बंगाल रवाना होने से पहले CM योगी ने लगाया जनता दरबार, समस्याएं सुन दिया निस्तारण का आश्वासन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहचान एक सख्त प्रशासक के रूप में तो है ही, लेकिन उनके व्यक्तित्व का एक मानवीय और बेहद संवेदनशील पहलू सोमवार की सुबह लखनऊ में एक बार फिर देखने को मिला। पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में अंतिम दिन के प्रचार के लिए रवाना होने से ठीक पहले, मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास पर ‘जनता दर्शन’ का आयोजन किया।

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नन्हें मुन्नों को दुलारा

यह महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन सैकड़ों फरियादियों के लिए उम्मीद की एक किरण था, जो चिलचिलाती धूप और बेतहाशा गर्मी के बावजूद अपनी शिकायतों की पोटली लेकर सूबे के मुखिया के पास पहुंचे थे। सुबह के इस जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने न केवल लोगों की समस्याओं को सुना, बल्कि वहां मौजूद नन्हें-मुन्ने बच्चों को चॉकलेट बांटकर और उन्हें दुलारकर यह संदेश भी दिया कि सत्ता का शीर्ष पद उनके लिए सेवा का एक माध्यम मात्र है।

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दरअसल, सोमवार का दिन मुख्यमंत्री के लिए बेहद व्यस्तताओं भरा था। एक तरफ बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण का धुआंधार प्रचार था, तो दूसरी तरफ अपने प्रदेश की जनता की छोटी-बड़ी समस्याओं का बोझ, लेकिन योगी आदित्यनाथ ने जनसेवा के अपने संकल्प को सर्वोपरि रखा।

जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने एक-एक फरियादी के पास जाकर उनसे सीधे संवाद किया। उनके हाथों से प्रार्थना पत्र लिए और कई मामलों में तो मौके पर ही मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए तुरंत समाधान के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री का रुख उन अधिकारियों के प्रति बेहद सख्त नजर आया, जो फाइलों को लटकाने या फरियादियों को टालने का काम करते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि, जनहित के मामलों में किसी भी तरह की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बोले- अब कानून का राज है

मुख्यमंत्री के पास पहुंचे प्रार्थना पत्रों में सबसे अधिक संख्या राजस्व और पुलिस विभाग से संबंधित शिकायतों की थी। कई बुजुर्गों ने जमीन पर अवैध कब्जे की बात कही, तो कई महिलाओं ने पुलिसिया कार्रवाई में देरी की शिकायत दर्ज कराई। इन सभी को मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज है और किसी भी गरीब या असहाय के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जो भी समस्या संज्ञान में आई है, उसका निराकरण एक निश्चित समय सीमा के भीतर होना चाहिए और संबंधित पीड़ित को इसकी सूचना भी दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल कागजी खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा, जमीनी स्तर पर समाधान दिखना चाहिए।

जनता दर्शन का सबसे भावुक और चर्चा का विषय बना वह पल, जब मुख्यमंत्री परिजनों के साथ आए बच्चों के पास पहुंचे। योगी आदित्यनाथ का बच्चों के प्रति प्रेम जगजाहिर है और सोमवार को भी यही देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने एक मां की गोद में बैठे मासूम बच्चे की तरफ हाथ बढ़ाया और मुस्कुराते हुए पूछा कि क्या तुम्हें चॉकलेट चाहिए। जैसे ही बच्चे ने अपनी तोतली आवाज में हामी भरी और खिलखिलाया, मुख्यमंत्री ने उसे दुलारते हुए चॉकलेट दी। वहां मौजूद अन्य बच्चों को भी बिस्कुट और चॉकलेट के पैकेट दिए गए। यह नजारा देखकर वहां खड़े फरियादी भी अपनी पीड़ा भूलकर मुस्कुराने लगे।

खतरे में न डालें स्वास्थ्य

उत्तर प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने फरियादियों से अपील की। उन्होंने देखा कि कई लोग बहुत दूर-दराज के जिलों से केवल एक छोटी सी शिकायत लेकर लखनऊ पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने अपने जिले के जिलाधिकारी या पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की थी? जब कुछ लोगों ने नकारात्मक उत्तर दिया, तो मुख्यमंत्री ने उन्हें समझाते हुए कहा कि, इतनी बेतहाशा गर्मी में आप लोग अपना स्वास्थ्य खतरे में न डालें।

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उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सबसे पहले अपने जिले के संबंधित अधिकारियों के पास जाएं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि, अब शासन स्तर से ऐसी व्यवस्था की गई है कि, जिलों के अधिकारियों को हर हाल में जनता की बात सुननी ही होगी। अगर जिले स्तर पर सुनवाई नहीं होती है, तब वे लखनऊ आने का कष्ट करें।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हिदायत दी कि गर्मी के इस मौसम में तहसीलों और थानों पर आने वाले लोगों के लिए पीने के पानी और बैठने की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी फरियादी खाली हाथ वापस नहीं जाना चाहिए। अधिकारियों को संवेदनशील बनने की जरूरत है क्योंकि जो व्यक्ति आपके पास आता है, वह बहुत उम्मीद के साथ आता है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारी सरकार अंत्योदय के सिद्धांत पर काम कर रही है, जिसका अर्थ है समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा करना।

तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही

इस जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री के साथ मुख्य सचिव और डीजीपी स्तर के अधिकारियों की मौजूदगी यह दर्शा रही थी कि मुख्यमंत्री इन शिकायतों के निपटारे को लेकर कितने गंभीर हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे जिलों से आने वाली रिपोर्टों की रैंडम चेकिंग करें ताकि यह पता चल सके कि फरियादी वाकई संतुष्ट है या नहीं।

मुख्यमंत्री ने साफ किया कि अगर किसी जिले से बार-बार एक ही तरह की शिकायतें लखनऊ पहुंचती हैं, तो यह माना जाएगा कि वहां का प्रशासन अपना काम ठीक से नहीं कर रहा है और ऐसे अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। जनता दर्शन समाप्त करने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सीधे एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए, जहां से उन्हें पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रचार के लिए जाना था।

 

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