आमिर खान का बड़ा खुलासा, बोले- गौरी से मिलने का बाद लगा तलाश पूरी हो गई, लेकिन इस बात का है पछतावा

बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट यानी आमिर खान अपनी फिल्मों में जितना बारीकी और संजीदगी के लिए जाने जाते हैं, असल जिंदगी में भी वह उतने ही पारदर्शी और भावुक इंसान हैं। अक्सर अपनी निजी जिंदगी को पर्दे के पीछे रखने वाले आमिर खान इन दिनों अपनी खुशियों और पुराने जख्मों को लेकर काफी मुखर नजर आ रहे हैं। पिछले कुछ समय से आमिर की निजी जिंदगी, उनके रिश्तों के टूटने और फिर से प्यार मिलने की खबरें गलियारों में तैर रही थीं, लेकिन अब खुद सुपरस्टार ने इन सभी कयासों पर विराम लगाते हुए अपनी दिल की बात दुनिया के सामने रख दी है।

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भावनाओं का खोला पिटारा 

आमिर खान ने न केवल अपनी वर्तमान पार्टनर गौरी स्प्रैट के साथ अपने रिश्तों पर खुलकर बात की, बल्कि अपनी पिछली दो शादियों की विफलता और अपने जीवन के सबसे बड़े पछतावे को भी बिना किसी हिचकिचाहट के स्वीकार किया है।

Aamir Khan Gauri Sproat

हाल ही एक बातचीत में एक्टर ने अपनी भावनाओं का वह पिटारा खोला, जिसे उन्होंने दशकों से बंद रखा था। आमिर ने बड़े ही दार्शनिक अंदाज में बताया कि, आज उनके दिल की क्या हालत है और वह खुद को किस मोड़ पर खड़ा पाते हैं। अभिनेता ने अपनी पार्टनर गौरी स्प्रैट के साथ अपने वर्तमान रिश्ते को लेकर जो सुकून जाहिर किया, वह उनके प्रशंसकों के लिए काफी सुखद है।

आमिर ने बताया कि, वह अपनी जिंदगी के इस पड़ाव पर गौरी के होने के लिए ईश्वर के प्रति बहुत शुक्रगुजार महसूस करते हैं। उनके शब्दों में एक ऐसा ठहराव था जो अक्सर एक लंबी तलाश के बाद हासिल होता है। उन्होंने कहा कि, गौरी के आने से न केवल उनके जीवन में रौनक आई है, बल्कि उन्हें एक ऐसी मानसिक शांति मिली है जिसकी उन्हें शायद हमेशा से तलाश थी।

पूर्व पत्नियों का भी किया जिक्र

अपने रिश्तों के इतिहास को खंगालते हुए आमिर ने अपनी पूर्व पत्नियों रीना दत्ता और किरण राव का भी जिक्र किया। उन्होंने बहुत ही शालीनता से स्वीकार किया कि रीना और किरण दोनों के ही साथ उनके रिश्ते बहुत गहरे और भावनात्मक थे। उन्होंने माना कि उन रिश्तों में प्यार और सम्मान की कोई कमी नहीं थी, लेकिन इसके बावजूद समय के साथ चीजें उस तरह से नहीं चलीं जैसी उन्होंने उम्मीद की थी।

आमिर ने कहा कि जब रिश्ते ठीक नहीं रहते, तो उसे स्वीकार करना ही समझदारी होती है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि गौरी के साथ अब उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे उनकी तलाश खत्म हो गई है और वह पूरी तरह से “मुकम्मल” हो गए हैं। यह ‘मुकम्मल’ होना केवल किसी साथी का मिलना भर नहीं है, बल्कि खुद के भीतर एक पूर्णता महसूस करना है, जो आमिर के चेहरे पर साफ देखी जा सकती है।

बातचीत के दौरान आमिर ने केवल अपनी खुशियों का बखान नहीं किया, बल्कि अपनी पर्सनल ग्रोथ और एक इंसान के तौर पर अपनी कमियों पर भी बहुत बेबाकी से चर्चा की। उन्होंने एक ऐसा पक्ष सामने रखा जो आमतौर पर बड़े पर्दे के सितारों में कम ही देखने को मिलता है। आमिर ने माना कि अपनी गलतियों को स्वीकार करना ही उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता है। उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में कहा कि कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता और वह खुद को भी इससे अलग नहीं मानते।

गलतियां भी स्वीकारी

आमिर के अनुसार, अगर आप अपनी गलती समझकर उसे मान लेते हैं, तो इससे आप छोटे नहीं होते बल्कि एक बेहतर इंसान बनने की दिशा में कदम बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी गलतियों से लगातार सीख रहे हैं और उनकी कोशिश यही रहती है कि जो भूल पहले हुई, उसे दोहराया न जाए। एक अभिनेता के साथ-साथ एक संवेदनशील इंसान के रूप में विकसित होने की यह प्रक्रिया आमिर के लिए काफी महत्वपूर्ण रही है।

अपनी ईमानदारी को आगे बढ़ाते हुए आमिर ने उस सबसे बड़े पछतावे के बारे में भी बात की, जो आज भी उनके मन में कहीं न कहीं टीस पैदा करता है। उन्होंने बड़े ही साफ दिल से स्वीकार किया कि उनके जीवन की सबसे बड़ी गलती अपने काम को परिवार और करीबियों से ऊपर रखना रही। आमिर ने बताया कि पिछले 30-35 सालों से वह केवल काम, फिल्ममेकिंग और एक्टिंग के जुनून में इस कदर खोए हुए थे कि उन्हें अपने निजी रिश्तों की अहमियत का समय रहते अंदाजा नहीं हुआ। उन्होंने दशकों तक अपने परिवार और बच्चों को वह समय नहीं दिया जिसके वे हकदार थे। आमिर के लिए काम उनकी इबादत थी, लेकिन इसी इबादत के चक्कर में वे अपने करीबियों से दूर होते गए।

लॉकडाउन में हुआ गलती का एहसास 

इस आत्ममंथन का मौका उन्हें COVID-19 महामारी के दौरान मिला। आमिर ने बताया कि जब लॉकडाउन के कारण पूरी दुनिया थम गई थी और वह काम नहीं कर पा रहे थे, तब उन्हें अपनी जिंदगी को एक नए नजरिए से देखने का समय मिला। उस एकांत में उन्हें इस कड़वे सच का एहसास हुआ कि काम के पीछे भागते-भागते उन्होंने बहुत कुछ कीमती खो दिया है। उन्होंने महसूस किया कि वह वक्त जो उन्हें अपने बच्चों के साथ, अपने माता-पिता के साथ और अपने रिश्तों में बिताना चाहिए था, वह अब कभी वापस नहीं आएगा। यह अहसास उनके लिए किसी झटके से कम नहीं था, लेकिन यही वह मोड़ था जहां से उन्होंने खुद को सुधारना शुरू किया।

 

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