अब टेक हब भी बनेगा यूपी, राजधानी में AI सिटी बनाने का ऐलान, जानें कितनी आएगी लागत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ अब केवल नवाबों के शहर और कबाबों के स्वाद तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि यह बहुत जल्द दुनिया के नक्शे पर एक ‘टेक हब’ के रूप में उभरने को तैयार है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लखनऊ के शहरी ढांचे को एक डिजिटल और हाईटेक जामा पहनाने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है।

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परियोजना को मिली हरी झंडी

लखनऊ की वृंदावन योजना में प्रदेश की पहली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिटी विकसित करने की औपचारिक घोषणा कर दी गई है। यह परियोजना न केवल उत्तर प्रदेश के शहरी परिदृश्य को बदल देगी, बल्कि इसे देश के उन चुनिंदा शहरों की कतार में खड़ा कर देगी जहां भविष्य की तकनीक यानी एआई और रोबोटिक्स पर काम होगा।

उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की 275वीं बोर्ड बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दे दी गई है। प्रमुख सचिव आवास पी. गुरु प्रसाद की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में न केवल एआई सिटी के प्रस्ताव को मंजूरी मिली, बल्कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए परिषद ने 4173.66 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट पर भी अपनी मुहर लगा दी।

AI City to be built in Lucknow a

यह बजट राज्य में बुनियादी ढांचे के विस्तार और नई आवासीय योजनाओं के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। लखनऊ की वृंदावन योजना के सेक्टर-15 में लगभग 12 एकड़ की बेशकीमती जमीन पर यह एआई सिटी कम बिजनेस पार्क आकार लेगा। इस हाईटेक शहर की सबसे खास बात इसकी निर्माण तकनीक और संचालन मॉडल है।

368 करोड़ होगा निवेश

जानकारी के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 368 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जिसमें सरकार और निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता का संगम देखने को मिलेगा। इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद और यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर भी किए जा चुके हैं। यह एआई सिटी केवल ऊंची इमारतों का समूह नहीं होगी, बल्कि यहां स्टार्टअप्स, आईटी कंपनियों और डेटा सेंटर्स के लिए एक विश्वस्तरीय इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा, जिससे लखनऊ को सिलिकॉन वैली जैसी नई पहचान मिल सके।

आवास विकास परिषद द्वारा स्वीकृत 4173 करोड़ रुपये के बजट का विश्लेषण करें, तो सरकार का फोकस जमीन अधिग्रहण और निर्माण दोनों पर बराबर है। इस बजट में आय का सबसे बड़ा जरिया संपत्तियों की बिक्री को बनाया गया है, जिससे लगभग 2004 करोड़ रुपये आने की उम्मीद है। खर्च के मोर्चे पर सबसे बड़ी राशि, यानी 1927.15 करोड़ रुपये नई जमीनों की खरीद पर खर्च की जाएगी, ताकि भविष्य की आवासीय और व्यावसायिक जरूरतों को पूरा किया जा सके। इसके अलावा, निर्माण और विकास कार्यों के लिए 702 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि निर्माणाधीन योजनाएं समय पर पूरी हों और गुणवत्ता के मानकों पर खरी उतरें।

अयोध्या का भी होगा कायाकल्प 

एआई सिटी के साथ-साथ इस बजट में अयोध्या के कायाकल्प को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। राम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए वहां बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए 1037.89 करोड़ रुपये का अलग से आवंटन किया गया है। यह राशि अयोध्या में नई सड़कों, आवासीय व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं के विकास पर खर्च होगी। इसके साथ ही, वाराणसी और मऊ जैसे शहरों में भी नई आवासीय योजनाओं को मंजूरी देकर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विकास का पहिया केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश के अन्य महत्वपूर्ण शहरों तक भी पहुंचेगा।

हालांकि, इस बजट बैठक में उन मध्यमवर्गीय परिवारों को थोड़ी निराशा हाथ लगी है जो सस्ते फ्लैटों की उम्मीद लगाए बैठे थे। प्रदेश भर में खाली पड़े लगभग 9,000 फ्लैटों की कीमतों में 15 प्रतिशत की भारी कटौती का एक प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा गया था, जिसे फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

खुलेंगे विदेशी निवेश के द्वार 

बोर्ड ने स्पष्ट किया कि, बिना विस्तृत लागत विश्लेषण और नई नीति के कीमतों में कमी करना संभव नहीं है, इसलिए इस पर नई रिपोर्ट मांगी गई है। इसके अलावा, अब वृंदावन और अवध विहार जैसी विकसित कॉलोनियों में जमीन के दाम सीधे डीएम सर्किल रेट से लिंक कर दिए गए हैं, जिसका मतलब है कि आने वाले समय में यहां घर बनाना या जमीन खरीदना और महंगा हो सकता है। निर्माणाधीन योजनाओं में भी हर साल 8.70 प्रतिशत की दर से कीमतों में बढ़ोतरी का नियम लागू कर दिया गया है।

टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर के इस नए संगम को लखनऊ के भविष्य के लिए ‘गेम चेंजर’ माना जा रहा है। एआई सिटी के विकसित होने से न केवल उत्तर प्रदेश में विदेशी निवेश के द्वार खुलेंगे, बल्कि प्रदेश के हजारों प्रतिभावान युवाओं को अपने ही शहर में रोजगार के बेहतरीन अवसर मिलेंगे।

अब तक आईटी क्षेत्र में करियर बनाने के लिए बेंगलुरु, हैदराबाद या नोएडा का रुख करने वाले युवाओं के लिए लखनऊ एक नया गंतव्य बनेगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को डिजिटल इंडिया अभियान के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हाईटेक शहर के बनने से लखनऊ का रियल एस्टेट मार्केट भी नई ऊंचाइयों को छुएगा और आसपास के क्षेत्रों में भी व्यावसायिक गतिविधियों में जबरदस्त तेजी आएगी।

 

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