नई दिल्ली। केंद्रीय खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने भारतीय खेलों के भविष्य को लेकर सरकार का रोडमैप साझा करते हुए कहा है कि जमीनी स्तर पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और खेल पर्यटन को बढ़ावा देना वर्तमान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। नई दिल्ली में भारतीय खेल पत्रकार महासंघ (एसजेएफआई) के स्वर्ण जयंती सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने ‘जेके बोस मेमोरियल ट्रॉफी’ का अनावरण किया। इस अवसर पर खेल जगत की कई प्रमुख हस्तियां और वरिष्ठ पत्रकार मौजूद रहे।
खेल प्रशासन में बड़े बदलाव की आहट
सम्मेलन के दौरान खेल सचिव हरि रंजन राव ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि भारतीय खेल प्रशासन एक ऐतिहासिक मोड़ पर है। उन्होंने जानकारी दी कि अगले महीने राष्ट्रीय खेल बोर्ड और राष्ट्रीय खेल पंचाट का गठन कर दिया जाएगा। इन संस्थाओं के आने से खेल प्रशासन में संरचनात्मक सुधार होंगे और पारदर्शिता के साथ नई कार्यप्रणालियां लागू होंगी। सचिव के अनुसार, भारतीय खेलों का वातावरण अब एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है जहाँ आने वाले दिनों में कई सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
‘खेलो इंडिया’ और पारंपरिक खेलों पर फोकस
रक्षा खडसे ने अपने संबोधन में ‘खेलो इंडिया मिशन’ की सफलता और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि नई नीतियों का मुख्य उद्देश्य भागीदारी के आधार को व्यापक बनाना है। सरकार का लक्ष्य जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसा सुव्यवस्थित ढांचा तैयार करना है, जिससे ग्रामीण और जमीनी स्तर की प्रतिभाओं को सही मंच मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का ध्यान केवल ओलंपिक खेलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पारंपरिक भारतीय खेलों को भी समान महत्व दिया जा रहा है।
आर्थिक विकास और ‘सॉफ्ट पावर’ के रूप में खेल
खेलों की आर्थिक क्षमता को रेखांकित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने ‘खेल पर्यटन’ को एक नए अवसर के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि खेल पर्यटन न केवल देश की छवि सुधारेगा बल्कि आर्थिक विकास में भी बड़ा योगदान देगा। इसके अतिरिक्त, खेल विज्ञान (Sports Science) के बढ़ते प्रभाव से युवाओं के लिए करियर के नए रास्ते खुल रहे हैं। खडसे ने जोर देकर कहा कि भारत अब खेलों को एक ‘रणनीतिक साधन’ और ‘सॉफ्ट पावर’ के रूप में वैश्विक मंच पर इस्तेमाल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।



