
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए महासचिव बनाए गए महंत गोविंद देव गिरि ने शुक्रवार को मंदिर की नई व्यवस्था, हाल में सामने आए चढ़ावा विवाद और ट्रस्ट के भीतर हुए बड़े फेरबदल को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। यह उनका महासचिव बनने के बाद पहला विस्तृत इंटरव्यू था, जिसमें उन्होंने पूर्व महासचिव चंपत राय के कार्यकाल पर भी अपनी राय जाहिर की।
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चंपत राय को बताया निष्कलंक
गोविंद देव गिरि ने चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि, वह व्यक्तिगत रूप से पूरी तरह बेदाग और निष्कलंक हैं। यह बात वह शुरू से कहते आ रहे हैं और यही सही भी है। उन्होंने कहा, चंपत राय के सामने जो दिक्कतें आईं, उनकी वजह किसी तरह की चारित्रिक खामी नहीं बल्कि उनका सरल और भोला स्वभाव था।

गोविंद देव गिरि ने कहा कि, चंपत राय का लोगों पर आसानी से भरोसा कर लेना ही उनके लिए घातक साबित हुआ, क्योंकि जिन लोगों पर उन्होंने आंख मूंदकर विश्वास किया, उन्हीं में से कुछ ने उन्हें धोखा दिया और इस हाल तक पहुंचा दिया।
चढ़ावा चोरी विवाद पर क्या बोले गोविन्द देव
मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी चोरी के मामले पर गोविंद देव गिरि ने कहा कि, यह घटना अपने आप में उतनी बड़ी नहीं थी, जितना बखेड़ा उसे लेकर खड़ा किया गया। उन्होंने इस पूरे प्रकरण के पीछे किसी सोची-समझी साजिश की आशंका जताते हुए कहा कि इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए ताकि असली वजह और जिम्मेदार लोगों का पता चल सके। उनके इस बयान से साफ है कि, नया नेतृत्व इस विवाद को सिर्फ प्रशासनिक चूक के बजाय एक बड़ी साजिश के तौर पर देख रहा है।
ट्रस्ट में हुआ बड़ा फेरबदल
गौरतलब है कि, हाल ही में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक अहम बैठक में प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया गया। इस बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के ट्रस्ट से हटने और सदस्य विमलेंद्र मोहन के निधन के बाद खाली हुए पदों को भरा गया। अब तक ट्रस्ट में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे स्वामी गोविंद देव गिरि को नियमित महासचिव बनाया गया है, जबकि दिल्ली के कारोबारी महेश भागचंदका को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। इसके साथ ही मंदिर के कामकाज को बेहतर तरीके से संभालने के लिए ट्रस्ट के इतिहास में पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ का पद भी बनाया गया, जिसकी जिम्मेदारी जितेंद्र मिश्र को सौंपी गई है।
नए CEO जितेंद्र मिश्र अयोध्या में मौजूद
महंत गोविंद देव गिरि ने बताया कि, नए सीईओ जितेंद्र मिश्र फिलहाल अयोध्या में ही मौजूद हैं और मंदिर की व्यवस्था तथा अन्य जरूरी मसलों की बारीकी से जानकारी हासिल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि, जितेंद्र मिश्र जल्द ही औपचारिक रूप से अपना पदभार ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि शनिवार सुबह से मंदिर में आरती की व्यवस्था में कुछ बदलाव देखने को मिलेंगे। उनके मुताबिक, अब श्रृंगार आरती के समय रामलला के सामने पद गान भी किया जाएगा, जिससे दर्शन और पूजा का अनुभव और भी भावपूर्ण बनेगा।
CEO और महासचिव में तालमेल पर दिया भरोसा
नई व्यवस्था में एक सीईओ और एक महासचिव, दोनों पदों के साथ काम करने को लेकर उठ रहे सवालों पर गोविंद देव गिरि ने स्पष्ट किया कि दोनों पदों के बीच कामकाज को लेकर किसी तरह का मतभेद नहीं होगा। उन्होंने बताया कि, ट्रस्ट मंदिर की समूची व्यवस्था और नीतियां तय करेगा, जबकि सीईओ का काम उन नीतियों को जमीन पर उतारकर मंदिर का कुशल और सुचारू संचालन सुनिश्चित करना होगा। यानी नीति-निर्धारण और क्रियान्वयन की जिम्मेदारियां अलग-अलग होंगी, जिससे टकराव की गुंजाइश नहीं बचेगी।
देवी-देवताओं के पर्व मनाए जाएंगे
गोविंद देव गिरि ने यह भी जानकारी दी कि, राम मंदिर परिसर में सिर्फ रामलला ही नहीं, बल्कि अन्य देवी-देवताओं के भी मंदिर स्थापित हैं। उन्होंने बताया कि साल भर में इन सभी देवी-देवताओं से जुड़े प्रमुख पर्व और उत्सव भी विधि-विधान से मनाए जाएंगे, जिससे मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियां साल भर चलती रहेंगी।

जानकारों का मानना है कि, यह प्रशासनिक फेरबदल ऐसे समय पर हुआ है जब मंदिर निर्माण और उससे जुड़े कार्य लगभग अंतिम चरण में हैं, और अब ध्यान मंदिर के दीर्घकालिक संचालन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं तथा पारदर्शी प्रबंधन पर केंद्रित होता जा रहा है। महासचिव के तौर पर गोविंद देव गिरि के सामने न सिर्फ रोजमर्रा की व्यवस्था बल्कि हाल के विवादों के बाद ट्रस्ट की साख बहाल करने की भी बड़ी चुनौती होगी।
ट्रस्ट में बढ़ा कद
गोविंद देव गिरि पहले से ही देश के जाने-माने आध्यात्मिक गुरु, वैदिक विद्वान और कथावाचक के रूप में जाने जाते रहे हैं। ट्रस्ट में लंबे समय तक कोषाध्यक्ष की भूमिका निभाने के बाद अब महासचिव जैसे सबसे अहम पद की जिम्मेदारी मिलने से उनका कद ट्रस्ट के भीतर और मजबूत हुआ है। आने वाले दिनों में उनकी अगुआई में मंदिर प्रशासन में और क्या बदलाव देखने को मिलते हैं, इस पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
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