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प्रकृति का बड़ा चमत्कार, एक ऐसी नदी जो पूरी दुनिया को देती है ऑक्सीजन

मत काटो इस जंगल क, रुक जाएंगी दुनिया की सांसें

दक्षिण अमेरिका के घने वर्षावनों के बीच से बहती अमेजन नदी सिर्फ एक जलधारा नहीं है बल्कि ये पूरी दुनिया के पारिस्थितिक संतुलन की धुरी है। इसे धरती के फेफड़े कहा जाता है। लगभग 6,400 किलोमीटर लंबी इस नदी को दुनिया की सबसे बड़ी नदी कहना भी अतिश्योक्ति नहीं होगी। हालांकि, अमेजन नदी सबसे लम्बी है या नील नदी, इसे लेकर अक्सर बहस होती रहती है, लेकिन जल-प्रवाह की मात्रा के हिसाब से यह विश्व की सबसे शक्तिशाली नदी मानी जाती है। भू वैज्ञानिकों का कहना है कि, अमेजन अकेले दुनिया की सात बड़ी नदियों से ज्यादा पानी अटलांटिक महासागर में उड़ेलती है।

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उद्गम से समुद्र तक का सफर

अमेजन नदी की यात्रा पेरू के एंडीज पर्वत की बर्फीली चोटियों से शुरू होती है। यहां से ये यह धीरे-धीरे नीचे उतरती है और ब्राज़ील के विशाल मैदानी क्षेत्रों से होकर गुजरते हुए अटलांटिक महासागर में जाकर मिल जातीहै।

Amazon River

इस लंबे सफर में इसे पेरू, कोलंबिया, इक्वाडोर, बोलीविया, वेनेज़ुएला और गुयाना जैसे कई देश मिलते हैं। हालांकि, इसका सबसे बड़ा हिस्सा ब्राज़ील में ही स्थित है। जानकारों का कहना है कि, इस नदी में एक हज़ार से अधिक सहायक नदियां मिलती हैं। इनमें से तो कई इतनी विशाल हैं कि, कि उनकी खुद की गिनती दुनिया की सबसे विशाल नदियों में होती है।

 पृथ्वी का हरा फेफड़ा

अमेजन नदी एक ऐसी नदी है जो एक ऐसे विशाल वर्षावन को सींचती है, जो लगभग 55 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है और दुनिया के नौ देशों की सीमाओं को छूता है। इस जंगल और नदी को अक्सर “पृथ्वी का फेफड़ा” कहा जाता है, क्योंकि यह वातावरण में भारी मात्रा में ऑक्सीजन छोड़ता है और कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर जलवायु परिवर्तन की रफ्तार को थामने में सबसे अहम भूमिका निभाता है।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि, इस वर्षावन में पृथ्वी की लगभग दस प्रतिशत ज्ञात जैव-विविधता का वास है। यहां लाखों कीट प्रजातियां, हजारों पक्षी और मछलियों की प्रजातियां और सैकड़ों स्तनधारी जीव पाए जाते हैं, जिनमें जगुआर, पिरान्हा मछली, अमेजन डॉल्फिन (जिसे गुलाबी डॉल्फिन भी कहा जाता है), विशालकाय एनाकोंडा और अनगिनत दुर्लभ पौधे शामिल हैं। ये भी माना जाता है कि, यहां बहुत से ऐसे जीव-जन्तु, पेड़-पौधे और वनस्पतियां पाई जाती हैं, जिनका नाम तक अभी विज्ञान की किताबों में दर्ज नहीं होगा या यूं कहें कि इनके बारे में अभी किसी को पता तक नहीं होगा।

आदिवासी समुदाय और सांस्कृतिक विरासत

अमेजन के घने जंगलों में सदियों से सैकड़ों आदिवासी समुदाय बसते आए हैं, जिनकी अपनी अलग भाषाएं, परंपराएं और जीवन-शैली है। इनमें से कुछ जनजातियां आज भी बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग रहना पसंद करती हैं। इंसानी भाषा में इन्हें “अनकॉन्टैक्टेड ट्राइब्स” कहा जाता है। ये समुदाय नदी और जंगल पर पूरी तरह निर्भर हैं। इनकी जीविका का मुख्य साधन मछली पकड़ना, फल-मूल इकट्ठा करना और परंपरागत खेती है। इनकी जीवन-पद्धति और परंपरागत ज्ञान को पर्यावरणविद अक्सर सतत विकास का उदाहरण मानते हैं। कहते हैं कई बार ऐसा हुआ है, जब कोई हवाई जगह सर्वे करने के मकसद से इस जंगल में उड़ा और इनके इलाके से गुजरा तो इन्होंने उस पर तीर कमान तान दिए। कहने का मतलब ये हैं कि, इन्होंने खुद को उससे खतरा समझा।

