
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के गलियारों में इस समय संजय दत्त की फिल्म ‘आखिरी सवाल’ की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है। इस फिल्म ने रिलीज से पहले ही राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में जबर्दस्त हलचल पैदा कर दी है। दरअसल, मेकर्स ने आज फिल्म का एक नया प्रोमो जारी किया है, जिसने इतिहास के पन्नों को एक बार फिर पलट कर रख दिया है।
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शुरू हुई नई कंट्रोवर्सी
यह प्रोमो एक ऐसा सवाल पूछता है जो दशकों से भारतीय राजनीति और न्यायपालिका के केंद्र में रहा है… 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में आखिर क्या हुआ था? यह सवाल न केवल चुभता हुआ है, बल्कि उन घावों को भी कुरेदता है, जिन्हें समय की धूल ने ढकने की कोशिश की थी। इस नए प्रोमो के आते ही सोशल मीडिया से लेकर गलियों तक एक नई कंट्रोवर्सी ने जन्म ले लिया है।

फिल्म ‘आखिरी सवाल’ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि, यह सीधे तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास और उससे जुड़ी विवादित घटनाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई है। फिल्म के इस नए प्रोमो ने उन लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं, जो इतिहास के कुछ खास अध्यायों पर बात करने से बचते रहे हैं।
यह प्रोमो बाबरी मस्जिद विध्वंस वाले दिन की उन परतों को खोलने का दावा करता है, जो अब तक आम जनमानस की नजरों से ओझल रही हैं। फिल्म केवल 1992 की घटना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह उन गंभीर आरोपों और सवालों की एक लंबी फेहरिस्त पेश करती है जो समय-समय पर संघ पर लगते रहे हैं। फिल्म का टीजर पहले ही गांधी जी की हत्या में संघ की भूमिका और आपातकाल के दौरान संगठन की गतिविधियों जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठा चुका है।
समीरा रेड्डी ने किए खुलासे
इस फिल्म के जरिए लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रही अभिनेत्री समीरा रेड्डी ने भी अपने किरदार और फिल्म की कहानी को लेकर बड़े खुलासे किए हैं। समीरा का कहना है कि, उन्होंने वापसी के लिए किसी आसान या सेफ विषय को नहीं चुना, बल्कि ‘आखिरी सवाल’ जैसी चुनौतीपूर्ण फिल्म का हिस्सा बनना बेहतर समझा।
अभिनेत्री ने स्वीकार किया कि, इस फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ने से पहले आरएसएस को लेकर उनकी जानकारी आधी-अधूरी थी, लेकिन शोध और पटकथा के माध्यम से उन्हें कई ऐसी सच्चाइयों का पता चला जो सामान्य धारणा से बिल्कुल अलग थीं। उनका मानना है कि यह फिल्म किसी को सहज महसूस कराने के लिए नहीं, बल्कि इतिहास के उन सवालों का सामना करने के लिए बनाई गई है जो जरूरी हैं।
फिल्म का निर्देशन नेशनल अवॉर्ड विजेता अभिजीत मोहन वारंग ने किया है, जो अपनी बारीकियों और यथार्थवादी चित्रण के लिए जाने जाते हैं। फिल्म के निर्माण की कमान खुद संजय दत्त और निखिल नंदा ने संभाली है, जिससे यह साफ होता है कि इस प्रोजेक्ट के पीछे कितनी बड़ी सोच काम कर रही है।
करीब आ रही रिलीज डेट
उत्कर्ष नैथानी द्वारा लिखे गए संवाद और स्क्रीनप्ले प्रोमो में ही अपना असर दिखाते नजर आ रहे हैं। फिल्म में 1934 की वह ऐतिहासिक मुलाकात भी दिखाई जाएगी जब महात्मा गांधी और डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के बीच बातचीत हुई थी। यह फिल्म केवल विवाद पैदा करने के लिए नहीं, बल्कि उन ऐतिहासिक कड़ियों को जोड़ने का प्रयास करती दिख रही है जो आज के भारत की बुनियाद को समझने के लिए अनिवार्य हैं।

जैसे-जैसे फिल्म की रिलीज डेट करीब आ रही है, इसे लेकर देश में ध्रुवीकरण की स्थिति भी देखी जा रही है। एक पक्ष इसे इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में देखने का जरिया मान रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे विवादास्पद और संवेदनशील बता रहा है। संजय दत्त ने भी सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट के जरिए यह स्पष्ट किया है कि ‘आखिरी सवाल’ उन तमाम अनकहे पहलुओं को उजागर करेगी जिन्हें अब तक दबाया गया था।
यह फिल्म 8 मई 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। अब देखना यह होगा कि जब यह फिल्म बड़े पर्दे पर उतरेगी, तो इतिहास के इन ‘आखिरी सवालों’ का जवाब देश को किस रूप में मिलता है और सिनेमा के जरिए शुरू हुई यह बहस समाज को किस दिशा में ले जाती है।
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