सुशांत सिंह राजपूत केस: कोर्ट ने एनसीबी को धोया, रिया को दी ये बड़ी राहत

भारतीय सिनेमा के इतिहास के सबसे चर्चित और रहस्यमयी मामलों में से एक, सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले से जुड़े ड्रग्स केस में एक नया और बेहद महत्वपूर्ण मोड़ आया है। अभिनेता की मृत्यु के छह साल बीत जाने के बाद भी जहां एक ओर उनकी मौत की गुत्थी अनसुलझी बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर इस मामले की मुख्य आरोपी रहीं अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को न्यायपालिका से एक बहुत बड़ी राहत मिली है।

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अनफ्रीज होंगे बैंक  खाते

मुंबई की एक विशेष एनडीपीएस अदालत ने रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक चक्रवर्ती के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनके उन बैंक खातों को तुरंत अनफ्रीज करने का आदेश दिया है, जिन्हें साल 2020 में जांच के शुरुआती दौर में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने सीज कर दिया था। यह फैसला न केवल रिया के लिए एक बड़ी वित्तीय राहत है, बल्कि यह उस जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है जिसे लेकर पिछले कई वर्षों से बहस छिड़ी हुई है।

Sushant Singh Rajput Case

इस पूरे कानूनी घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब रिया चक्रवर्ती और शौविक के वकीलों, अयाज खान और जेहरा चरानिया ने अदालत में एक विशेष याचिका दायर की। इस याचिका में यह दलील दी गई कि उनके मुवक्किलों के बैंक खातों को पिछले छह वर्षों से बिना किसी ठोस कानूनी आधार के फ्रीज करके रखा गया है। वकीलों ने अदालत के सामने विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि एनसीबी ने जांच के दौरान उन अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जो एनडीपीएस एक्ट 1985 के तहत निर्धारित की गई हैं।

वकीलों ने दी ये दलील

विशेष रूप से सेक्शन 68F का हवाला देते हुए बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि, किसी भी व्यक्ति की संपत्ति या बैंक खाते को फ्रीज करने के लिए एक निश्चित समय सीमा के भीतर सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी लेना अनिवार्य होता है। वकील अयाज खान ने कोर्ट को बताया कि एनसीबी इस निर्धारित समय सीमा के भीतर जरूरी मंजूरी प्राप्त करने में पूरी तरह विफल रही, जिसके कारण यह पूरी कार्रवाई न केवल दोषपूर्ण बल्कि कानूनी रूप से अवैध और गैर-कानूनी हो जाती है।

दूसरी ओर, इस याचिका का सरकारी पक्ष और एनसीबी के वकीलों ने कड़ा विरोध किया। सरकारी वकील ने अदालत के समक्ष रिया चक्रवर्ती के उन पुराने बयानों को ढाल बनाया जो उन्होंने जांच के दौरान दर्ज कराए थे। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि, रिया ने खुद को एक ड्रग सिंडिकेट का सक्रिय सदस्य बताया था और ड्रग पेडलर्स के साथ उनके संपर्कों की बात भी स्वीकार की थी।

एनसीबी की कार्यशैली पर नाराजगी

सरकारी पक्ष की दलील यह थी कि, जांच अधिकारियों के पास खातों को फ्रीज करने के लिए पर्याप्त और वैध कारण मौजूद थे क्योंकि इन खातों से होने वाले लेन-देन का सीधा संबंध संदिग्ध गतिविधियों से पाया गया था। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए इन खातों पर पाबंदी जारी रखी जानी चाहिए ताकि कानून की प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।

हालांकि, दोनों पक्षों की लंबी और तीखी बहस सुनने के बाद विशेष अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को अपर्याप्त माना और एनसीबी की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि कानून की प्रक्रियाओं की अनदेखी को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि एनडीपीएस एक्ट के तहत किसी के खातों को फ्रीज करने के लिए जिस तरह की प्रशासनिक और कानूनी पुष्टि की आवश्यकता होती है, वह इस मामले में नदारद थी।

कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि एनसीबी समय सीमा के भीतर सही आदेश प्राप्त करने में विफल रही और बिना किसी आधिकारिक पुख्ता आदेश के किसी व्यक्ति के निजी बैंक खातों को इतने लंबे समय तक रोक कर रखना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इसी आधार पर अदालत ने एजेंसी को निर्देश दिया कि रिया और शौविक के खातों पर लगी पाबंदी को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए।

क्या था मामला

यह मामला साल 2020 के उस दौर की याद दिलाता है जब सुशांत सिंह राजपूत की अचानक हुई मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। उस दौरान रिया चक्रवर्ती को न केवल मीडिया ट्रायल का सामना करना पड़ा था, बल्कि उन्हें ‘ड्रग्‍स की खरीद-फरोख्त’ और सुशांत को ड्रग्स उपलब्ध कराने के आरोपों के चलते गिरफ्तार भी किया गया था।

Sushant Singh Rajput Case

रिया को करीब 28 दिन मुंबई की भायखला जेल में बिताने पड़े थे, जिसके बाद उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। उस समय एनसीबी ने इसे बॉलीवुड के एक बड़े ड्रग नेक्सस के रूप में पेश किया था और कई मशहूर हस्तियों से पूछताछ की थी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, इस मामले में एनसीबी की चार्जशीट और गवाहों के बयानों की मजबूती पर सवाल उठने लगे।

पिछले छह वर्षों में रिया चक्रवर्ती के लिए जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है। उनके बैंक खाते फ्रीज होने के कारण उन्हें न केवल अपने दैनिक खर्चों बल्कि अपनी कानूनी लड़ाई के खर्चों को उठाने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। उनके वकीलों ने अदालत में यह भी बताया कि रिया ने हमेशा जांच में सहयोग किया है और वे बार-बार पेशी पर आती रही हैं, लेकिन उनके संसाधनों को इतने वर्षों तक ब्लॉक रखना एक तरह की मानसिक और वित्तीय प्रताड़ना जैसा था। कोर्ट के इस ताजा फैसले को रिया की टीम एक नैतिक जीत के रूप में देख रही है, क्योंकि यह साबित करता है कि जांच एजेंसी ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उचित कानूनी प्रोटोकॉल को दरकिनार किया था।

 

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