दुधवा नेशनल पार्क में हृदय विदारक घटना, बेकाबू ‘विनायक’ ने अपने ही सेवक को कुचलकर मार डाला

लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में स्थित विश्व प्रसिद्ध दुधवा नेशनल पार्क की शांति बुधवार को एक ऐसी हृदयविदारक घटना से भंग हो गई, जिसने वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है। दशकों से जंगल की सुरक्षा और गश्त का स्तंभ माने जाने वाले पालतू हाथियों में से एक, विनायक ने अचानक ऐसा हिंसक रूप अख्तियार कर लिया और अपनी ही देखभाल करने वाले कर्मचारी को मौत के घाट उतार दिया।

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वर्षों से हाथी की सेवा कर रहे थे रामविलास

यह घटना उस समय हुई जब दिन भर की थकान के बाद हाथी को आराम और स्नान के लिए ले जाया जा रहा था। किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि, सालों से जिस महावत और कर्मचारी की आवाज पर यह विशालकाय जीव सिर झुकाता था, वही आज उसके क्रोध का निशाना बन जाएगा। इस दुखद हादसे ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि वन्यजीवों के व्यवहार और उनके प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Dudhwa National Park A

बुधवार की वह दोपहर दुधवा के राइनो पुनर्वास क्षेत्र (राइनो एरिया) में अन्य दिनों की तरह ही सामान्य प्रतीत हो रही थी। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी राम विलास (52) अपने दैनिक कार्यों को पूरा कर चुके थे। राम विलास दुधवा टाइगर रिजर्व के उन अनुभवी कर्मचारियों में गिने जाते थे, जिन्हें कैंप हाथियों की देखभाल और उनकी दिनचर्या का गहरा ज्ञान था। विनायक नामक कैंप हाथी, जो लंबे समय से पार्क की गश्त और निगरानी कार्यों का हिस्सा रहा है, को राम विलास नियमित निगरानी के बाद चारे और पानी के लिए ले जा रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों और विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, राम विलास हाथी को पास के ही एक तालाब की ओर नहलाने के लिए ले जा रहे थे, तभी अचानक, बिना किसी स्पष्ट उकसावे के, हाथी विनायक के व्यवहार में एक डरावना बदलाव आया। उसने अचानक चिंघाड़ते हुए राम विलास पर हमला कर दिया। हाथी की ताकत के आगे निहत्थे कर्मचारी के पास संभलने का कोई मौका नहीं था।

जंगल में दहशत

विनायक ने अपनी सूंड और पैरों का इस्तेमाल कर राम विलास को बुरी तरह कुचल दिया। घटनास्थल पर मौजूद अन्य कर्मचारी जब तक कुछ समझ पाते और बीच-बचाव की कोशिश करते, तब तक राम विलास गंभीर रूप से घायल हो चुके थे। जंगल के सन्नाटे में राम विलास की चीखें दब गईं और मौके पर दहशत फैल गई।

हादसे के तुरंत बाद वन विभाग के अन्य सुरक्षाकर्मी और अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने भारी मशक्कत के बाद उत्तेजित हाथी को नियंत्रित किया और घायल राम विलास को वहां से बाहर निकाला। उनकी हालत अत्यंत चिंताजनक थी, शरीर के कई हिस्सों में गंभीर फ्रैक्चर और आंतरिक चोटें आई थीं।

विभाग ने बिना समय गंवाए उन्हें पास के पलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया, जहां उपचार के दौरान राम विलास ने दम तोड़ दिया। उनकी मृत्यु की खबर मिलते ही दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्यालय में मातम छा गया। वन विभाग के छोटे-बड़े कर्मचारी अपने साथी की इस तरह हुई मौत से स्तब्ध रह गए।

रेस्ट्रिक्टेड जोन घोषित हुआ कैंप एरिया

दुधवा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक डॉ. एच. राजमोहन ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि, यह विभाग के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राम विलास एक समर्पित कर्मचारी थे जो वर्षों से हाथियों की सेवा में लगे थे। हाथी के इस तरह के अप्रत्याशित व्यवहार ने विशेषज्ञों को भी चिंता में डाल दिया है। अधिकारी ने बताया कि मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया गया है और विभाग की ओर से उनके परिजनों को नियमानुसार हर संभव वित्तीय सहायता और सांत्वना दी जा रही है।

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इस भयावह घटना के बाद दुधवा नेशनल पार्क प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर कुछ कड़े और बड़े फैसले लिए हैं। क्षेत्र निदेशक डॉ. एच. राजमोहन ने स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि अब से पर्यटकों को कैंप हाथियों के करीब जाने की बिल्कुल भी अनुमति नहीं दी जाएगी। पूर्व में पर्यटक हाथियों को करीब से देखने या उनके साथ फोटो खिंचवाने की इच्छा रखते थे, लेकिन विनायक के इस हमले ने साबित कर दिया है कि वन्यजीव चाहे कितने भी प्रशिक्षित क्यों न हों, उनकी प्रकृति को पूरी तरह से नियंत्रित नहीं किया जा सकता। अब हाथियों के कैंप एरिया को रेस्ट्रिक्टेड जोन घोषित कर दिया गया है, जहां केवल अधिकृत कर्मचारी ही प्रवेश कर सकेंगे।

सुरक्षित घेरे में रखे गए हाथी

राम विलास की मौत ने दुधवा के कर्मचारियों के बीच एक खालीपन पैदा कर दिया है। उनके साथी बताते हैं कि राम विलास हाथियों से बच्चों की तरह प्यार करते थे। वह अक्सर कहते थे कि ये बेजुबान जानवर इंसान से ज्यादा वफादार होते हैं, लेकिन नियति का क्रूर मजाक देखिए कि उन्हें उसी जीव के हाथों अपनी जान गंवानी पड़ी जिसकी सेवा में उन्होंने अपना जीवन लगा दिया। फिलहाल विनायक को अन्य हाथियों से अलग एक सुरक्षित घेरे में रखा गया है और उस पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है।

 

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