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सावधान! खोया-पनीर के नाम पर कहीं जहर तो नहीं खा रहें आप, यूपी में 60% नमूने फेल

एक्सपर्ट्स ने बताए असली-नकली पनीर पहचाने के तरीके

आगरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती में बाद भी प्रदेश में खाद्य पदार्थों में धड़ल्ले से मिलावट की जा रही है। यहां घी, पनीर और खोया जैसे तमाम डेयरी उत्पाद में मिलावट हो रही है या फिर पूरी तरह से नकली पाए जा रहे हैं। इन उत्पादों के करीब 60 फीसदी नमूने जांच में फेल हो गए हैं, जो कि खाद्य सुरक्षा के लिहाज से बेहद चिंताजनक स्थिति मानी जा रही है।

इन आंकड़ों की गंभीरता को देखते हुए योगी प्रशासन की तरफ से एनालॉग डेयरी उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस आदेश के बाद अब प्रदेश का खाद्य विभाग ऐसे उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए जांच अभियान को और तेज कर रहा है। जांच में मिलावट या नकली उत्पाद की पुष्टि होने पर संबंधित संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी और साथ ही उस ब्रांड को भी प्रतिबंधित करने की कार्रवाई की जाएगी।

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जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

आपको बता दें कि, खाद्य विभाग ने हाल ही में खोया, पनीर और घी के लगभग 96 नमूने लिए थे और जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे थे, जिसकी रिपोर्ट अब आ गई है। इन नमूनों में से 57 पूरी तरह फेल पाए गए है। इतना ही नहीं, इनमें से 23 नमूनों में तो सीधे तौर पर नकली उत्पाद होने की पुष्टि भी हुई है।

Fake Paneer

वहीं यदि दूध के नमूनों की बात करें, तो स्थिति और भी गंभीर नजर आती है। दूध के कुल 111 नमूनों की जांच रिपोर्ट में से 81 नमूने मिलावटी और नकली पाए गए। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि, घी में पाम ऑयल, वनस्पति तेल और कृत्रिम एसेंस जैसे पदार्थों का इस्तेमाल किया जा रहा था, जबकि पनीर और खोया में स्टार्च, रिफाइंड तेल और स्किम्ड मिल्क पाउडर जैसी सामग्री मिलाई जा रही थी।

आयुक्त ने दिए सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री की ओर से इस मामले में सख्ती दिखाए जाने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने भी संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि, जिन भी फर्मों के उत्पादों में जांच के दौरान एनालॉग यानी नकली डेयरी उत्पाद होने की पुष्टि होती है, उनका लाइसेंस तत्काल निरस्त किया जाए और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। इसके साथ ही आयुक्त ने यह भी निर्देश दिया है कि, पूरे प्रदेश में ऐसे ब्रांडों के उत्पादों की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा, ताकि आम जनता को इस तरह की मिलावटी सामग्री से बचाया जा सके।

इस मामले में सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय महेंद्र श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि, एनालॉग डेयरी उत्पादों की पहचान और जांच के लिए विशेष टीम को सक्रिय कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि, यदि नमूनों की जांच में मिलावट या नकली उत्पाद होने की पुष्टि होती है, तो तुरंत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी और इसकी रिपोर्ट शासन को भी भेजी जाएगी, ताकि उच्च स्तर पर भी इस पूरे मामले की निगरानी की जा सके।

क्या होते हैं एनालॉग डेयरी उत्पाद

इस पूरे मामले में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश गुप्ता बताते हैं कि, एनालॉग उत्पाद दरअसल कृत्रिम रूप से तैयार किए गए डेयरी उत्पाद होते हैं। उन्होंने बताया कि, इन उत्पादों को शुद्ध दूध से तैयार नहीं किया जाता, बल्कि इनमें असली दूध जैसी वसा और प्रोटीन की मात्रा पूरी तरह गायब होती है। इसके स्थान पर इन उत्पादों को तैयार करने में पाम ऑयल, स्टार्च, सोया प्रोटीन और इमल्सीफायर जैसे रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है।

गुप्ता का कहना है कि, इमल्सीफायर एक ऐसा पदार्थ होता है, जो दो अलग-अलग तत्वों या तरल पदार्थों को आपस में मिलाने और जोड़े रखने में मदद करता है, जबकि सामान्य तौर पर यह तत्व एक-दूसरे में आसानी से नहीं मिल पाते। इन नकली उत्पादों में पोषक तत्वों की भारी कमी पाई जाती है। अगर कोई व्यक्ति इनका सेवन लगातार करता है तो उसे पेट संबंधी गंभीर बीमारियां, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने और हृदय रोग जैसी घातक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

 कैसे पहचाने पनीर असली है या नकली 

आम जनता को इस मिलावट से बचाने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ आसान घरेलू तरीके भी सुझाए हैं, जिनकी मदद से कोई भी व्यक्ति असली और नकली पनीर की पहचान कर सकता है।

पहला तरीका

दुकान से पनीर खरीदते समय या घर लाने के बाद उसे हाथ से हल्के से मसलकर देखें। यदि पनीर मसलते ही टूटकर बिखरने लगे, तो यह मिलावटी होने का संकेत हो सकता है। ऐसे पनीर को खरीदने से बचना चाहिए, क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

दूसरा तरीका

पनीर की पहचान उसकी खुशबू से भी की जा सकती है। इसके लिए पनीर को सूंघना चाहिए। अगर उसमें से शुद्ध दूध जैसी प्राकृतिक खुशबू आती है, तो यह असली पनीर माना जाता है, जबकि नकली पनीर में इस तरह की कोई विशेष गंध महसूस नहीं होती।

तीसरा तरीका

पनीर को पहले उबाल लें और फिर उसे ठंडा होने के लिए अलग रख दें। इसके बाद ठंडे पनीर पर अरहर या सोयाबीन के पाउडर की कुछ मात्रा छिड़क कर करीब 10 मिनट के लिए छोड़ दें। यदि इस दौरान पनीर का रंग हल्के लाल रंग में बदल जाता है, तो यह संकेत हो सकता है कि पनीर डिटर्जेंट की मदद से तैयार किया गया है। ऐसे पनीर का सेवन करने से पूरी तरह बचना चाहिए।

चौथा तरीका

कई बार मिलावटखोर पनीर में स्टार्च की मिलावट कर देते हैं। इसकी पहचान के लिए पनीर के कुछ छोटे टुकड़े लेकर उन पर आयोडीन सॉल्यूशन की कुछ बूंदें डालनी चाहिए। इसके बाद यदि पनीर का रंग नीला या काला पड़ जाता है, तो यह मिलावटी होने का पक्का संकेत है, जबकि असली और शुद्ध पनीर के रंग में इस तरह का कोई बदलाव नहीं आता।

सतर्कता ही बचाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि, त्योहारों के मौसम में मिलावटखोरी की घटनाएं और भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थ खरीदते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। प्रशासन की सख्ती के साथ-साथ यदि आम जनता भी इन आसान घरेलू तरीकों को अपनाकर मिलावट की पहचान करना सीख ले, तो इस तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।

 

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