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यूपी के 26 जिलों में बाढ़ का कहर, चित्रकूट में 36 गांवों में पहुंचाई गई राहत सामग्री

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। प्रदेश के 26 जिले इससे प्रभावित हैं। सबसे ज्यादा असर चित्रकूट में देखने को मिल रहा है, जहां प्रशासन ने 36 गांवों के करीब 13,906 प्रभावित लोगों तक भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई हैं। प्रदेशभर में अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, और राहत-बचाव कार्यों के लिए शरणालयों, नावों, चिकित्सा दलों तथा बचाव टीमों को लगातार सक्रिय रखा गया है।

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अलर्ट मोड़ में प्रशासन

चित्रकूट में बाढ़ की गंभीर चुनौती के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। जिले से होकर बहने वाली मंदाकिनी नदी का जलस्तर 29 अगस्त को 135.20 मीटर के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था, जो अब घटकर 128.00 मीटर पर आ चुका है।

Chitrakoot Flood

हालांकि, जलस्तर में यह गिरावट राहत की बात जरूर है, लेकिन इसके बावजूद जिला प्रशासन ने निगरानी और राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती है और अभियान पूरी सतर्कता के साथ चलाया जा रहा है।

सुरक्षित स्थान पर पहुंचाए गए 688 लोग

प्रशासन के अनुसार, चित्रकूट जिले में अब तक कुल 688 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। सबसे राहत की बात यह है कि जिले में बाढ़ के कारण अब तक किसी भी प्रकार की जनहानि या पशुहानि की कोई सूचना दर्ज नहीं की गई है। बचाव अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ के 30 सदस्यों तथा राज्य आपदा मोचन बल यानी एसडीआरएफ की दो टीमों के 27 सदस्यों को तैनात किया गया है। इनके अलावा स्थानीय प्रशासन की टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

36 गांवों तक तक पहुंची मदद

जानकारी के मुताबिक, मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण कर्वी तहसील के रामघाट सहित कुल 19 गांव, राजापुर तहसील के सात गांव तथा मानिकपुर तहसील के 10 गांव प्रभावित हुए हैं। इस तरह से लगभग 36 प्रभावित गांवों के 13,906 लोगों तक प्रशासन की ओर से भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा चुकी हैं।

प्रभावित लोगों को तत्काल भोजन उपलब्ध कराने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किया गया है। इसके तहत कर्वी क्षेत्र में 24,530 लंच पैकेट, राजापुर में 4,043 लंच पैकेट और मानिकपुर में 230 लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। इस तरह अब तक कुल 28,803 लंच पैकेट प्रभावित लोगों के बीच बांटे जा चुके हैं।

 राहत किट का वितरण

प्रभावित परिवारों को दैनिक जरूरत का सामान उपलब्ध कराने के लिए भी प्रशासन ने व्यापक व्यवस्था की है। कर्वी में 1,073, राजापुर में 796 और मानिकपुर में 196 राहत किट वितरित की गई हैं। इस प्रकार जिले में अब तक कुल 2,065 राहत किट बांटी जा चुकी हैं। इसके अलावा प्रभावित लोगों को अस्थायी रूप से ठहराने के लिए जिले में 18 बाढ़ शरणालय भी लगातार क्रियाशील हैं, जहां उनके रहने-खाने की समुचित व्यवस्था की गई है।

पीड़ितों को दी गई आर्थिक सहायता

बाढ़ के कारण चित्रकूट जिले में अब तक कुल 653 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इनमें से 188 प्रभावित परिवारों को कुल 7.52 लाख रुपये की सहायता राशि उनके बैंक खातों में सीधे भेजी जा चुकी है। वहीं जिले में पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए एक मकान के मालिक को 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। शेष प्रभावित मामलों में भी सहायता राशि के भुगतान की प्रक्रिया लगातार जारी है।

Mandakini River

स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें, तो बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 28 मेडिकल टीमें एंबुलेंस और आवश्यक दवाओं के साथ तैनात की गई हैं। ये टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार स्वास्थ्य परीक्षण और दवा वितरण का कार्य कर रही हैं। इसके साथ ही किसानों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए फसल क्षति का सर्वे भी कराया जा रहा है।

12 चरवाहे और दो हजार भेड़ें बचाई गईं

प्रदेश के गाजीपुर जिले से भी एक राहत भरी खबर सामने आई है। यहां गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से डूहिया सरैया क्षेत्र के पास नदी के बीच बने एक टापू पर 12 चरवाहे और दो हजार से अधिक भेड़ें फंस गई थीं। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और सभी को सुरक्षित बचा लिया गया। यह पूरा रेस्क्यू अभियान करीब छह घंटे तक चला, जिसमें नाइट विजन ड्रोन की मदद से फंसे हुए लोगों और भेड़ों की सटीक लोकेशन का पता लगाया गया।

देर रात सूचना मिलने के बाद संयुक्त टीम तुरंत ददरी घाट पहुंची, जहां से फ्लड कंपनी पीएसी, पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नाविकों ने मिलकर समन्वित रेस्क्यू अभियान चलाया। राहत की बात यह रही कि इस पूरे अभियान के दौरान किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

सुरक्षित निकाले गए 17 हजार से अधिक लोग

बात करें पूरे प्रदेश की, तो 4 सितंबर तक उत्तर प्रदेश के कुल 26 जिले और 3.53 लाख की आबादी प्रभावित हुई है। राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक प्रदेशभर में कुल 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, जबकि 4,847 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। पूरे प्रदेश में राहत कार्यों के लिए कुल 1,312 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं। राज्य के राहत एवं बचाव तंत्र की सक्रियता के चलते अब तक कहीं से भी किसी जनहानि या पशुहानि की सूचना नहीं मिली है।

वितरित किए जे रहे लंच पैकेट और चारा

प्रदेशभर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए कुल 1,634 बाढ़ चौकियां, 1,697 नाव-मोटरबोट और 1,068 मेडिकल टीमें सक्रिय रूप से तैनात की गई हैं। प्रशासन प्रभावित लोगों तक भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के साथ-साथ स्थिति की लगातार निगरानी भी कर रहा है। अब तक प्रदेशभर में कुल 72,897 बाढ़ राहत खाद्यान्न पैकेट तथा 3,67,551 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।

UP Flood

पशुधन की सुरक्षा के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। अब तक पांच हजार क्विंटल से अधिक भूसा उपलब्ध कराया जा चुका है। वहीं स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 5.52 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 1.87 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट भी वितरित किए गए हैं। प्रदेश में बाढ़ से 45 हजार से अधिक पशु प्रभावित हुए हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि अब तक किसी भी पशु की मृत्यु की सूचना नहीं है।

बाढ़ से प्रभावित हैं ये जिले

उत्तर प्रदेश के जिन 26 जिलों में बाढ़ का असर देखा जा रहा है, उनमें अमरोहा, अयोध्या, आजमगढ़, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि सभी प्रभावित जिलों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और राहत कार्यों को और तेज करने के प्रयास जारी हैं।

 

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