
लखनऊ। उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक और बड़ा दांव खेल दिया है। राज्य की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2029-30 तक 1 ट्रिलियन डॉलर (OTD) के जादुई आंकड़े तक पहुंचाने के लिए अब जिला स्तर पर थिंक टैंक तैयार किया जा रहा है।
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तैयार हुआ प्रस्ताव
सरकार प्रदेश के सभी 75 जिलों में दो-दो मुख्यमंत्री-फेलो की तैनाती करने जा रही है। यह कदम न केवल उच्च शिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलेगा, बल्कि जिला स्तर पर छिपी आर्थिक संभावनाओं को साक्ष्य और डेटा के आधार पर वैश्विक पटल पर लाने का काम भी करेगा। इस महत्वाकांक्षी योजना का प्रस्ताव तैयार हो चुका है और इसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
मुख्मंत्री योगी आदित्यनाथ ने 31 मार्च को आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह स्पष्ट कर दिया था कि, 1 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रत्येक प्रशासनिक इकाई को आर्थिक इकाई के रूप में सक्रिय होना होगा। इसी विजन को धरातल पर उतारने के लिए प्रत्येक जिले में दो मुख्यमंत्री फेलो तैनात किए जाने का निर्णय लिया गया है।
इनमें से एक आर्थिक विकास विशेषज्ञ होगा और दूसरा डेटा विश्लेषक होगा। इस पहल से प्रदेश के 150 प्रतिभाशाली युवाओं को सीधे तौर पर शासन की विकास नीतियों के साथ जुड़कर काम करने का अवसर मिलेगा। नियोजन विभाग इस पूरी प्रक्रिया का खाका तैयार कर चुका है और कैबिनेट की मुहर लगते ही इनकी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
ये होगी शैक्षणिक योग्यता
इन विशिष्ट पदों पर चयन के लिए सरकार ने शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी दक्षता के कड़े मानक निर्धारित किए हैं। सरकार की मंशा है कि इस मिशन में केवल वे ही युवा शामिल हों जो डेटा की बारीकियों और वैश्विक आर्थिक रुझानों को समझते हों। आर्थिक विकास विशेषज्ञ के पद के लिए उम्मीदवारों के पास अर्थशास्त्र, एप्लाइड इकोनॉमिक्स, इकोनोमेट्रिक्स या फाइनेंस में परास्नातक डिग्री अथवा एमबीए होना अनिवार्य होगा।
वहीं, डेटा विश्लेषक के लिए सांख्यिकी, एप्लाइड स्टैटिस्टिक्स, डेटा साइंस या बिजनेस एनालिटिक्स में परास्नातक अथवा एमबीए की योग्यता तय की जा रही है। इन विशेषज्ञों का मुख्य कार्य जिला स्तर पर मौजूद स्थानीय संसाधनों, ओडीओपी उत्पादों और निवेश के अवसरों का वैज्ञानिक विश्लेषण करना होगा।
चयनित सीएम फेलो की जिम्मेदारी केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें जिला स्तर पर संचालित सभी आर्थिक गतिविधियों की मासिक प्रगति रिपोर्ट एक विशेष ऑनलाइन डैशबोर्ड पर अपलोड करनी होगी। ये फेलो इस बात का सूक्ष्म विश्लेषण करेंगे कि जिले में निवेश की क्या संभावनाएं हैं और किन क्षेत्रों में सुधार करके स्थानीय जीडीपी को बढ़ाया जा सकता है। उनकी सुधारात्मक और सुझावात्मक रिपोर्ट सीधे जिला ओटीडी सेल के संज्ञान में लाई जाएगी, जिस पर जिलाधिकारी और शासन स्तर के अधिकारी कार्रवाई करेंगे। यह पहली बार है जब उत्तर प्रदेश में जिला स्तर पर आर्थिक विकास को ट्रैक करने के लिए इतनी उच्च स्तरीय तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग किया जा रहा है।
पिछड़े जिलों के लिए गेम चेंजर होगा प्रोजेक्ट
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, ये सीएम फेलो जिले के आर्थिक ढांचे की आंख और कान के रूप में काम करेंगे। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी जिले में कृषि आधारित उद्योगों की संभावना अधिक है, तो आर्थिक विकास विशेषज्ञ वहां निवेश लाने के लिए रणनीति तैयार करेगा, जबकि डेटा विश्लेषक बाजार की मांग और आपूर्ति के आंकड़ों के जरिए उस रणनीति को पुख्ता करेगा। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से औद्योगिक विकास तक पहुंच सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उत्तर प्रदेश के उन पिछड़े जिलों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, जो अब तक अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहे थे। स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने और रियल-टाइम डेटा के आधार पर नीतियां बनाने से न केवल जिलों की आय बढ़ेगी, बल्कि राज्य के समग्र राजस्व में भी भारी वृद्धि होगी। योगी सरकार की यह सीएम फेलो योजना युवाओं की नई सोच और सरकार के प्रशासनिक अनुभव को एक मंच पर लाकर 1 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को समय सीमा के भीतर हासिल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग मानी जा रही है।
कैबिनेट से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही नियोजन विभाग इसके लिए विज्ञापन जारी करेगा, जिससे प्रदेश के मेधावी युवाओं को अपनी मिट्टी के विकास में सीधे योगदान देने का गौरवपूर्ण अवसर प्राप्त होगा।
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