एक ही स्थान पर आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और एलोपैथिक चिकित्सा की सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे मरीजों को अलग-अलग पद्धतियों के उपचार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। परिसर के दूसरे भवन को सूचना परिसर और कैफेटेरिया के रूप में विकसित किया जाएगा, जो सूचनाओं के आदान-प्रदान और आगंतुकों की सुविधाओं के लिए केंद्र बनेगा। वहीं, तीसरे भवन में लोक निर्माण विभाग का कार्यालय और चतुर्थ भवन में उद्यान विभाग का कार्यालय स्थापित किया जाएगा।

इन सभी भवनों के निर्माण में इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि वे उत्तराखंड की पारंपरिक वास्तुकला को प्रतिबिंबित करें। पारंपरिक पहाड़ी शैली में बनने वाले ये भवन न केवल देखने में विशिष्ट होंगे, बल्कि इससे राज्य की स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को भी नई मजबूती मिलेगी। स्थानीय पत्थरों, लकड़ी के काम और विशिष्ट नक्काशी के उपयोग से ये भवन देवभूमि की कलात्मक विरासत का प्रदर्शन करेंगे।

परियोजना की महत्ता पर प्रकाश

इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में परियोजना की दूरगामी महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन नवीन भवनों के निर्माण से लोक भवन परिसर में विभिन्न महत्वपूर्ण सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगी। इससे पूरी कार्यप्रणाली अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी बनेगी।

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राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि, इस पहल से न केवल वहां कार्यरत कर्मचारियों को काम करने का बेहतर वातावरण मिलेगा, बल्कि आम जनता को भी त्वरित और बेहतर सेवाएं प्राप्त होंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समेकित सुविधाओं के इस मॉडल से समय और सरकारी संसाधनों की भारी बचत होगी और प्रशासनिक कार्यों में दक्षता आएगी। राज्यपाल ने विशेष रूप से आधुनिक तकनीक के साथ प्रदेश की पारंपरिक विरासत के समन्वय की सराहना की।

कारीगरों को मिलेगा प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस परियोजना को सुशासन की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक भवन परिसर में विकसित की जा रही यह बहुउद्देशीय अवसंरचना सेवा प्रदान करने की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

उन्होंने कहा कि जब विभिन्न विभाग एक ही परिसर में कार्य करेंगे, तो उनके बीच प्रशासनिक समन्वय बेहतर होगा, जिससे जटिल फाइलों और कार्यों का निपटारा गुणवत्तापूर्ण और तेज गति से हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने पहाड़ी वास्तुकला के चयन पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे स्थानीय संसाधनों और कारीगरों को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी

समारोह में सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन, विधि परामर्शी कौशल किशोर शुक्ल और सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. नितिन उपाध्याय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं ने भवनों के तकनीकी पहलुओं और निर्माण की समय-सीमा के बारे में जानकारी दी।

अधिशासी अभियंता नीरज त्रिपाठी और उनकी टीम ने बताया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा। अंततः, यह परियोजना उत्तराखंड में ‘पहाड़ की पहचान’ को सरकारी निर्माणों में शामिल करने की एक मिसाल पेश करेगी, जिससे प्रशासनिक ढांचा सशक्त होने के साथ-साथ राज्य की मौलिक सुंदरता भी बरकरार रहेगी।

 

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