
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पुलिस इतिहास में रविवार का सूर्य एक नई ऊर्जा और संकल्प के साथ उदय हुआ। राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के विभिन्न पुलिस ट्रेनिंग सेंटरों पर आयोजित दीक्षांत परेड (पासिंग आउट परेड) महज एक औपचारिक समारोह नहीं थी, बल्कि यह हजारों परिवारों के संघर्ष, पसीने और सपनों के साकार होने का जीवंत उत्सव था। नौ महीने के बेहद कठिन और अनुशासित प्रशिक्षण के बाद जब 57 हजार से अधिक नवचयनित सिपाहियों ने कदमताल करते हुए खाकी की मर्यादा बनाए रखने की शपथ ली, तो पुलिस लाइंस का मैदान तालियों की गड़गड़ाहट और गर्व के आंसुओं से सराबोर हो गया।
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सीएम ने किया सम्मानित
इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं उपस्थित रहकर युवाओं का उत्साहवर्धन किया और उन्हें समाज के प्रति संवेदनशील व अपराधियों के प्रति कठोर रहने का मंत्र दिया। दीक्षांत परेड का सबसे हृदयस्पर्शी पहलू महिला आरक्षियों की भारी उपस्थिति और उनकी असाधारण सफलता रही।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब मेधावी आरक्षियों को मंच पर सम्मानित किया, तो मैदान में मौजूद हजारों अभिभावकों की आंखें नम हो गईं। यह नजारा तब और भावुक हो गया जब सम्मान पाकर लौटी बेटियों ने अपनी पुलिस कैप उतारकर अपने किसान पिताओं और संघर्षशील माताओं के सिर पर रख दी।
गाजीपुर की नेहा यादव के लिए यह दिन किसी सुनहरे सपने जैसा था। नेहा ने न केवल प्रशिक्षण पूरा किया, बल्कि अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए बेस्ट कंपनी कमांडर समेत तीन महत्वपूर्ण पुरस्कार अपने नाम किए। मुख्यमंत्री ने उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित किया। नेहा की इस सफलता के पीछे वर्षों की तपस्या और पुलिस सेवा में आकर समाज की सेवा करने का अटूट संकल्प छिपा था।
डीजीपी ने दिलाई पद और गोपनीयता की शपथ
उत्तर प्रदेश पुलिस बल में इस दीक्षांत समारोह के साथ ही 57 हजार नए सिपाहियों की भारी-भरकम फौज शामिल हो गई है, जिसमें 12 हजार से अधिक महिला आरक्षी हैं। इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं का पुलिस बल में शामिल होना उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। डीजीपी राजीव कृष्ण ने सभी नव-आरक्षियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते हुए उन्हें उनके दायित्वों का बोध कराया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि, अब इन सिपाहियों को उनके आवंटित जिलों और कमिश्नरेट में भेज दिया गया है, जहां सोमवार से ही उनका वास्तविक और व्यावहारिक प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा। इन सिपाहियों को सीधे थानों पर तैनात किया जाएगा, ताकि वे कानून-व्यवस्था की बारीकियों, अपराध नियंत्रण के तरीकों और आम जनता के साथ व्यवहार करने की जमीनी समझ विकसित कर सकें। तीन महीने के इस मैदानी प्रशिक्षण के बाद उनकी दक्षता के आधार पर तैनाती में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
प्रेरक है आरक्षियों की कहानी
समारोह में मेधावी आरक्षियों की सफलता की कहानियों ने हर किसी को प्रेरित किया। ललितपुर की रिया सिंह कुशवाह की कहानी विशेष रूप से चर्चा का विषय रही। एमएससी की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद रिया एक शिक्षिका के रूप में कार्य कर रही थीं, लेकिन खाकी वर्दी के प्रति उनके जुनून ने उन्हें शिक्षक की सुरक्षित नौकरी छोड़कर पुलिस सेवा में आने के लिए प्रेरित किया।

रिया को परेड कमांडर द्वितीय का सम्मान मिला। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कड़े अनुशासन और टीमवर्क को देते हुए कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, उनका अगला लक्ष्य सब-इंस्पेक्टर बनकर पुलिस विभाग को अपनी सेवाएं देना है। इसी तरह कुमारी सोनम को परेड कमांडर तृतीय के रूप में सम्मानित किया गया, जिन्होंने प्रशिक्षण के दौरान अपनी शारीरिक और मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया।
जौनपुर की शीतल तिवारी और पूजा देवी जैसी कई महिला आरक्षियों के लिए यह दिन व्यक्तिगत गौरव से कहीं बढ़कर था। उनके परिवारों ने आर्थिक तंगी और सामाजिक बाधाओं के बावजूद अपनी बेटियों को इस मुकाम तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। शीतल ने भावुक होकर बताया कि, उनके पिता का हमेशा से सपना था कि उनकी बेटी पुलिस की वर्दी पहने और आज वह सपना पूरा हो गया है।
संकल्प अडिग हो, तो सफलता कदम चूमती है
कानपुर की मानसी त्रिवेदी और मऊ की कुमारी सोनम की सफलता यह दर्शाती है कि, सीमित संसाधनों और अभावों के बीच भी अगर संकल्प अडिग हो, तो सफलता कदम चूमती है। सोनम ने प्रशिक्षण के दौरान दो अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार जीतकर यह साबित कर दिया कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता।
इस भव्य समारोह ने प्रदेशवासियों को यह भरोसा दिलाया कि, आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि, पुलिस का चेहरा मानवीय होना चाहिए ताकि पीड़ित व्यक्ति बिना किसी डर के थाने आ सके। उन्होंने नवनियुक्त सिपाहियों को याद दिलाया कि उनकी वर्दी का सम्मान तभी है जब वे समाज के अंतिम व्यक्ति को न्याय दिला सकें।
57 हजार परिवारों की उम्मीदें आज खाकी के रूप में सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। यह परेड केवल एक प्रशिक्षण की समाप्ति नहीं थी, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस के एक नए युग की शुरुआत थी, जहां जोश के साथ होश और शक्ति के साथ संवेदनशीलता का अद्भुत संगम देखने को मिला। अब ये सिपाही विभिन्न जिलों में जाकर न केवल शांति व्यवस्था कायम करेंगे, बल्कि यूपी पुलिस के गौरवशाली इतिहास में अपना नाम दर्ज कराएंग
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