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प्रेमपुर में युवक को कुचलने वाले आरोपी के खिलाफ पुलिस ने अब तक लिया एक्शन, बचाव का आरोप
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चंदौली के रसूखदार ठेकेदार छत्रबली सिंह का भतीजा है मुख्य आरोपी
अनिल कुमार
चंदौली। जनपद में स्थित रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पैतृक गांव भभौरा के निकट स्थित रघुनाथपुर ग्राम सभा के गांव प्रेमापुर में भाजपा को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। ये गांव दशकों से भाजपा का गढ़ रहा है, क्योंकि इस गांव के अधिकांश लोग राजनाथ सिंह के परिवार से ताल्लुक रखते हैं। इसके अलावा क्षत्रिय बहुल ये क्षेत्र जिला अध्यक्ष काशीनाथ सिंह का गृह क्षेत्र भी है। बावजूद इसके यहां के लोगों का भगवा रंग से मोह भंग हो गया है। परिणाम स्वरूप सैयदराजा के पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू के नेतृत्व में यहां के करीब 150 क्षत्रिय ग्रामीणों ने एक साथ समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली और सत्ता पक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
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धनबल के आगे सिस्टम नतमस्तक
आपको बता दें कि, यह विद्रोह किसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए नहीं किया गया है, बल्कि अपनी ही सरकार द्वारा किए जा रहे अन्याय के विरुद्ध उपजा आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि, एक रसूखदार ठेकेदार के धनबल के आगे सिस्टम और नेता नतमस्तक हैं, जिसके चलते पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा। रसूख की राजनीति और पुलिसिया सुस्ती ने बीजेपी के इस पारंपरिक वोट बैंक के उस गढ़ में सेंध लगा दी है, जिसे आज तक विपक्षी दल नहीं भेद सके थे।

ग्रामीणों का आरोप है कि, गांव के ही रहने वाले गोरखनाथ सिंह के पुत्र पीयूष सिंह (26) 31 मार्च को करीब साढ़े सात बजे अपने साथी दिग्विजय सिंह को अपनी बुलेट पर बैठाकर गांव से चकिया की तरफ जा रहे थे। पीयूष और दिग्विजय अभी रघुनाथपुर गांव के पास पहुंचे ही थे कि पीछे से आ रही एक तेज रफ्तार मिड एसयूवी ने बुलेट को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही पीयूष और दिग्विजय बाइक समेत गिर गये। इसके बाद एसयूवी चालक ने गाड़ी भगाने के चक्कर में सड़क पर गिरे पीयूष सिंह के ऊपर दोबारा से गाड़ी चढ़ा दी और उसे घसीटते हुए कुछ दूर तक ले गये। इसके बाद वह भाग निकला।
इस घटना में पीयूष गंभीर रूप से घायल हो गये। वहीं दिग्विजय को भी चोटें आईं। दुर्घटना की सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंच गये और आनन फानन में पीयूष को उठाकर डीसीएच चकिया ले गये। पीयूष की गंभीर हालत को देखते हुए डाक्टरों ने उसे बीएचयू ट्रामा सेंटर वाराणसी के लिये रेफर कर दिया। उसी दिन रात ग्यारह बजे पीयूष की इलाज के दौरान मौत हो गई।
इस घटना से परिजनों में कोहराम मच गया और गांव में मातम छा गया। आवश्यक कानूनी कार्रवाई के बाद एक अप्रैल को चकिया कोतवाली में अज्ञात कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया, लेकिन पुलिस ने आरोपी को पकड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। पुलिस की इस लापरवाह कार्यशैली ने नाराज ग्रामीण खुद ही कार चालक और गाड़ी का पता लगाने में जुट गये। जांच पड़ताल में गोरखनाथ सिंह को पता चला कि, पीयूष को टक्कर मारने वाली ब्रीजा गाड़ी संख्या यूपी 65 डीके 1245 इलिया थाना क्षेत्र के तियरी ग्राम सभा का विकास सिंह उर्फ विक्कू पुत्र शिवाजी सिंह चला रहा था।
पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने से किया इनकार
