21 जुलाई 2007: भारत को मिली पहली महिला राष्ट्रपति, प्रतिभा पाटिल का ऐतिहासिक चुनाव

नई दिल्ली। 21 जुलाई 2007 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। इस दिन कांग्रेस की उम्मीदवार प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने राष्ट्रपति पद के चुनाव में भारी मतों से जीत हासिल की और भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनने का गौरव प्राप्त किया। यह न केवल भारतीय महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक था, बल्कि स्वतंत्र भारत के 60 वर्ष पूरे होने के बाद संवैधानिक पद पर महिला प्रतिनिधित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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प्रतिभा पाटिल का जीवन

प्रतिभा देवीसिंह पाटिल का जन्म 19 दिसंबर 1934 को महाराष्ट्र के जलगांव जिले में हुआ था। एक साधारण परिवार से आने वाली प्रतिभा ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और वकालत शुरू की। जल्द ही वे राजनीति की ओर आकर्षित हुईं।

Pratibha Patil

1962 में वे महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुनी गईं और लगातार कई बार विधायक रहीं। उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों जैसे शिक्षा, समाज कल्याण, पर्यटन और गृह मंत्रालय संभाले।1970 के दशक में वे राज्यसभा सदस्य बनीं और बाद में लोकसभा पहुंचीं।

महाराष्ट्र की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का मौका भी उनके करीब आया, लेकिन अंततः वे राज्यपाल के रूप में नियुक्त हुईं। राजस्थान की राज्यपाल के रूप में उन्होंने अपनी निष्पक्षता और कर्तव्यनिष्ठा से प्रशंसा बटोरी। कांग्रेस पार्टी में उनकी लंबी सेवा और गांधी परिवार के प्रति निष्ठा उन्हें राष्ट्रपति पद की दौड़ में मजबूत दावेदार बनाती थी।

 भैरो सिंह शेखावत को हराया 

2007 में राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गईं। यूपीए (यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस) की सरकार ने प्रतिभा पाटिल को अपना उम्मीदवार घोषित किया। विपक्षी एनडीए (नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस) ने उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत को अपना उम्मीदवार बनाया। शेखावत अनुभवी नेता थे, लेकिन पाटिल की उम्मीदवारी को महिलाओं के सशक्तिकरण और यूपीए की एकता का प्रतीक माना गया।

चुनाव 19 जुलाई को हुआ, लेकिन परिणाम 21 जुलाई को घोषित किए गए। प्रतिभा पाटिल ने कुल 4,22,000 से अधिक मतों (लगभग दो-तिहाई) के साथ शानदार जीत दर्ज की। निर्वाचन मंडल (सांसदों और विधायकों) में उनकी लोकप्रियता स्पष्ट थी। यह जीत न केवल कांग्रेस के लिए बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक थी, क्योंकि इससे पहले कोई महिला इस सर्वोच्च संवैधानिक पद पर नहीं पहुंची थी।

25 जुलाई को ली थी शपथ

21 जुलाई की जीत के बाद 25 जुलाई 2007 को प्रतिभा पाटिल ने राष्ट्रपति भवन में शपथ ली। राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें पदभार सौंपा। उनके कार्यकाल (2007-2012) के दौरान भारत ने कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी बनाया। आर्थिक सुधारों का विस्तार, सांप्रदायिक सद्भाव के प्रयास, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मजबूती।

राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने कई विधेयकों पर हस्ताक्षर किए, विदेश दौरे किए और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर अपनी चिंता व्यक्त की। हालांकि, उनका कार्यकाल विवादों से मुक्त नहीं रहा। कुछ फैसलों, जैसे कुछ दोषियों को क्षमा प्रदान करने और राष्ट्रपति भवन की नवीनीकरण लागत पर सवाल उठे, लेकिन कुल मिलाकर उन्होंने संवैधानिक मर्यादा बनाए रखी।

 महिलाओं पर डाला गहरा प्रभाव

प्रतिभा पाटिल की जीत ने भारतीय समाज में महिलाओं की भूमिका पर गहरा प्रभाव डाला। यह साबित हुआ कि, लोकतंत्र में लिंग-भेद की दीवारें टूट सकती हैं। इससे पहले इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बन चुकी थीं, लेकिन राष्ट्रपति पद , जो संवैधानिक प्रमुख है पर किसी महिला पहुंचना अलग मायने रखता था।

इस घटना ने देश भर में महिला सशक्तिकरण की बहस को नई दिशा दी। स्कूलों-कॉलेजों में लड़कियों को प्रेरित किया गया कि, वे किसी भी पद तक पहुंच सकती हैं। राजनीतिक दलों ने भी महिलाओं को अधिक टिकट देने और महत्वपूर्ण पदों पर रखने की दिशा में सोचा।

21 जुलाई की अन्य घटनाएं

21 जुलाई के दिन भारतीय इतिहास में अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं भी दर्ज हैं। 1883 में कोलकाता में भारत के पहले सार्वजनिक थिएटर ‘स्टार थिएटर’ की शुरुआत हुई, जो सांस्कृतिक इतिहास का मील का पत्थर था। 1963 में काशी विद्यापीठ को विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। 1988 में भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह INSAT-1C का प्रक्षेपण हुआ, जो संचार क्रांति की दिशा में कदम था।

21 जुलाई 2007 का दिन सिर्फ एक चुनाव परिणाम नहीं था, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और समावेशिता का प्रतीक था। प्रतिभा पाटिल ने साबित किया कि योग्यता, निष्ठा और दृढ़ संकल्प के साथ कोई भी ऊंचाई हासिल की जा सकती है। आज जब हम महिला आरक्षण, सशक्तिकरण और समानता की बात करते हैं, तब इस दिन की याद ताजा हो जाती है।

भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में ऐसे मील के पत्थर नई पीढ़ी को प्रेरित करते हैं। प्रतिभा पाटिल का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा, न सिर्फ पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में, बल्कि एक ऐसे युग के सूत्रधार के रूप में जहां महिलाएं बिना किसी संकोच के नेतृत्व की भूमिका निभा सकती हैं।

 

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