शिवसेना UBT में बड़ा भूचाल, 6 सांसदों ने छोड़ा साथ, इस पार्टी में हुए शामिल!

महाराष्ट्र। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को एक और बड़ा झटका लगा है। खबर आ रही है कि, पार्टी के 6 सांसदों ने उद्धव का साथ छोड़ दिया है और डिप्टी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना को अपना समर्थन दे रहे हैं। हालांकि ये खबर अभी सूत्रों के हवाले से आ रही है, लेकिन इस खबर ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। इस खबर ने न सिर्फ उद्धव की पार्टी में खलबली मचाई है, बल्कि विपक्षी खेमे में भी हड़कंप मच गया है।

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2022 में हुई थी बड़ी टूट

आपको बता दें कि इससे पहले साल 2022 में शिवसेना में बड़ी टूट हुई थी, जिसकी यादें एक बार फिर से ताजा हो गई हैं। अब ऐसा लग रहा है कि, उद्धव ठाकरे की पार्टी फिर एक बड़े संकट की ओर बढ़ रही है।

सूत्रों के अनुसार, जिन 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे के साथ जाने की चर्चा हैं, उनमें संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल के नाम शामिल हैं। ये सभी सांसद शिवसेना (UBT) के टिकट पर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे।

Uddhav Thackeray

पार्टी के इन वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं का इस तरह पाला बदलना उद्धव ठाकरे के लिए न केवल राजनीतिक बल्कि भावनात्मक रूप से भी एक बड़ा धक्का माना जा रहा है। यह वही सांसद हैं जिन्हें शिवसेना (UBT) के कार्यकर्ताओं और उद्धव ठाकरे की मेहनत की बदौलत जनता का समर्थन और जीत मिली थी।

ऐसे में उनका यह कदम पार्टी की नींव को हिला देने वाला साबित हो सकता है। हालांकि, अभी तक इन सांसदों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस खबर को लेकर चर्चा जोर-शोर से हो रही है।

संजय राउत ने दी कड़ी चुनौती

इस पूरे घटनाक्रम के बीच बुधवार 17 जून को नई दिल्ली में शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया। इस प्रेस वार्ता में राउत ने बागी सांसदों को सीधी और कड़ी चुनौती दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि, अगर ये सांसद पाला बदलना चाहते हैं, तो पहले अपनी लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दें और दोबारा जनता के बीच जाएं।

राउत ने कहा कि, 2022 में जब एकनाथ शिंदे ने पार्टी में पहली बार फूट डाली थी, तब भी महाराष्ट्र की जनता ने इसे बर्दाश्त नहीं किया था। अब अगर फिर से ऐसी कोई कोशिश की गई, तो महाराष्ट्र की जनता और शिवसेना (UBT) के कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, पार्टी अपने सांसदों के इस कदम का पुरजोर विरोध करेगी और लोकतांत्रिक तरीकों से इसका जवाब दिया जाएगा।

संजय राउत की इस महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। शिवसेना (UBT) के कुल नौ लोकसभा सांसदों में से केवल तीन सांसद ही इस प्रेसवार्ता में नजर आये। ये तीन सांसद थे अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे। बाकी छह सांसदों की गैर मौजूदगी इस बात की तरफ साफ़ इशारा कर रही है कि, पार्टी में फूट पड़ चुकी है।

अभी नहीं हुई आधिकारिक पुष्टि

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, जिन सांसदों के शिंदे खेमे में जाने की चर्चा है, उनका इस प्रेस वार्ता से दूर रहना इस बात का संकेत है कि, पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हालांकि, राउत ने यह भी कहा कि शिवसेना (UBT) के पास अभी तक किसी भी सांसद के पार्टी छोड़ने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि, जब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, तब तक यह सब अफवाहें हैं और पार्टी इसे गंभीरता से लेते हुए अपने सांसदों से बातचीत कर रही है।

 संजय राउत ने अपनी प्रेस वार्ता में एक बेहद गंभीर आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि, महाराष्ट्र के सांसदों को 15 करोड़ रुपये की पेशकश करके खरीदा जा रहा है। राउत के इस आरोप ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में इस तरह पैसे के बल पर सांसदों को तोड़ना देश की राजनीतिक व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक है।

इस पर भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार किया और राउत के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। बीजेपी ने कहा कि केवल पैसे के आधार पर इतने बड़े फैसले नहीं होते। नेता अपनी विचारधारा और राजनीतिक भविष्य को देखते हुए फैसले लेते हैं। बीजेपी ने यह भी कहा कि राउत के ये आरोप निराधार हैं और वे खुद अपनी पार्टी की विफलता को छुपाने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं।

ताजा हुई 2022 की यादें

यह पूरा घटनाक्रम 2022 की उस बड़ी राजनीतिक उथलपुथल की याद दिला रहा है जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के बड़े हिस्से को अपने साथ लेकर अलग गुट बना लिया था और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई थी। उस समय भी शिवसेना के कई विधायकों और नेताओं ने उद्धव का साथ छोड़कर शिंदे खेमे का दामन थामा था। उस घटना ने उद्धव ठाकरे को गहरे राजनीतिक और भावनात्मक संकट में डाल दिया था।

Uddhav Thackeray

अब एक बार फिर इसी तरह के हालात बनते दिख रहे हैं। राउत ने कहा कि, अगर तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) जैसे दलों को बार-बार इसी तरह तोड़ा जाता रहा, तो चुनाव लड़ने का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है और जनता इसका जवाब जरूर देगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने उद्धव ठाकरे के सामने एक नई और बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है, जिन सांसदों पर उन्होंने भरोसा किया, जिनके लिए उनकी पार्टी ने दिन-रात मेहनत की और जनता से वोट मांगे, उन्हीं का इस तरह पाला बदलना उनके लिए बहुत बड़ा राजनीतिक धक्का है। अब देखना यह होगा कि उद्धव ठाकरे इस संकट से कैसे निपटते हैं और क्या वे अपने बचे हुए सांसदों को एकजुट रख पाते हैं। महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है।

 

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