इसके बाद गोरखनाथ सिंह ने तीन अप्रैल को एक बार फिर से नामजद मुकदमा दर्ज करने आवदेन दिया दिया, लेकिन चकिया पुलिस ने उक्त आरोपी चालक के खिलाफ ना तो मुकदमा दर्ज किया और ना ही टक्कर मारने वाली गाड़ी के बारे में पता लगाने का प्रयास किया। तमाम कोशिश के बाद भी चकिया कोतवाल ने आरोपी कार चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया। लगातार भागदौड़ और सिफारिश के बाद भी चकिया कोतवाली पुलिस ने आरोपी विकास सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
बताया जा रहा है कि, तियरी का रहने वाला आरोपी विकास सिंह चंदौली के धनबली भाजपा नेता एवं ठेकेदार छत्रबली सिंह का भतीजा है। ग्रामीणों का आरोप है कि, चकिया तहसील क्षेत्र में आने वाले थाने, नेता और स्थानीय विधायक सभी छत्रबली सिंह के इशारे पर ही काम करते हैं, क्योंकि इन लोगों का वित्त पोषण छत्रबली सिंह के द्वारा ही किया जाता है।
यही वजह है कि, चकिया कोतवाली में आवेदन देने के बाद भी आरोपी विकास सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह एवं विधायक कैलाश आचार्य ने भी पीड़ित परिवार की कोई मदद नहीं की, क्योंकि छत्रबली विधायक का प्रतिनिधि भी है। इसी वजह से ना तो स्थानीय विधायक ने कोई मदद की और ना ही भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह अपने ग्राम पंचायत के लोगों को न्याय दिलवा सके।
जिले में चलता है छत्रबली का सिक्का
आरोपी विकास सिंह के चाचा छत्रबली सिंह ठेकेदार होने के साथ चंदौली के जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुके हैं। छत्रबली साल 2010 में बसपा के टिकट पर लड़कर जिला पंचायत अध्यक्ष बने थे, लेकिन जैसे ही प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ, वैसे ही वे सपा में शामिल हो गए। इसके बाद साल 2016 में महिला सीट होने पर उन्होंने अपनी पत्नी सरिता सिंह को सपा से लड़ाकर जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया। इसके धनबल के आगे सुशील सिंह की पत्नी तथा भाजपा प्रत्याशी किरन सिंह को हार का सामना करना पड़ा।
प्रदेश में जब एक बाद फिर सत्ता बदली से और बीजेपी का शासन शुरू हुआ तो छत्रबली ने भी सपा से किनारा कर लिए और भाजपा का दामन थाम लिया। जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट ओबीसी के लिये आरक्षित हुई तो अपने चालक रहे दीनानाथ शर्मा को भाजपा से लड़ाकर अध्यक्ष बनवा दिया। फिर चकिया विधायक का प्रतिनिधि बनकर पूरा जिला पंचायत से लेकर विधायकी तक का सारा सिस्टम खुद ही देखता है। सत्ताधारी दल के साथ चलने वाले छत्रबली का पूरे जिले में सिक्का चलता है।
कथित तौर पर अपनी सरकार होने के बावजूद जिला एवं स्थानीय स्तर से एक पीडि़त पिता, जिसके बेटे की मौत एक एक्सीडेंट में हो गई है’ को न्याय नहीं मिल रहा है। यही वजह है कि, हमेशा से भाजपा को अपना समर्थन देने वाले ग्रामीणों ने अब उसका साथ छोड़ने का फैसला ले लिया और समाजवादी पार्टी के साथ चले गये। प्रेमापुर गांव के 150 क्षत्रियों ने समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्ल्यू से सम्पर्क कर सार्वजनिक रूप से सपा की सदस्यता ले ली।
बीजेपी के कार्यकर्ताओं को भी नहीं मिल रहा न्याय
राजनाथ सिंह के गढ़ में इतना बड़ा घटनाक्रम हो जाने के बाद भी चंदौली एवं उत्तर प्रदेश के भाजपा नेताओं के माथे पर कोई शिकन नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि, ये दर्द सिर्फ प्रेमापुर गांव का ही नहीं है, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों का है, जो हमेशा से भाजपा को वोट देते रहे हैं। इलाके के तमाम भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप कई कि, इस पार्टी में बाहर से आने वाले छत्रबली सिंह टाइप के लोगों का ही बोलबाला है। इस पार्टी ने अपने पुराने लोगों के लिए न तो जगह बची है और न ही न्याय की उम्मीद की जा सकती है।
इस संदर्भ में पुलिस का पक्ष जानने के लिये चकिया कोतवाल के सीयूजी नंबर 9454403182 पर कॉल कर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई।
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