Thursday , May 26 2022

साहित्य

कश्मीर में जगमोहन की विरासत को उन हालातों ने दागदार बनाया जो उनके वश में नहीं थे

दोबारा अपनी नियुक्ति के बाद, 19 जनवरी 1990 को, जगमोहन (Jagmohan) बतौर राज्यपाल जम्मू (Jammu) के राज भवन में थे. इसी शाम, राजभवन के लैंडलाइन फोन पर कश्मीर (Kashmir) से कई कॉल आने लगे. ये कॉल कश्मीर पंडितों के थे, घबराए हुए कश्मीरी पंडित खुद को बचाने के लिए राज्यपाल …

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‘रलिव गलिव चलिव’… जब भारतीय महिलाओं को गुलाम बना कर कश्मीर को Pak बनाना चाहते थे आतंकी, अब्दुल्ला-कॉन्ग्रेस की थी सरकार

“असि गछि पाकिस्तान, बटव रोअस त बटनेव सान” – मतलब “हमें पाकिस्तान चाहिए और हिंदू महिलाएँ भी लेकिन अपने मर्दों के बग़ैर।” ये उन नारों में से एक है जो 90 के दशक में कश्मीर घाटी में गूँज रहा था। ये वो दौर था जब रोज़ घाटी के मस्जिदों से …

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फिल्म द कश्मीर फाइल्स, इस्लाम, जिहादियत और हिन्दू

डॉ. मयंक चतुर्वेदी जब आप अपने को ही श्रेष्ठ मान बैठते हैं, जब आप अपने पंथ को ही सर्वोच्च मानने लगते हैं और जब आप अपने सिवा किसी और का अस्तित्व भी स्वीकार्य नहीं करना चाहते, तब सामूहिक तौर पर पंथ के आधार पर नरसंहार का वीभत्स दौर शुरू होता …

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जेएनयू की कुलपति और कपिल देव की अंग्रेजी पर सवाल करने वाले कौन

अपने देश में ऐसा तथाकथित प्रगतिशील बुद्धिजीवी तबका उभरा है, जो मानता है कि मात्र वही पढ़ा-लिखा और शिक्षित है जिसका अंग्रेजी ज्ञान शेक्सपियर के नाटकों के पात्र जैसा क्लिष्ट होता है। ये आजाद भारत में रहते हुए गुलाम मानसिकता से अपने को बाहर निकाल पाने में असमर्थ हैं। यह …

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उनके साथ सिर्फ बेहूदा बर्ताव नहीं किया बल्कि …, पढ़िए जयललिता के अपमान की वह कहानी, जिसने…

‘एमजीआर नहीं रहे.’ उनके लिए यह भौंचक कर देने वाली खबर थी. एक बड़ा धक्का था. वे उन्हें बीच मझधार में छोड़कर चले गए थे. उन्होंने हड़बड़ी में तुरंत ड्रा्इवर को बुलाया और मरुदुर गोपालन रामचंद्रन (MGR) के घर ‘रामवरम गार्डन’ के लिए निकल पड़ीं. लेकिन जैसे ही वे वहां …

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धार्मिक असहिष्णुता के उदय को देख रहा पंजाब! जो इतिहास में प्रदेश को ले जा चुका है बर्बादी की ओर

1980-90 के दशक में भारत के सबसे हिंसक विद्रोहों में से एक खालिस्तान आंदोलन, जिसने 21 हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली। लेकिन इसके तीन दशक बाद फिर से पिछले एक साल से खालिस्तान आंदोलन के जीवत होने की खबरें विभिन्न तरह से सामने आती रहीं। पंजाब में …

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कई गांव ऐसे, जहां नेताओं ने नहीं दिखाई शक्ल, पर हमेशा पड़ा वोट; मूलभूत सुविधाएं तक भी नहीं

चुनाव में प्रत्याशी मतदाताओं के घर-घर जाकर दस्तक देते हैं और तरह-तरह के सपने दिखाकर वोट लेते हैं। लेकिन, उत्तरकाशी जिले के पुरोला क्षेत्र में 15 से अधिक गांव ऐसे हैं, जहां न तो प्रत्याशी आज तक वोट मांगने के लिए गए और न विधायक बनने के बाद आभार जताने …

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चुनावों में क्रांतिकारी बदलाव का स्वागत : मौलिक भारत

दिल्ली। देश के चुनावों के इतिहास को चुनाव आयोग बदलने जा रहा है। मौलिक भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुज अग्रवाल के अनुसार जिन चुनाव सुधारों का आग़ाज़ एक समय में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन ने किया था उसके बाद वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा उस दिशा में …

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आरोप लगाने वाले जरा RSS का इतिहास पढ़ लें तो राष्ट्रभक्ति से उनका भी परिचय हो जायेगा

आजादी के बाद से ही कांग्रेस के निशाने पर रहा है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। लाख प्रयासों के बावजूद कांग्रेस संघ को समाप्त करना तो दूर हाशिये पर लाने में सफल नहीं हुई। संघ को खत्म करने के चक्कर में खुद कांग्रेस अपना वजूद समाप्त करने की ओर अग्रसर है। बापू …

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अटल सुशासन को साकार करती मोदी सरकार

आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी अटल बिहारी वाजपेयी की 97वीं जयंती है।भारतीय राजनीति के अजातशत्रु कहे जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी आजाद भारत के उन गिने चुने नेताओं में से एक थे जिनका जुड़ाव सीधे लोगों के दिलों से था अटल बिहारी वाजपेयी ने दुनिया को दिखाया …