 आर्थिक दृष्टि से भी अहम

अमेजन बेसिन न केवल पारिस्थितिक बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां से लकड़ी, रबर, कोको, ब्राज़ील नट्स जैसे उत्पाद निकाले जाते हैं। साथ ही मछली पकड़ना लाखों लोगों की आजीविका का साधन है। नदी परिवहन का भी प्रमुख माध्यम है, क्योंकि घने जंगलों के बीच सड़कें बनाना अत्यंत कठिन है, लेकिन आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ इस क्षेत्र में वनों की कटाई भी लगातार बढ़ रही है।

 पशुपालन के लिए भूमि की जरूरत, अवैध खनन, सोयाबीन की खेती और सड़क निर्माण जैसी गतिविधियों ने वर्षावन के बड़े हिस्से को नुकसान पहुंचाया है। पर्यावरण संगठनों की रिपोर्ट्स पर गौर करें, तो बीते कुछ दशकों में अमेजन वर्षावन का एक बड़ा हिस्सा नष्ट हो चुका है। ऐसे में वैज्ञानिक चिंतित हैं कि, यह जंगल एक ऐसे “टिपिंग पॉइंट” के करीब पहुंच सकता है, जहां से वापसी मुश्किल हो जाएगी।

 वनों की कटाई और पेड़ों को जलाना बनी समस्या 

अमेजन वर्षावन वैश्विक जलवायु प्रणाली में एक विशाल “कार्बन सिंक” की भूमिका निभाता है। कहने का मतलब ये हैं कि ये वातावरण से भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर उसे पेड़ों और मिट्टी में संग्रहीत करता है, लेकिन जब वनों की कटाई होती है और पेड़ जलाए जाते हैं, तो यही संग्रहीत कार्बन वापस वातावरण में छोड़ा जाता है, जिससे वैश्विक तापमान बढ़ने की समस्या और गंभीर हो जाती है।

Amazon River

 कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में यह भी बताया गया है कि, अमेजन के कुछ हिस्से अब कार्बन सोखने के बजाय कार्बन छोड़ने लगे हैं, जो दुनिया के लिए चिंता जनक विषय है।

 हालांकि, अमेजन को बचाने के लिए कुछ वैज्ञानिक और संगठन आगे आये हैं और इसका नतीजा है कि दुनिया भर में जागरूकता बढ़ रही है। ब्राज़ील और अन्य अमेजन बेसिन देशों की सरकारों ने संरक्षित क्षेत्र और राष्ट्रीय उद्यान स्थापित किए हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठन और गैर-सरकारी संस्थाएं स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर सतत विकास मॉडल पर काम कर रही हैं, ताकि आर्थिक गतिविधियों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जा सके। सैटेलाइट निगरानी तकनीक की मदद से अवैध कटाई पर नज़र रखना अब पहले से आसान हो गया है और कई क्षेत्रों में वृक्षारोपण अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

 समूची मानवता की धरोहर है अमेजन 

अमेजन नदी और उसका वर्षावन केवल दक्षिण अमेरिका की संपत्ति नहीं, बल्कि समूची मानवता की साझी धरोहर है। यह न केवल असंख्य जीव-जंतुओं और आदिवासी समुदायों का घर है, बल्कि पूरी पृथ्वी के जलवायु संतुलन को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। आज जब जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट वैश्विक चुनौती बन चुके हैं, अमेजन का संरक्षण केवल किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का साझा दायित्व है। इस अद्भुत प्राकृतिक धरोहर को बचाना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और संतुलित पृथ्वी सुनिश्चित करने की दिशा में सबसे ज़रूरी कदम है।

 

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