लखनऊ में सनसनी: लॉक कार का दरवाजा खोला, तो कांप उठी पुलिस, अंदर पड़ी थी सड़ी-गली लाश

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में लाशों की बरामदगी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कभी शहर के किसी कोने में सड़क किनारे तो कभी गोमती नदी के तट पर संदिग्ध हालात में शव मिलने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में अब आशियाना क्षेत्र से एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया।

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मामला सालेह नगर चौराहे के आसपास का है, जहां बीते तीन दिनों से एक कार लावारिस हालत में खड़ी थी। स्थानीय निवासियों को शुरुआत में इस पर खास ध्यान नहीं गया, लेकिन धीरे-धीरे कार से तेज दुर्गंध उठने लगी, जिसने आसपास के लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया। कई दिनों तक बदबू बर्दाश्त करने के बाद आखिरकार स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी।

पुलिस ने खोला दरवाजा, तो उड़ गए होश

सूचना मिलते ही आशियाना थाने की पुलिस गुरुवार देर रात करीब डेढ़ बजे मौके पर पहुंची। कार को देखने पर पता चला कि उसका दरवाजा अंदर से लॉक था। पुलिस ने जब किसी तरह गाड़ी का दरवाजा खुलवाया, तो अंदर का दृश्य देखकर मौजूद पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। कार की पिछली सीट पर एक युवक का शव पड़ा था, जो बुरी तरह सड़-गल चुका था। शव की हालत से अंदाजा लगाया जा रहा था कि, मौत हुई कई दिन हो चुके हैं।

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घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम के साथ-साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और फॉरेंसिक टीम भी घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने पूरे इलाके को घेरे में लेकर सबूत जुटाने शुरू किए। भारी दुर्गंध के बावजूद पुलिसकर्मियों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने बड़ी सावधानी से कार के भीतर और आसपास से साक्ष्य एकत्र किए।

पहचान पत्र से हुई शिनाख्त

शव बरामद होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती मृतक की पहचान करने की थी, क्योंकि शव की हालत बेहद खराब हो चुकी थी। पुलिस ने कार की तलाशी ली तो उसमें एक पहचान पत्र मिला। इस आई-कार्ड पर दर्ज मोबाइल नंबर के आधार पर पुलिस ने संपर्क साधने की कोशिश, जिससे मृतक की पहचान करने में मदद मिली।

छानबीन में सामने आया कि मृतक की पहचान रायबरेली जिले के निराला नगर मोहल्ले के रहने वाले 36 वर्षीय ज्ञानेन्द्र सिंह के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, ज्ञानेन्द्र सिंह मूल रूप से रायबरेली के रहने वाले थे, लेकिन काम-धंधे के सिलसिले में लखनऊ आकर बस गए थे। वह शहर के देवीखेड़ा इलाके में किराए के मकान में रहते थे। पेशे से वह एक डिजिटल लेंडिंग यानी फिनटेक कंपनी ‘किश्त’ में कार्यरत थे और वित्तीय सेवाओं से जुड़े काम देखते थे।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

पुलिस ने वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर और अन्य तकनीकी माध्यमों की सहायता से मृतक के परिजनों का पता लगाया और उन्हें इस दुखद घटना की सूचना दी। यह जानकारी मिलते ही ज्ञानेन्द्र सिंह के परिजन बदहवास हालत में रायबरेली से लखनऊ के लिए रवाना हुए।

पुलिस के मुताबिक, मृतक विवाहित था और उसकी करीब ढाई साल की एक मासूम बेटी भी है। परिवार पर यह खबर किसी वज्रपात से कम नहीं थी। घटनास्थल पर पहुंचे परिजन गमगीन नजर आए और बार-बार बेसुध हो रहे थे। पुलिस और स्थानीय लोगों ने उन्हें संभालते रहे।

एक कमाऊ सदस्य की इस तरह संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों में भी इस घटना को लेकर गहरा शोक है। मृतक के परिवार ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर असली दोषियों को बेनकाब करने की मांग की है।

किसने चौराहे पर खड़ी की कार?

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि, आखिर यह कार सालेह नगर चौराहे पर कब और किसके द्वारा लाकर खड़ी की गई। इसका पता लगाने के लिए पुलिस ने आसपास लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। पुलिस टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि, कार को चौराहे तक कौन लेकर आया था और उस वक्त कार में कौन-कौन मौजूद था।

इसके अलावा पुलिस ई-चालान ऐप और ई-वाहन संबंधी डेटाबेस की मदद से भी वाहन की आवाजाही और उसके इस्तेमाल से जुड़ी जानकारियां जुटा रही है, ताकि घटनाक्रम को कड़ी-दर-कड़ी जोड़ा जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, तकनीकी साक्ष्यों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि, मृतक आखिरी बार किन लोगों के संपर्क में था और घटना से पहले उसकी गतिविधियां क्या थीं।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर टिकीं निगाहें

फिलहाल, मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस के अनुसार, यह हत्या का मामला है या किसी अन्य वजह से मौत हुई है, इसका खुलासा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। शव की हालत बेहद खराब होने के कारण पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया में भी विशेष सावधानी बरती जा रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम शव का बारीकी से परीक्षण कर मौत के सही कारणों का पता लगाने में जुटी है।

पुलिस फिलहाल हर संभावित एंगल से इस मामले की जांच कर रही है। मृतक के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स, उसके बैंक लेन-देन, कार्यस्थल पर उसकी गतिविधियां और सामाजिक संपर्कों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या मृतक किसी वित्तीय विवाद, पारिवारिक कलह या अन्य किसी व्यक्तिगत समस्या से जूझ रहा था, जो इस घटना की वजह बन सकती है।

 हर पहलू की होगी बारीकी से जांच

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि, मृतक के परिजनों की तहरीर और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, मामला पूरी तरह जांच के दायरे में है और पुलिस किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

इस घटना ने एक बार फिर शहर में लावारिस वाहनों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि, यदि समय रहते सतर्कता बरती जाए तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। फिलहाल पूरे मामले पर पुलिस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के साथ-साथ फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट से इस रहस्यमयी मौत का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।

 

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