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हिन्दुओं पर आज भी वही प्रहार कर रहे, जिन्होंने देश को बांटने का कार्य किया : प्रो. राकेश सिन्हा

देश के जाने माने विचारक प्रो. राकेश सिन्हा ने कहा कि भारतीय राष्ट्रवाद का मूल आधार सांस्कृतिक राष्ट्रवाद है, जिसका दूसरा नाम हिंदुत्ववाद है। हिन्दू हमारी मौलिक पहचान है जबकि हिंदुत्व, हिन्दू होने और हिन्दुओं के वैशिष्ट्य के प्रति जागरुकता का नाम है। प्रो. सिन्हा रविवार को सिगरा स्थित डॉ …

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इतिहास के पन्नों में: 02 दिसंबर

ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को दर्शाने वाला स्मारक गेटवे ऑफ इंडिया का निर्माण इंग्लैंड के राजा जॉर्ज पंचम के भारत आगमन के उपलक्ष्य में कराया गया था। यही स्मारक आगे चलकर 1947 में इस बात का भी गवाह बना कि भारत में ब्रितानी साम्राज्य का सूरज हमेशा के लिए डूब चुका …

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किसान महापंचायत : किसानों में आंदोलन को आगे बढ़ाने के प्रति नहीं दिखा उत्साह

 किसानों की महापंचायत के लिए सुबह से किसान जुटने लगे लेकिन किसानों में कोई उत्साह नहीं दिख रहा। इको गार्डेन में जुटे किसानों की महापंचायत शुरू हो गयी है। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि कृषि कानूनों की वापसी तो ठीक है, मगर एमएसपी गारंटी कानून लागू होने पर …

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सलमान खुर्शीद कब तक उगलेंगे हिन्दुत्व पर जहर

आर.के. सिन्हा सलमान खुर्शीद को वैसे तो खबरों में बने रहना आता है। पिछले काफी समय से वे खबरों की दुनिया से बाहर थे। उन्हें कोई पूछ नहीं रहा था। वे और उनकी पत्नी लुईस खुर्शीद चुनावों में तो बार-बार शिकस्त खाते ही रहते हैं। इसलिए उन्हें लगा कि क्यों …

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नेताओं के बेलगाम बयान

डॉ. वेदप्रताप वैदिक आजकल टीवी चैनलों और अखबारों में कांग्रेस के सलमान खुर्शीद, समाजवादी पार्टी के अखिलेश और अभिनेत्री कंगना राउत के बयानों को लेकर काफी कहासुनी चल रही है। इन तीनों व्यक्तियों के बयान भारत के आधुनिक इतिहास से संबंधित हैं। इन तीनों में से कोई भी इतिहासकार नहीं …

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आदि उत्सव में गूंजीं दुर्लभ वाद्य यंत्रों की धुनें

लखनऊ। पारंपरिक वेषभूषाओं में सजेधजे जनजातीय कलाकारों ने विलुप्त प्राय वाद्य यंत्रों की सुमधुर प्रस्तुतियों से आनंदित कर दिया। संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के लोक एवं जनजाति कला- संस्कृति संस्थान की ओर से विश्व आदिवासी दिवस पर आदि उत्सव का आयोजन हुआ। जिसमें सोनभद्र के 21 कलाकारों ने 21 दुर्लभ …

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नानाराव की महिला सैनिक ने ‘बीबीघर’ में कराया था सैकड़ों अंग्रेजों का कत्ल, हिला दी थी ब्रिटिश हुकूमत

अगस्त माह में स्वतंत्रता दिवस की याद में पूरा देश स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर रहा है। ऐसे में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के कानपुर के नायकों को कैसे भूला जा सकता है, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत की कानपुर में चूले हिला दी थीं। हां हम बात कर रहे हैं कानपुर के …

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पश्चिम बंगाल को लेकर उठने लगे है कई बड़े सवाल, बन रहा है अपराधियों का पनागाह..???

कोलकाता। पश्चिम बंगाल दुनियाभर के अपराधियों के छिपने का सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है??? राजधानी कोलकाता से सटे न्यूटाउन के शापूरजी में पंजाब के दो कुख्यात गैंगस्टरों जयपाल भुल्लर और जसप्रीत सिंह जस्सी को मुठभेड़ में मार गिराने के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है। कोलकाता …

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भगत सिंह फिर जन्मे, मगर पड़ोस के घर में !

देश बनता है राष्ट्रनायकों के उत्सर्ग से। संघर्षशील इस्राइल इस तथ्य का जीवंत प्रमाण है। आठ अरब देशों, सभी शत्रु, की 42 करोड़ आबादी का मुकाबला सात दशकों से 90 लाख जनसंख्यावाला इस्राइल अकेला कर रहा है। तीन युद्ध लड़ा और सभी जीता भी। इस्राइल में हर 18 वर्ष से …

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विषम परिस्थितियों में बेहतरीन बजट, देश की दशा व दिशा के लिए मील का पत्थर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तीय वर्ष २०२१-२२ के लिए संसद में जो बजट प्रस्तुत किया, वह बेहद विषम परिस्थितियों में देश की दशा एवं दिशा को सुधारने एवं अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। विपक्ष को छोड़कर देश के सभी क्षेत्र …

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