डार्क एनर्जी की खोज में नई शुरुआत, हबल से सौ गुना बड़ा नजारा कैद करेगा नया टेलीस्कोप

सालों से अनसुलझा था ये सवाल, अब नासा के नए टेलीस्कोप से मिलेगा जवाब

वाशिंगटन। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों को समझने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। एजेंसी ने अपने अत्याधुनिक नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित कर दिया है। यह टेलीस्कोप आने वाले वर्षों में ब्रह्मांड के उन हिस्सों का अध्ययन करेगा, जिनके बारे में वैज्ञानिक अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं जुटा पाए हैं। खगोल विज्ञान की दुनिया में इसे अब तक के सबसे महत्वाकांक्षी मिशनों में से एक माना जा रहा है।

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स्पेसएक्स के रॉकेट से हुआ प्रक्षेपण

 इस टेलीस्कोप को 30 अगस्त 2026 को स्पेसएक्स के फाल्कन हैवी रॉकेट के जरिये अंतरिक्ष में भेजा गया। प्रक्षेपण के साथ ही रोमन टेलीस्कोप ने अपनी वैज्ञानिक यात्रा शुरू कर दी है और आने वाले समय में यह ब्रह्मांड के उन क्षेत्रों की तस्वीरें उपलब्ध कराएगा, जिन्हें अब तक समझ पाना खगोलविदों के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है। इस टेलीस्कोप की इमेजिंग क्षमता इतनी अधिक है कि इसकी एक हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीर को पूरी तरह से देखने के लिए करीब पांच लाख 4K टेलीविजन स्क्रीन की आवश्यकता पड़ सकती है।

हबल से सौ गुना बड़ा नजारा

रोमन स्पेस टेलीस्कोप को अब तक भेजे गए अन्य टेलीस्कोपों से बेहद अलग बताया जा रहा है। सामान्यतः अंतरिक्ष में मौजूद अधिकतर टेलीस्कोप एक समय में आकाश के बेहद छोटे हिस्से को ही कैद कर पाते हैं, लेकिन रोमन टेलीस्कोप इस मामले में क्रांतिकारी साबित होगा। यह एक ही तस्वीर में हबल स्पेस टेलीस्कोप की तुलना में करीब सौ गुना अधिक बड़े क्षेत्र को कैप्चर करने में सक्षम है। इसका सीधा लाभ यह होगा कि, वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष के विशाल भूभाग का अध्ययन करने में पहले से कहीं अधिक तेजी और सुविधा मिलेगी।

US space agency NASA

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि, जिस कार्य को पूरा करने में हबल टेलीस्कोप को करीब एक हजार वर्ष का समय लग सकता था, उसे रोमन टेलीस्कोप महज कुछ वर्षों में ही अंजाम दे सकता है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य डार्क एनर्जी के रहस्य को सुलझाना है, जिसे ब्रह्मांड के लगातार विस्तार के पीछे की मुख्य वजह माना जाता है। डार्क एनर्जी आज भी आधुनिक खगोल भौतिकी के सबसे बड़े रहस्यों में शुमार है और वैज्ञानिक दशकों से इसकी प्रकृति को समझने का प्रयास कर रहे हैं।

300 मेगापिक्सल का शक्तिशाली कैमरा

रोमन टेलीस्कोप को खास बनाने वाली तकनीकों में इसका वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट सबसे अहम है। इसे अब तक अंतरिक्ष में भेजा गया सबसे बड़ा इन्फ्रारेड कैमरा माना जा रहा है। इस उपकरण में कुल 18 डिटेक्टर लगाए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक डिटेक्टर करीब एक करोड़ 68 लाख पिक्सल की क्षमता रखता है। जब इन सभी डिटेक्टरों की क्षमता को जोड़ा जाता है, तो कैमरा एक ही तस्वीर में करीब 300 मेगापिक्सल का रिजॉल्यूशन देने में सक्षम हो जाता है। यह क्षमता आज बाजार में उपलब्ध अधिकतर स्मार्टफोन कैमरों की तुलना में कई गुना अधिक है, जो इस मिशन की तकनीकी क्षमता को दर्शाती है।

एक तस्वीर के लिए चाहिए 37 टीवी स्क्रीन

रोमन स्पेस टेलीस्कोप से ली गई तस्वीरों का रिजॉल्यूशन इतना अधिक होगा कि, उन्हें पूरी तरह देखने के लिए सामान्य टीवी काफी नहीं होंगे। जानकारी के अनुसार, एक साधारण 4K टीवी स्क्रीन में करीब 83 लाख पिक्सल होते हैं, जबकि रोमन टेलीस्कोप की एक तस्वीर में करीब 30 करोड़ पिक्सल मौजूद होंगे। इसका मतलब है कि, इसकी बारीकी और डिटेल सामान्य टीवी स्क्रीन की क्षमता से कई गुना अधिक होगी।

नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार, किसी तस्वीर को उसके वास्तविक रिजॉल्यूशन और पूरी बारीकी के साथ देखने के लिए करीब 37 4K टीवी स्क्रीन को आपस में जोड़ना होगा, तभी उस विशाल तस्वीर के हर हिस्से और उसमें छिपी हर छोटी-बड़ी जानकारी को स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। यह तकनीकी उपलब्धि खगोल विज्ञान के क्षेत्र में एक नया मानदंड स्थापित करती है।

हर दिन पृथ्वी पर पहुंचेगा 1.4 टेराबाइट डेटा

रोमन स्पेस टेलीस्कोप केवल शानदार और उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें भेजने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह हर दिन भारी मात्रा में वैज्ञानिक आंकड़े भी पृथ्वी पर भेजेगा। अनुमान के अनुसार, यह टेलीस्कोप प्रतिदिन करीब 1.4 टेराबाइट डेटा धरती तक पहुंचाएगा, जो इसे अब तक के सबसे अधिक डेटा उत्पन्न करने वाले अंतरिक्ष मिशनों में शामिल करता है।

US space agency NASA

इस मिशन की एक और खास बात यह है कि, रोमन टेलीस्कोप से जुटाया गया डेटा आम जनता के लिए भी नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इसका सीधा फायदा यह होगा कि, न केवल पेशेवर वैज्ञानिक, बल्कि शोधकर्ता, विद्यार्थी और अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वाले आम लोग भी इस डेटा का इस्तेमाल कर सकेंगे। नासा की यह पहल वैज्ञानिक शोध को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

पांच वर्षों में एक अरब आकाशगंगाओं का अध्ययन

नासा के अधिकारियों के मुताबिक, मिशन के शुरुआती पांच वर्षों में रोमन स्पेस टेलीस्कोप करीब एक अरब आकाशगंगाओं का अध्ययन करेगा। इस विशाल अध्ययन से वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड की संरचना और उसके विकास की प्रक्रिया को समझने में अहम मदद मिलेगी। साथ ही, यह मिशन अंतरिक्ष का अब तक का सबसे विस्तृत और सटीक नक्शा तैयार करने की दिशा में एक बड़ी प्रगति साबित होगा।

खगोल विज्ञानियों का मानना है कि, रोमन स्पेस टेलीस्कोप की यह यात्रा न केवल डार्क एनर्जी के रहस्य को सुलझाने में मदद करेगी, बल्कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति, उसके विस्तार और भविष्य को लेकर वैज्ञानिकों की समझ को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। आने वाले वर्षों में इस मिशन से प्राप्त होने वाले आंकड़े और तस्वीरें अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत कर सकती हैं।

 

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