1934 में गांधी और हेडगेवार की उस गुप्त मुलाकात में क्या हुआ था? बताएगी संजय दत्त की ये फिल्म

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के गलियारों में इन दिनों एक ऐसी फिल्म की चर्चा तेज  हो गई है, जो न केवल मनोरंजन करेगी बल्कि देश के इतिहास के उन अध्यायों को भी कुरेदेगी जिन्हें अब तक हाशिए पर रखा गया था। बॉलीवुड के खलनायक और दिग्गज अभिनेता संजय दत्त अपनी आगामी फिल्म ‘आखिरी सवाल’ के साथ एक ऐसा धमाका करने जा रहे हैं, जिसकी गूंज राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में सुनाई देने लगी है।

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रिलीज हुआ टीजर

हाल ही में इस फिल्म का एक बेहद प्रभावशाली और रोंगटे खड़े कर देने वाला टीजर रिलीज किया गया है, जिसने दर्शकों के बीच जिज्ञासा की एक नई लहर पैदा कर दी है। यह फिल्म महज एक सिनेमाई अनुभव नहीं, बल्कि 1934 की उस ऐतिहासिक घटना का विश्लेषण करने की एक साहसी कोशिश लग रही है, जिसके बारे में इतिहास की किताबों में चर्चा बहुत सीमित रही है।

akhiri sawal

फिल्म के टीजर की शुरुआत ही एक ऐसे चुभते हुए सवाल से होती है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है। स्क्रीन पर उभरते शब्द सवाल, जिसे पूछने की हिम्मत अब तक किसी ने नहीं की’ सीधे तौर पर उस जिज्ञासा को कुरेदते हैं, जो भारत के वैचारिक इतिहास को लेकर अक्सर लोगों के मन में दबी रहती है।

टीजर का मुख्य केंद्र बिंदु साल 1934 में महात्मा गांधी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के बीच हुई वह गुप्त और महत्वपूर्ण मुलाकात है, जिसने कहीं न कहीं भारत की भविष्य की राजनीति और सामाजिक संरचना की नींव को प्रभावित किया था। टीजर के एक बेहद दमदार दृश्य में महात्मा गांधी के किरदार को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि यह जातिवाद एक दिन भारत को बांटकर रख देगा। यह संवाद न केवल उस समय की परिस्थितियों को दर्शाता है, बल्कि आज के दौर में भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है।

दशकों पुराने रहस्य से उठेगा पर्दा

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक अभिजीत मोहन वारंग के निर्देशन में बनी यह फिल्म इतिहास को एक बेहद नाटकीय और गंभीर दृष्टिकोण से पेश करने का वादा करती है। टीजर में जिस तरह से गांधी और हेडगेवार की बातचीत को फिल्माया गया है वह आरएसएस की विचारधारा और गांधीवादी सिद्धांतों के बीच के टकराव और सामंजस्य की एक धुंधली लेकिन सशक्त झलक पेश करता है।

यह फिल्म उन साहसी सवालों को उठाने का दावा कर रही है जो संभवतः भारत की दिशा बदलने वाली घटनाओं के पीछे की असलियत को सामने ला सकते हैं। मेकर्स ने इस फिल्म के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया है कि, उनका उद्देश्य केवल एक कहानी सुनाना नहीं है, बल्कि दर्शकों की आंखें खोलना और उन्हें उस हकीकत से रूबरू कराना है, जो दशकों से परदे के पीछे छिपी हुई थी।

फिल्म ‘आखिरी सवाल’ के निर्माण में संजय दत्त के साथ निखिल आनंद ने भी अहम भूमिका निभाई है। संजय दत्त का इस फिल्म से जुड़ना ही इसकी गंभीरता और भव्यता को कई गुना बढ़ा देता है। फिल्म की पटकथा, संवाद और कहानी को उत्कर्ष नैथानी ने अपनी लेखनी से सजाया है, जो अक्सर गहन शोध पर आधारित कार्यों के लिए जाने जाते हैं।

वैचारिक मतभेद होगा उजागर

वहीं, संगीत की दुनिया के दिग्गज मोंटी शर्मा ने फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर तैयार किया है, जो टीजर में ही अपनी मौजूदगी का एहसास करा देता है। फिल्म के गीतों को प्रख्यात कवि कुमार विश्वास ने अपनी कलम से संवारा है, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि फिल्म के संवाद और गाने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ेंगे।

सिनेमाई गलियारों में चर्चा है कि यह फिल्म उन वैचारिक मतभेदों को भी उजागर करेगी जो आजादी के आंदोलन के दौरान विभिन्न संगठनों के बीच मौजूद थे। 1934 की वह मुलाकात वर्धा में हुई थी, जहां गांधी जी ने आरएसएस के शिविर का दौरा किया था। इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि गांधी जी संघ के अनुशासन और वहां व्याप्त छुआछूत की अनुपस्थिति से प्रभावित हुए थे, लेकिन हेडगेवार के साथ उनकी बातचीत के पूर्ण विवरण पर हमेशा से एक रहस्य का पर्दा रहा है।

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‘आखिरी सवाल’ इसी पर्दे को उठाने की कोशिश करती नजर आ रही है। फिल्म का टीजर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और फिल्म समीक्षकों का मानना है कि, यह फिल्म रिलीज के बाद एक बड़ी बहस छेड़ सकती है। तकनीकी रूप से भी फिल्म काफी समृद्ध नजर आ रही है। टीजर की सिनेमैटोग्राफी और किरदारों का गेटअप उस दौर के भारत को जीवंत करने में सफल रहा है। गांधी जी के दर्शन और हेडगेवार की राष्ट्रवाद की अपनी परिभाषा के बीच के संवादों को जिस तरह से बुना गया है, वह दर्शकों को अंत तक बांधे रखने की क्षमता रखता है।

8 मई को रिलीज होगी फिल्म

निर्देशक अभिजीत मोहन वारंग ने जिस तरह से ऐतिहासिक तथ्यों और नाटकीय रूपांतरण का संतुलन बनाया है, वह उनकी पिछली राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म की छाप को और मजबूत करता है। संजय दत्त और उनकी टीम ने इस प्रोजेक्ट के लिए काफी समय से तैयारी की थी, और अब जब यह फिल्म रिलीज के मुहाने पर है, तो इसकी चर्चा चारों तरफ हो रही है।

‘आखिरी सवाल’ 8 मई को देशभर के सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस फिल्म को लेकर न केवल फिल्म प्रेमी बल्कि इतिहास में रुचि रखने वाले लोग भी काफी उत्साहित हैं। फिल्म के मेकर्स का दावा है कि यह फिल्म देखने के बाद दर्शकों का इतिहास को देखने का नजरिया बदल जाएगा। यह फिल्म उन लोगों के लिए एक जवाब की तरह हो सकती है जो यह जानना चाहते थे कि आखिर उस मुलाकात में ऐसा क्या हुआ था जिसने भारतीय राजनीति के दो ध्रुवों को एक मेज पर ला खड़ा किया था।

 

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