
नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे के निर्माण के समय से टोल में छूट की मांग कर रहे जेवर क्षेत्र के किसानों और स्थानीय निवासियों का 14 साल पुराना इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। प्रशासन ने जेवर टोल प्लाजा पर स्थानीय ग्रामीणों को टोल शुल्क से पूरी तरह छूट देने का बड़ा फैसला लिया है। हालांकि, इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए पात्र निवासियों को 17 सितंबर तक अपने वाहनों का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। ये फैसला यमुना विकास प्राधिकरण (YEIDA) और एक्सप्रेसवे संचालक कंपनी के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठकों के बाद लिया गया। इसका सीधा फायदा आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों लोगों को मिलेगा।
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इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए जेवर विधानसभा क्षेत्र के विधायक ठाकुर धीरेंद्र सिंह ने बताया कि, यह फैसला यूं ही नहीं लिया गया, बल्कि इसके पीछे लंबी प्रक्रिया और गंभीर प्रयास शामिल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि, यमुना विकास प्राधिकरण यानी यीडा, यमुना एक्सप्रेसवे का संचालन करने वाली जयप्रकाश एसोसिएट्स और संबंधित कंपनी के अधिकारियों के साथ कई दौर की उच्चस्तरीय बैठकें हुईं। इन बैठकों में जेवर क्षेत्र के निवासियों की समस्याओं और उनकी वर्षों पुरानी मांग पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसके बाद सभी पक्षों के बीच एक ऐतिहासिक सहमति बन पाई और फैसला हुआ। विधायक ने इसे स्थानीय जनता की एक बड़ी जीत करार दिया है।
किन गांवों के लोगों को मिलेगा लाभ
इस फैसले के अनुसार, जेवर एक्सप्रेसवे से प्रभावित होने वाले आसपास के गांवों के निवासियों को टोल छूट की इस सुविधा का सीधा लाभ मिलेगा। हालांकि, इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए स्थानीय लोगों को एक निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि, पात्र निवासियों को 17 सितंबर तक जेवर टोल प्लाजा पर बनाए गए विशेष काउंटर पर अपने जरूरी दस्तावेज जमा कराने होंगे। यह अंतिम तिथि बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बाद ही पात्र वाहनों की सूची तैयार की जाएगी।
किन दस्तावेजों की होगी जरूरत
इस टोल छूट योजना का लाभ उठाने के इच्छुक निवासियों को कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे, जिनके बिना पंजीकरण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकेगी। इनमें सबसे पहला है स्थानीय निवास का प्रमाण पत्र, जो या तो ग्राम प्रधान अथवा किसी सक्षम प्राधिकारी के पत्र के रूप में हो सकता है, या फिर बिजली बिल के जरिए भी इसे प्रमाणित किया जा सकता है। इसके अलावा पहचान पत्र के तौर पर आधार कार्ड की कॉपी जमा करना अनिवार्य होगा। साथ ही, जिस वाहन के लिए टोल छूट चाहिए, उसकी आरसी यानी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी जमा करना जरूरी होगा।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि, दस्तावेज जमा करने के बाद ही प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाएगी, बल्कि इसके बाद जमा किए गए सभी दस्तावेजों की गहन जांच और सत्यापन की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। इस सत्यापन प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही संबंधित वाहन को फास्टैग या टोल सिस्टम में छूट की सूची में औपचारिक रूप से पंजीकृत किया जाएगा। यानी सिर्फ दस्तावेज जमा करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उनका सत्यापन होना भी उतना ही जरूरी है।
किसानों और रोजाना आने-जाने वालों को मिलेगी बड़ी राहत
यमुना एक्सप्रेसवे जेवर क्षेत्र और उसके आसपास बसे दर्जनों गांवों के लोगों व किसानों के लिए रोजमर्रा के आवागमन का सबसे प्रमुख और अहम साधन माना जाता है। स्थानीय किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने, बाजार जाने, कोर्ट-कचहरी के काम निपटाने या अस्पताल जाने जैसे रोजमर्रा के कार्यों के लिए अक्सर जेवर टोल प्लाजा से होकर गुजरना पड़ता है। इस दौरान हर बार टोल शुल्क चुकाना उनके लिए एक भारी आर्थिक बोझ बन जाता है, खासकर उन किसानों के लिए जिन्हें दिन में कई बार इस मार्ग से आना-जाना पड़ता है।

अब जब स्थानीय वाहनों को टोल फ्री कर दिया गया है, तो इससे रोजाना इस मार्ग से यात्रा करने वाले हजारों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। इस फैसले से न सिर्फ लोगों के पैसे बचेंगे, बल्कि उनका कीमती समय भी बचेगा, क्योंकि अब उन्हें टोल भुगतान की प्रक्रिया में रुकना नहीं पड़ेगा। खासतौर पर वे किसान जो अपनी उपज बेचने या खेती से जुड़े कामकाज के लिए रोजाना इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें इस फैसले से सबसे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद है।
17 सितंबर के बाद जारी होगी अंतिम सूची
प्रशासन और संबंधित प्राधिकरण की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि, 17 सितंबर की अंतिम तिथि के बाद ही पात्र वाहनों की पूरी और अंतिम सूची तैयार करके जारी की जाएगी। इसके पश्चात ही यह टोल छूट सुविधा पूरी तरह प्रभावी और लागू मानी जाएगी। ऐसे में स्थानीय निवासियों और किसानों से अपील की गई है कि वे समय रहते अपने सभी जरूरी दस्तावेज जमा करा दें, ताकि अंतिम तिथि के बाद उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और वे इस सुविधा से वंचित न रह जाएं।
14 साल तक चला संघर्ष
जेवर क्षेत्र के निवासियों के लिए यह फैसला किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। पिछले 14 वर्षों से चली आ रही यह मांग अब जाकर पूरी हुई है, जिसने स्थानीय लोगों के लंबे संघर्ष को सार्थक बना दिया है। यह फैसला न सिर्फ आर्थिक रूप से किसानों और ग्रामीणों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि यह प्रशासन और स्थानीय जन प्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल की एक मिसाल भी पेश करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि पंजीकरण प्रक्रिया में कितने लोग हिस्सा लेते हैं और यह योजना अंतिम रूप से कितनी सुचारू ढंग से लागू हो पाती है।
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