
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के कलक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को शनिवार को ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई आज सुबह प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में की गई। बताया जा रहा है कि, यह मस्जिद करीब 70 साल पुरानी थी और लंबे समय से कलक्ट्रेट परिसर के अंदर मौजूद थी।
इसे भी पढ़ें- जेवर एयरपोर्ट के पास यीडा का बुलडोजर एक्शन, करोड़ों की जमीन से हटा अवैध कब्जा, भू-माफियाओं में हड़कंप
रात भर चली तैयारी
जानकारी के अनुसार, प्रशासन ने इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए रातभर तैयारी की थीं। देर रात ही जेसीबी और डंपर सहित भारी मशीनरी कलक्ट्रेट परिसर पहुंचा दी गई थी, ताकि सुबह होते ही कार्रवाई शुरू की जा सके। सूत्रों के अनुसार, मस्जिद के ढांचे को हटाने का काम सुबह करीब 5 बजे शुरू हुआ। धीरे-धीरे बुलडोजर की मदद से निर्माण को गिराया गया और कुछ ही घंटों में पूरा ढांचा जमींदोज कर दिया गया।

कार्रवाई से पहले पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई थी। कलेक्ट्रेट परिसर के सभी प्रवेश द्वारों को सील कर दिया गया, जिससे किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर आने की अनुमति नहीं थी। मौके पर आरएएफ (रैपिड एक्शन फोर्स) समेत भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। पूरे अभियान के दौरान क्षेत्र में तनाव को देखते हुए एहतियातन सुरक्षा बल मुस्तैद रहे।
कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई
प्रशासन के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई अदालत के आदेश पर की गई है। बताया गया है कि, 2 सितंबर को जिला जज की ओर से आदेश जारी किया गया था, जिसके बाद मस्जिद को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इससे पहले, 16 जुलाई को जिला प्रशासन ने इस मस्जिद के निर्माण को अवैध करार दिया था। सिटी मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट में इस निर्माण को अवैध बताया गया था, जिसके आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही आगे बढ़ी।
प्रशासन का कहना है कि, सरकारी परिसर के भीतर बिना किसी वैध अनुमति के यह निर्माण खड़ा किया गया था, इसलिए इसे हटाया जाना जरूरी था। कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने किसी तरह की देरी किए बिना कार्रवाई को अंजाम दिया।
मस्जिद कमेटी और प्रशासन के बीच खींचतान
इस पूरे मामले में मस्जिद कमेटी और जिला प्रशासन के बीच निर्माण की उम्र को लेकर परस्पर विरोधी दावे सामने आए हैं। मस्जिद कमेटी ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए एक पुराना बिजली बिल पेश किया था, जो 1 जनवरी 1911 का बताया गया। कमेटी का तर्क था कि यह दस्तावेज़ साबित करता है कि, मस्जिद का निर्माण कलक्ट्रेट भवन बनने से भी पहले हो चुका था, यानी यह ढांचा दशकों पुराना और वैध है।
हालांकि, प्रशासन ने इस दावे को चुनौती देते हुए अपने सबूत पेश किए। प्रशासन की ओर से अदालत में यह जानकारी रखी गई कि सहारनपुर में बिजली की आपूर्ति सबसे पहले वर्ष 1912 में शुरू हुई थी। ऐसे में 1911 की तारीख वाला बिजली बिल तथ्यात्मक रूप से संभव नहीं ठहरता। प्रशासन के इस तर्क को अदालत में महत्वपूर्ण माना गया और इसी आधार पर आगे की कार्यवाही तय हुई।
वहीं दूसरी तरफ, स्थानीय निवासियों का कहना है कि, कलक्ट्रेट परिसर के भीतर मौजूद यह मस्जिद 70 साल से भी अधिक पुरानी है और यह इलाके की पुरानी पहचान का हिस्सा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पीढ़ियों से यह स्थान धार्मिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होता आया है।
सीनियर अधिकारी रहे मौजूद
ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते रहे। प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि कार्रवाई कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए और अदालत के निर्देशों के अनुरूप ही पूरी हो। बुलडोजर की मदद से निर्माण को चरणबद्ध तरीके से गिराया गया, और इस दौरान किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो, इसके लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात रखा गया था।
कार्रवाई पूरी होने के बाद कलक्ट्रेट परिसर से मस्जिद का पूरा ढांचा हटा दिया गया है। प्रशासन के मुताबिक, अब यह जगह सरकारी संपत्ति के रूप में परिसर के उपयोग में लाई जाएगी।
बरती जा रही सतर्कता
हालांकि, कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, लेकिन एहतियात के तौर पर प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को अगले कुछ दिनों तक बनाए रखने का निर्णय लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की अफवाह या असामाजिक गतिविधि से सख्ती से निपटा जाएगा।

स्थानीय प्रशासन ने आम जनता से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि, यह कार्रवाई पूरी तरह से अदालत के आदेश और कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है, इसलिए इसे लेकर किसी प्रकार की गलतफहमी नहीं फैलनी चाहिए।
अब क्या एक्शन लेगी मस्जिद कमेटी
गौरतलब है कि, इस पूरे प्रकरण में मस्जिद कमेटी की ओर से अपनी बात मजबूती से रखी गई थी, लेकिन प्रशासन के दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने निर्माण को अवैध मानते हुए हटाने का आदेश दिया। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या मस्जिद कमेटी इस फैसले के खिलाफ किसी उच्च अदालत का रुख करती है या नहीं। फिलहाल स्थानीय प्रशासन का कहना है कि उन्होंने अदालत के आदेश का पूरी तरह पालन किया है और आगे की किसी भी कानूनी कार्यवाही के लिए वे तैयार हैं।
इसे भी पढ़ें- LDA का बड़ा एक्शन: लखनऊ की इतनी अवैध इमारतों की उलटी गिनती शुरू, चलेगा बुलडोजर



